मेड इन चाइना टैंक बना बांग्लादेश के लिए मौत का ताबूत, अचानक ब्लास्ट से अंदर बैठे सैनिकों की मौत
बांग्लादेश केचटोग्राम के हथजारी में बुधवार को लाइव फायरिंग अभ्यास के दौरान एक टैंक में विस्फोट हो गया। इस दुर्घटना में बांग्लादेश सेना के दो जवानों की मौत हो गई, जबकि एक अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए।
बांग्लादेश से एक बड़ी खबर सामने आई है। चटोग्राम जिले के हथजारी फील्ड फायरिंग रेंज में बुधवार को लाइव फायरिंग अभ्यास के दौरान बांग्लादेश सेना के एक टैंक में अचानक विस्फोट हो गया। इस दुर्घटना में सेना के दो जवानों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए। अंतर-सेवा जनसंपर्क विभाग ( ISPR ) के अनुसार, घटना उस समय हुई जब अभ्यास के दौरान टैंक से गोलाबारी की जा रही थी। आईएसपीआर ने इसे 'आकस्मिक दुर्घटना' बताया है। आधिकारिक बयान में कहा गया कि दो सैनिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि घायल अधिकारी को हेलीकॉप्टर से ढाका ले जाया गया है।
वहीं, सेना ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। आधिकारिक तौर पर शामिल टैंक को लेकर कोई खुलासा नहीं किया गया है। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह चीन निर्मित टाइप-59 मुख्य युद्धक टैंक है। यह टैंक सोवियत टी-54 का चीनी संस्करण है और दशकों से बांग्लादेश की बख्तरबंद सेना का हिस्सा रहा है।
बता दें कि टाइप-59 सोवियत संघ के टी-54 टैंक का चीन में निर्मित संस्करण है। चीन ने इसे 1950 के दशक के अंत से 1980 के दशक तक बड़ी संख्या में बनाया था। यह पुरानी पीढ़ी का मुख्य युद्धक टैंक बांग्लादेश की बख्तरबंद सेना का लंबे समय से हिस्सा रहा है। बांग्लादेश सेना के बेड़े में चीनी मूल के टाइप-59, टाइप-69 वेरिएंट, एमबीटी-2000 और वीटी-5 जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
बांग्लादेश ने अपने पुराने चीनी बख्तरबंद बेड़े को पूरी तरह सेवामुक्त करने के बजाय उसका रखरखाव, मरम्मत और अपग्रेडेशन जारी रखा है। कई टाइप-59 टैंकों को देश में ही अपग्रेड किया गया है। इस प्रक्रिया में मूल को बनाए रखते हुए इंजन, अस्त्र प्रणाली, सुरक्षा और युद्ध क्षमता में सुधार किया जाता है, क्योंकि नया टैंक खरीदने की तुलना में अपग्रेड करना सस्ता पड़ता है।
रक्षा खरीद महानिदेशालय इससे पहले 40 टी-59 टैंकों के अपग्रेड और 58 टी-69आईआईजी टैंकों के आधुनिकीकरण से जुड़े दस्तावेज जारी कर चुका है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य पुराने प्लेटफॉर्म की सेवा अवधि बढ़ाना और उनकी प्रणालियों को बेहतर बनाना है।
बताया जा रहा है कि हथजारी की घटना उसी पृष्ठभूमि में हुई है, जब सेना अपने पुराने बेड़े को बनाए रखने और आधुनिक बनाने के प्रयासों में लगी हुई है।


