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मछली पकड़ने वाली नौका; चीन की 'ग्रे जोन' रणनीति से टेंशन में ताइवान, ड्रैगन चाहता क्या है?

मछली पकड़ने वाली नौका; चीन की 'ग्रे जोन' रणनीति से टेंशन में ताइवान, ड्रैगन चाहता क्या है?

संक्षेप:

सीएसआईएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि बीजिंग निगरानी और धमकी देने के मकसद से बिना चिह्नित, दोहरे उपयोग वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों को तैनात कर रहा है। इनका लक्ष्य खुले युद्ध को उकसाए बिना सैन्य कार्रवाइयों को मजबूत और आसान बनाना है।

Sun, 26 Oct 2025 04:53 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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चीन और ताइवान के बीच तनावपूर्ण संबंध किसी से छिपे नहीं हैं। लगातार चीनी लड़ाकू विमान ताइवान के हवाई क्षेत्र में अतिक्रमण करते रहते हैं। इसी कड़ी में एक नई रिपोर्ट ने ताइवान की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। ताइपे टाइम्स की खबर के मुताबिक, अमेरिका स्थित एक प्रमुख थिंक टैंक की ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि चीनी समुद्री मिलिशिया ताइवान जलडमरूमध्य में 'ग्रे जोन' रणनीतियों को लागू करने के लिए सैकड़ों नागरिक मछली पकड़ने वाली नौकाओं का सहारा ले रही है।

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रणनीतिक एवं अंतरराष्ट्रीय अध्ययन केंद्र (सीएसआईएस) की रिपोर्ट में कहा गया है कि बीजिंग निगरानी और धमकी देने के मकसद से बिना चिह्नित, दोहरे उपयोग वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों को तैनात कर रहा है। इनका लक्ष्य खुले युद्ध को उकसाए बिना सैन्य कार्रवाइयों को मजबूत और आसान बनाना है। सीएसआईएस ने 8 अक्टूबर को खुलासा किया कि उसके विशेषज्ञ 315 चीनी झंडे वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों के जीपीएस और स्वचालित पहचान प्रणाली (एआईएस) सिग्नलों की निगरानी कर रहे हैं, ताकि चीन की समुद्री मिलिशिया द्वारा संचालित नौकाओं को सामान्य नागरिक जहाजों से अलग किया जा सके।

सीएसआईएस की रिसर्च टीम ने वैश्विक मछली पकड़ने की गतिविधियों के स्थानों का नक्शा तैयार कर प्रच्छन्न चीनी सैन्य नौकाओं की पहचान की। यह विश्लेषण चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के 'संयुक्त तलवार-2024ए' और '2024बी' अभ्यासों के दौरान एकत्रित डेटा पर आधारित है। शोधकर्ताओं ने 128 से 209 चीनी नौकाओं को संदिग्ध माना, क्योंकि इनमें से कई ने अपने नौवहन समय का 30% से अधिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में या मात्र 10% से कम मछली पकड़ने वाले समुद्री इलाकों में गुजारा।

रिपोर्ट के अनुसार, इन 209 नौकाओं में एआईएस सिस्टम में अनियमितताएं भी मिलीं, जैसे 'डार्क मोड' में चले जाना, पहचानकर्ता बदलना, या सैन्य अभ्यास क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी छिपाने के लिए एआईएस गतिविधियों में हेरफेर करना। कुछ जहाजों ने एआईएस ब्लैकआउट या कमजोर सिग्नल के दौरान अंतरराष्ट्रीय जहाज रजिस्ट्री में अपना नाम बदल लिया। एक जहाज ने तो कथित रूप से एक साल में 11 अलग-अलग मोबाइल समुद्री सेवा पहचान सीरियल नंबरों का इस्तेमाल किया और इन्हें 1300 बार से अधिक बदला।

थिंक टैंक ने सिफारिश की है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की खुफिया एजेंसियों को इन संदिग्ध जहाजों से जुड़े कॉर्पोरेट नेटवर्क की जांच करनी चाहिए, ताकि चीन द्वारा छद्म सैन्य नौकाओं के संचालन के लिए इस्तेमाल होने वाली नकली कंपनियों का पर्दाफाश हो सके। सीएसआईएस ने आगे जोर दिया कि मालिकों, बीमा कंपनियों और ऑपरेटरों पर प्रतिबंध लगाकर, तथा बार-बार अपराध करने वालों की एक अपडेटेड 'काली सूची' जारी कर दंडित करने से इन कार्रवाइयों की लागत बढ़ेगी और इनकार करने की गुंजाइश कम हो जाएगी।

उधर, ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने पिछले सप्ताह सांसदों को बताया कि जनवरी से पिछले महीने तक पीएलए ने ताइवान जलडमरूमध्य की मध्य रेखा पार कर 3003 उड़ानें कीं और देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र में 2000 जहाज भेजे। रिपोर्ट में बताया है कि चीन आमतौर पर ताइवान के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में प्रति माह औसतन तीन से चार बार विमानवाहक और जहाज तैनात करता है। इसके अलावा, ताइवान अपनी वायुसेना और नौसेना की टोही क्षमताओं को मजबूत करने के लिए उच्च-रिजॉल्यूशन वाले ऑप्टिकल, इन्फ्रारेड उपकरणों और रडार से युक्त लंबी दूरी के ड्रोन विकसित कर रहा है।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap
देवेन्द्र कश्यप, लाइव हिंदुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर। पटना से पत्रकारिता की शुरुआत। महुआ न्यूज, जी न्यूज, ईनाडु इंडिया, राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे बड़े संस्थानों में काम किया। करीब 11 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत। MCU भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई। पटना व‍िश्‍वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में नेशनल, इंटरनेशनल डेस्क पर सेवा दे रहे हैं। और पढ़ें

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