कोविड वैक्सीन ने ले ली हजारों जानें, दावे के समर्थन में उतरे एलन मस्क बोले- ऐसा लगा जान निकल जाएगी
फाइजर कंपनी के पूर्व टॉक्सिकोलॉजिस्ट ने जर्मनी की संसद में दावा किया कि कोविड-19 वैक्सीन की वजह से लाखों लोगों की जान चली गई। इसके बाद एलन मस्क ने दावे का समर्थन करते हुए कहा कि दूसरे डोज के बाद उन्हें लगा जैसे जान ही चली जाएगी।
कोरोना काल के दौरान जिस वैक्सीन को लेकर होड़ लगी हुई थी उसी को लेकर कई तरह के डरावने दावे भी किए जाते हैं। कोविड वैक्सीन को लेकर दावे करने वालों में अब एलन मस्क काभी नाम जुड़ गया है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 वैक्सीन का दूसरा डोज लेने पर उन्हें लगा कि जैसे यह उन्हें मार ही देगी। बता दें कि फाइजर के एक पूर्व टॉक्सिकोलॉजिस्ट ने जर्मनी की संसद में दावा किया था कि mRNA वैक्सीन को मंजूरी ही नहीं मिलनी चाहिए थी। उन्होंने दावा किया कि इस कोविड-19 वैक्सीन की वजह से जर्मनी में हजारों लोगों की जान चली गई।
अमेरिकी बायोफार्मा कंपनी फाइजर के यूरोपीय सेंटर के पूर्व टॉक्सिकोलॉजी हेड ने भी इसी तरह का दावा किया कि इतिहास में सबसे बड़े स्तर पर इस्तेमाल की गई वैक्सीन बेहद खतरनाक है। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। पिछळे सप्ताह इसे करोड़ों लोगों ने देखा। मस्क ने कहा कि इतने बड़े दावे को भी खबरों में हाइलाइट नहीं किया गया।
दुनियाभर में शुरू हो गई बहस
कोविड-19 वैक्सीन को लेकर इस तरह के दावे के बाद पूरी दुनिया में इसको लेकर बहस शुरू हो गई। बता दें कि इस बात का दावा करने वाले डॉ. हेलमुत स्टर्ज ने दशकों टॉक्सिलॉजी के क्षेत्र में काम किया है। इसमें पता लगाया जाता है कि कोई वस्तु कैसे इंसानों या फिर अन्य जीवों को प्रभावित करती है।
2007 में वह रिटायर हो गए थे। जर्मनी की धुर दक्षिणपंथी विपक्षी पार्टी की तरफ से उन्हें संसद में बुलाया गया था। उन्होंने वैक्सीन माफिया नाम की एक किताब भी लिखी। उनका कहना है कि शॉर्टकट तरीके से बिना पर्याप्त ट्रायल के ही वैक्सीन को मंजूरी दे दी गई।
स्टर्ज ने दावा किया कि इस वैक्सीन को मंजूरी देने से पहले पांच जरूरी प्रीकीनिकल सेफ्टी मेजर पर ध्यान नहीं दिया गया। वहीं फाजर-बायोएनटेक की mRNA वैक्सीन पूरी दुनिया में करोड़ों लोगों को लगा दी गई। इस दावे को लेकर मस्क ने कहा कि दूसरा डोज लेने के बाद उनकी अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ गई थी। उन्होंने कहा, मुझे ऐसा लग रहा था कि जान निकल जाएगी।
स्टर्ज का मुख्य तर्क है कि जल्दबाजी में कोविड-19 वैक्सीन का प्रीक्लीनकल ट्रायल नहीं हुआ। भारत में एम्स की एक स्टडी में कहा गया था कि युवाओं में हार्ट अटैक से वैक्सीन को कोई लेना देना नहीं है। इसमें बताया गया था कि दिल की बीमारियां ही युवाओं में दो तिहाई मौतों का कारण है।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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