कंगाल देश के अमीर 'नवाब'! दिल्ली जिमखाना क्लब पर हुआ ऐक्शन, तो लाहौर में भी उठी मांग

Amit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, लाहौर
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Delhi Gymkhana club Lahore: दिल्ली जिमखाना खाली कराने के भारत सरकार के आदेश के बाद पाकिस्तान में लाहौर जिमखाना क्लब पर बवाल मच गया है। जानिए गरीबों की झुग्गियां ढहाने वाले देश में अमीरों की इस अंधेरगर्दी का पूरा सच।

कंगाल देश के अमीर 'नवाब'! दिल्ली जिमखाना क्लब पर हुआ ऐक्शन, तो लाहौर में भी उठी मांग

Delhi Gymkhana club Lahore: भारत सरकार ने 1913 में बने दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक अपनी जमीन खाली करने का आदेश दे दिया है। लीज के एक क्लॉज और जनहित का हवाला देते हुए सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया। लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान में तस्वीर इसके बिल्कुल उलट है। 1913 में ही बने 'लाहौर जिमखाना' का रुतबा आज भी कायम है। 218 अरब (पाकिस्तानी रुपये) की बेशकीमती सरकारी जमीन पर फैले इस एलीट क्लब का सालाना किराया सुनकर आप हैरान रह जाएंगे- यह महज 5,000 रुपये है।

डॉन की रिपोर्ट में सरकारी दस्तावेजों के हवाले से पाकिस्तान के इस एलीट क्लब से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

218 अरब की जमीन, किराया नाममात्र का

लाहौर जिमखाना क्लब 112 एकड़ (1091 कनाल) में फैला है। यह माल रोड, जेल रोड और जफर अली रोड से घिरा हुआ है, जो पंजाब (पाकिस्तान) का सबसे महंगा इलाका माना जाता है। मार्केट वैल्यू और असल किराए की बात करें तो इस जमीन की कुल मार्केट वैल्यू 218.2 अरब रुपये है। इस लिहाज से इसका सही सालाना किराया 4.36 अरब रुपये होना चाहिए।

छूट के बाद भी किराया 40 करोड़

2023 की सरकारी पॉलिसी के तहत, क्लबों को मार्केट रेट का 10वां हिस्सा किराए के तौर पर देना होता है। इस नियम से भी क्लब का किराया 40 करोड़ रुपये सालाना बनता है, लेकिन लाहौर जिमखाना साल भर का सिर्फ 5,000 रुपये देता है। यानी एक कनाल का किराया 50 पैसे से भी कम!

बिना इजाजत क्रिकेट ग्राउंड पर कब्जा

जिमखाना ने बाग-ए-जिन्ना (लॉरेंस गार्डन्स) के अंदर कृषि विभाग की साढ़े तीन एकड़ जमीन पर भी बिना किसी लीज या किराए के एक एक्सक्लूसिव क्रिकेट ग्राउंड बना लिया है।

एलीट क्लास का कब्जा और सरकारी खजाने से करोड़ों की मदद

इस क्लब में आम आदमी की 'नो-एंट्री' है। इसकी मेंबरशिप ग्रेड-18 और उससे ऊपर के सिविल सेवकों और सशस्त्र बलों के अधिकारियों को ही मिलती है या फिर इसे विरासत में पाया जा सकता है। साधारण सदस्यों की सूची किसी गुप्त दस्तावेज की तरह छिपा कर रखी जाती है। इतना ही नहीं, प्राइवेट क्लब होने के बावजूद इसे सरकारों से जनता के टैक्स का करोड़ों रुपये बतौर 'गिफ्ट' मिलता रहा है।

  • 1985: तत्कालीन राष्ट्रपति जिया-उल-हक और प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने 20-20 लाख रुपये दिए।
  • 2006: मुख्यमंत्री परवेज इलाही ने 5 करोड़ रुपये दिए।
  • 2014: मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ ने 1 करोड़ रुपये की मदद दी।

अमीरों के लिए नियम अलग, गरीबों पर चलता है बुलडोजर

रिपोर्ट में पाकिस्तान की न्याय प्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इस्लामाबाद और पंजाब में गरीबों की झुग्गियों (कच्ची आबादी) पर तुरंत बुलडोजर चला दिया जाता है। इस्लामाबाद के आई-11 इलाके में तो 25,000 लोगों को बेघर कर दिया गया। वहीं, 218 अरब रुपये की जमीन पर काबिज लाहौर जिमखाना पर कोई कार्रवाई नहीं होती। उलटा, इसकी लीज 1996 में ही जल्दबाजी दिखाते हुए 50 साल (2000 से 2050 तक) के लिए एडवांस में बढ़ा दी गई थी।

क्या क्लब से वापस ली जा सकती है जमीन?

कानूनी तौर पर सरकार के पास पूरी पावर है। लाहौर जिमखाना की 1996 की लीज का 'क्लॉज 6' सरकार को अधिकार देता है कि वह 6 महीने का नोटिस देकर लीज कभी भी खत्म कर सकती है। वहीं, 'क्लॉज 8' के तहत सरकार क्लब की इमारतों के लिए कोई मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं है।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि दिल्ली की तरह इस जमीन को वापस लेकर यहां मियावाकी जंगल या पब्लिक पार्क बनाया जाना चाहिए। जो 218 अरब रुपये चंद रसूखदार लोग मजे में उड़ा रहे हैं, वह रकम पंजाब के बदहाल स्वास्थ्य बजट और अस्पतालों में दवाइयों की कमी दूर करने के काम आ सकती है।

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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