चीन में 'मौत का अनुभव' लेने को पैसे लुटा रहे लोग, तेजी से बढ़ रहा डार्क टूरिज्म का क्रेज
चीन में लोग हांग्जो स्थित डिजास्टर सिमुलेशन केंद्र में नकली तूफान, बाढ़ और तबाही का अनुभव करने के लिए मोटी रकम खर्च कर रहे हैं। यहां मौत का मंजर महसूस करने के साथ वे सर्वाइवल स्किल्स भी सीख रहे हैं।

चीन में डार्क टूरिज्म का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। युवा और परिवार नकली तूफान, बाढ़ और अन्य आपदाओं का अनुभव करने के लिए मोटी रकम खर्च कर रहे हैं। हांग्जो स्थित लवक्सिंग बेस जैसे सिमुलेशन केंद्र में लोग मौत और तबाही का मंजर महसूस करने के साथ सर्वाइवल स्किल्स भी सीख रहे हैं। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, डार्क टूरिज्म की बढ़ती लोकप्रियता के साथ चीन में युवा एक अनोखे अनुभव के लिए पैसे खर्च कर रहे हैं। वे नकली तूफान, बाढ़ और अन्य आपदाओं का सामना कर रहे हैं तथा साथ ही जिंदा रहने के कौशल भी सीख रहे हैं।
यहां आपको बता दें कि डार्क टूरिज्म, जिसे दुख पर्यटन भी कहा जाता है, मृत्यु, विनाश और मानवीय पीड़ा से जुड़ी जगहों की यात्रा को कहते हैं। इसकी जड़ें सदियों पुरानी हैं। 17वीं सदी के ब्रिटेन में सार्वजनिक फांसी के दौरान बड़ी भीड़ जुटती थी। हाल के वर्षों में यह प्रवृत्ति पूरे एशिया में बढ़ी है। हालांकि इसकी लोकप्रियता ने यह सवाल भी खड़े किए हैं कि क्या ऐसे अनुभव सोचने और सीखने को प्रोत्साहित करते हैं या दुखद घटनाओं को मनोरंजन और मुनाफे का साधन बना देते हैं।
हांग्जो के केंद्र में आपदा का अनुभव
रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी चीन के हांग्जो में स्थित लवक्सिंग बेस सितंबर 2024 में खुलने के बाद से बड़ा आकर्षण बन गया है। इसे देश का पहला इमर्सिव प्राकृतिक आपदा सिमुलेशन केंद्र बताया जा रहा है। वयस्क नकली तूफान, भारी बारिश और अचानक बाढ़ का अनुभव करने के लिए 899 युआन (लगभग 12750 रुपये) देते हैं। लगभग 5000 युआन के परिवार पैकेज में जंगल में जीवित रहने और पानी से बचाव की ट्रेनिंग भी शामिल है। छह से 14 वर्ष के बच्चे चुनी हुई गतिविधियों में भाग ले सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह केंद्र 165 किलोमीटर प्रति घंटे तक की हवाएं पैदा कर सकता है। प्रवेश से पहले प्रतिभागी थर्मल सूट और हेलमेट पहनते हैं। प्रशिक्षक बचाव और आपदा प्रतिक्रिया की ट्रेनिंग देते हैं, जबकि प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मचारी किसी भी संकट में फंसे व्यक्ति की मदद के लिए तैयार रहते हैं।
डर बिल्कुल असली लगा
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से बात करते हुए शियाओफेई ने बताया कि उन्होंने कभी इतने करीब से तूफान या बाढ़ का अनुभव नहीं किया। शहर में बाढ़ के सिमुलेशन के दौरान पानी भूमिगत कार पार्क में घुस गया और उनकी गर्दन तक आ गया। उन्होंने कहा कि दम घुटने वाले डर ने मुझे भुला दिया कि मैं सिर्फ एक मुसीबत का अनुभव कर रही हूं। अचानक आई बाढ़ की कवायद और भी तीव्र थी। तेज बहाव उन्हें कंक्रीट के एक खंभे से टकरा गया, जिससे पैर पर चोट के निशान पड़ गए। उनके समूह में पूरी तरह विदेशी पर्यटक थे। अभ्यास के दौरान उन्होंने एक-दूसरे की मदद की, जिससे उन्हें इंसानियत का अहसास हुआ।
आपदाओं का अनुभव क्यों कर रहे लोग?
वुहान विश्वविद्यालय के समाज कार्य प्रोफेसर झांग योंग का कहना है कि संकट से निपटने की क्षमता का तुरंत सबूत उन लोगों के लिए खास आकर्षक हो सकता है, जो रोजमर्रा की जिंदगी में तीव्र प्रतिस्पर्धा और अनिश्चित परिणामों का सामना कर रहे हैं। यह अवधारणा संस्थापकों के अपने अनुभवों से प्रेरित है। 2012 से चीन के 'क्रेजी कपल' झांग शिन्यु और लियांग होंग ज्वालामुखी के अंदर यात्रा कर चुके हैं, चेर्नोबिल के विकिरण क्षेत्र में गए हैं, मध्य पूर्व के युद्ध क्षेत्रों से गुजरे हैं और आइसब्रेकर से अंटार्कटिका पहुंचे हैं, जहां उन्होंने शादी भी की। अब यह जोड़ा इन अनुभवों को व्यवस्थित जीवित रहने की शिक्षा कार्यक्रम में बदलना चाहता है, जो व्यावहारिक कौशल सिखाए और प्रकृति के प्रति सम्मान बढ़ाए।
क्या यह दुख को मनोरंजन बना रहा है?
हालांकि इसकी बढ़ती लोकप्रियता ने नैतिक बहस भी छेड़ दी है। एक ऑनलाइन टिप्पणीकार ने कहा कि आपदा अनुभव केंद्र जीवित रहने के कौशल सिखाने का अच्छा तरीका है, खासकर जब युवा लोग 'तकलीफ' उठाने के लिए पैसे देने को तैयार हैं। दूसरी ओर कुछ लोगों ने सवाल किया कि क्या आपदाओं को भुगतान वाले अनुभव में बदलने से उन लोगों की पीड़ा कम हो सकती है, जो असल में बाढ़ से बच गए और अपना घर खो चुके हैं।
बता दें कि चीन में वास्तविक हादसों से जुड़ी मुफ्त डार्क टूरिज्म साइटें भी हैं। इनमें सिचुआन में 2008 के वेंचुआन भूकंप और नानकिंग हत्याकांड से जुड़े स्मारक शामिल हैं। व्यावसायिक आपदा सिमुलेटर के विपरीत ये जगहें वास्तविक नुकसान और सामूहिक स्मृति पर आधारित हैं। प्रोफेसर झांग के अनुसार, ऐसी जगहों का 'मौत शिक्षा' के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।


