किसी के सगे नहीं ट्रंप! मित्र देश में भी सेना भेजने की धमकी; ग्रीनलैंड की उलटी गिनती शुरू

Jan 07, 2026 06:43 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, वाशिंगटन
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यूरोपीय सहयोगी ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड और स्पेन के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर डेनमार्क का समर्थन किया है और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने की बात कही है।

किसी के सगे नहीं ट्रंप! मित्र देश में भी सेना भेजने की धमकी; ग्रीनलैंड की उलटी गिनती शुरू

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खनिज संसाधनों से भरपूर डेनमार्क के स्वशासित क्षेत्र ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाने के लिए सैन्य कार्रवाई सहित विभिन्न विकल्पों पर चर्चा शुरू कर दी है। वाइट हाउस द्वारा मंगलवार को की गई इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ गया है। डेनमार्क ने चेतावनी दी है कि इस तरह का कोई भी कदम नाटो (NATO) गठबंधन को पूरी तरह से नष्ट कर सकता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता

वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक बयान में स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप के लिए ग्रीनलैंड का अधिग्रहण एक राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि रूस और चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों को रोकने के लिए यह कदम आवश्यक है। लेविट ने कहा- राष्ट्रपति और उनकी टीम इस महत्वपूर्ण विदेश नीति लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। कमांडर-इन-चीफ के रूप में अमेरिकी सेना का उपयोग करना हमेशा एक विकल्प होता है।

क्या है ट्रंप की योजना?

'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सांसदों को बताया कि ट्रंप का पसंदीदा विकल्प ग्रीनलैंड को डेनमार्क से खरीदना है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सैन्य विकल्पों की चर्चा का मतलब यह नहीं है कि आक्रमण तुरंत होने वाला है।

नाटो (NATO) के लिए खतरा

डेनमार्क ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर बलपूर्वक नियंत्रण करने की किसी भी कोशिश से 80 साल पुराने ट्रांसअटलांटिक सुरक्षा संबंध खत्म हो जाएंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई नाटो के अनुच्छेद 5 का उल्लंघन होगी, जिसके तहत एक सदस्य देश पर हमला सभी सदस्यों पर हमला माना जाता है।

वैश्विक प्रतिक्रिया और विरोध

ग्रीनलैंड और डेनमार्क के नेताओं ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए मार्को रुबियो से मिलने का समय मांगा है, लेकिन अब तक उन्हें सफलता नहीं मिली है। ग्रीनलैंड की प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक निल्सन- उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और इसके भविष्य का फैसला केवल वहां के 57,000 निवासी ही कर सकते हैं।

डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने उम्मीद जताई कि बैठक के जरिए गलतफहमी को दूर किया जा सकेगा। यूरोपीय सहयोगी ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड और स्पेन के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर डेनमार्क का समर्थन किया है और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने की बात कही है।

सभ्य दुनिया में यह स्वीकार्य नहीं

ग्रीनलैंड में स्थानीय स्तर पर भी भारी नाराजगी है। 'ग्रीनलैंड बिजनेस एसोसिएशन' के निदेशक क्रिश्चियन केल्ड्सन ने कहा- सभ्य दुनिया में यह व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। दूसरी ओर, ट्रंप के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर कोई भी अमेरिका से सैन्य रूप से नहीं लड़ेगा।

उधर, कनाडा ने भी जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड और डेनमार्क के भविष्य का निर्णय केवल वहां के लोगों का अधिकार है। ग्रीनलैंड में पहले से अमेरिकी मौजूदगी भी है- आर्कटिक में स्थित पिटुफिक स्पेस बेस पर लगभग 150 अमेरिकी कर्मी तैनात हैं।

Amit Kumar

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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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