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अब इस मुस्लिम देश में होगा तख्तापलट? कड़ाके की ठंड में 21 प्रांतों में भड़की बगावत की चिंगारी, एक मौत

अब इस मुस्लिम देश में होगा तख्तापलट? कड़ाके की ठंड में 21 प्रांतों में भड़की बगावत की चिंगारी, एक मौत

संक्षेप:

इस बीच, देश के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के नेतृत्व वाली सरकार प्रदर्शनकारियों से संवाद की कोशिश कर रही है। प्रदर्शनकारियों के विरोध का गुरुवार को चौथा दिन है, जो 2025 से 2026 में प्रवेश कर चुका है।

Jan 01, 2026 07:32 pm ISTPramod Praveen रॉयटर्स, दुबई
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मध्य-पूर्व के देश ईरान में दिन-ब दिन हालात बिगड़ते जा रहे हैं। वहां के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के खिलाफ लोगों के विरोध-प्रदर्शन का दायरा अब बढ़ता जा रहा है। देश के 31 में से 21 प्रांतों में खामेनेई के खिलाफ बगावत के चिंगारी भड़क उठी है। गुरुवार (1 जनवरी) को ईरान के पश्चिमी प्रांत में खराब अर्थव्यवस्था के खिलाफ भड़के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ के एक स्वयंसेवक सदस्य की मौत हो गई। प्राधिकारियों ने यह जानकारी दी है। हालिया विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों में यह पहली मौत बताई जा रही है।

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बुधवार रात ‘बासिज फोर्स’ के 21 वर्षीय स्वयंसेवक की मौत को लेकर आशंका जताई जा रही है कि इससे प्रदर्शनों के खिलाफ ईरान की सरकार की कार्रवाई और सख्त हो सकती है। राजधानी तेहरान में प्रदर्शन भले ही धीमे पड़े हों, लेकिन अन्य प्रांतों में फैल रहे हैं। सरकारी समाचार एजेंसी ‘इरना’ ने ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ के सदस्य की मौत की पुष्टि की है। हालांकि विस्तृत जानकारी नहीं दी। बासिज के करीबी माने जाने वाले ‘स्टूडेंट न्यूज नेटवर्क’ ने लोरेस्तान प्रांत के डिप्टी गर्वनर सईद पौराली के हवाले से कहा कि प्रदर्शकारी इस मौत के जिम्मेदार हैं।

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क्यों हो रहे प्रदर्शन?

पौराली के अनुसार, “इस शहर में लोक-व्यवस्था की रक्षा के दौरान गार्ड का सदस्य शहीद हो गया।” उन्होंने बताया कि बासिज के 13 अन्य सदस्य और पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि ये प्रदर्शन आर्थिक संकट, महंगाई के कारण हो रहे हैं और आजीविका संबंधी चिंताओं की अभिव्यक्ति हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि नागरिकों की चिंताओं का निवारण समझदारी से किया जाना चाहिए। ये प्रदर्शन तेहरान से करीब 400 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित कौहदाश्त शहर में हुए।

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बता दें कि ईरान की मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच चुका है। इसके अलावा वहां महंगाई 42 फीसदी पर आसमान छू रही है। तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था सालों से संघर्ष कर रही है। क्षेत्रीय तनाव के कारण जून में इज़राइल के साथ 12 दिन तक हवाई युद्ध हुआ, जिससे देश की वित्तीय स्थिति और खराब हो गई है।

प्रदर्शनकारियों से संवाद की कोशिश

इस बीच, देश के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के नेतृत्व वाली सरकार प्रदर्शनकारियों से संवाद की कोशिश कर रही है। प्रदर्शनकारियों के विरोध का गुरुवार को चौथा दिन है, जो 2025 से 2026 में प्रवेश कर चुका है। प्रदर्शनकारी ईरान में खामेनेई के शासन में बदलाव की मांग कर रहे हैं। ये लोग इस्फ़हान, हमादान, बाबोल, देहलोरन, बाघमलेक और पियान जैसे शहरों में सड़कों पर उतर चुके हैं। इन शहरों में भी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगाए जा रहे हैं। कई ईरानी यूनिवर्सिटी में व्यापारी, दुकानदार और छात्र कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं और बड़े बाज़ारों को बंद करा रखा है। इस बीच, सरकार ने बुधवार को ठंड के मौसम के कारण छुट्टी घोषित करके देश के ज़्यादातर हिस्सों को बंद करवा दिया है।

Iran Protest in 21 states

मौलाना भी दे रहे प्रदर्शनकारियों का साथ

प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए सुरक्षा बलों ने कई शहरों में बल प्रयोग किया है। सुरक्षा बलों द्वारा नाहवंद, असदाबाद और हमादान जैसे शहरों में गोलीबारी और आंसू गैस छोड़े जाने की खबरें आईं हैं। बावजूद इसके प्रदर्शनकारी वहां डटे रहे। दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों ने निर्वासित राजकुमार रज़ा पहलवी का समर्थन किया और पिछले विद्रोहों में मारे गए प्रदर्शनकारियों को याद किया। इस, बीच मौलानाओं का समर्थन भी प्रदर्शनकारियों को मिलना शुरू हो गया है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें

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