चीन मछलियों से कराएगा समुद्र में जासूसी! बना डाली ऐसी रोबोट फिश; दुश्मन भी खा जाए गच्चा

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आम अंडरवाटर ड्रोन की तरह इसमें कोई पंखा या प्रोपेलर नहीं लगा है, बल्कि यह मछली की तरह अपनी लचीली पूंछ को मटकाते हुए पानी को पीछे धकेलता है और आगे बढ़ता है।

पहली नजर में देखने पर लगेगा कि पानी में कोई खूबसूरत सुनहरी मछली तैर रही है। लेकिन थोड़ा करीब से देखें, तो पता चलेगा कि यह प्रकृति का कोई करिश्मा नहीं बल्कि चीन का नया रोबोटिक अजूबा है। बीजिंग के शौगांग पार्क में आयोजित 'चाइना इंटरनेशनल फेयर फॉर ट्रेड इन सर्विसेज 2026' (CIFTIS) में चीन ने अपनी नई बायोमिमेटिक अंडरवाटर टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन करते हुए 'BG-5 गोल्डन ड्रैगन फिश' नाम का एक रोबोट लॉन्च किया है।

बोयागोंगदाओ मरीन टेक्नोलॉजी ग्रुप की तरफ से डेवलप यह रोबोट मशहूर 'गोल्डन अरोवाना' मछली की हूबहू नकल करता है। आम अंडरवाटर ड्रोन की तरह इसमें कोई पंखा या प्रोपेलर नहीं लगा है, बल्कि यह मछली की तरह अपनी लचीली पूंछ को मटकाते हुए पानी को पीछे धकेलता है और आगे बढ़ता है।

बिना किसी प्री-सेट रूट के खुद बनाएगा अपना रास्ता

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह रोबोट केवल पहले से फीड किए गए रूट पर चलने के लिए मजबूर नहीं है। इसके भीतर लगे एडवांस सेंसर्स आसपास आने वाली बाधाओं और पत्थरों को खुद पहचान लेते हैं।

अगर रास्ते में कोई रुकावट आती है, तो यह ऑटोमैटिक अपना रास्ता बदल लेता है। गहरे पानी में, जहां इंसानी ऑपरेटरों का सिग्नल काम नहीं करता, वहां इसका यह फीचर बेहद काम आने वाला है।

इसकी पूंछ को 3 जॉइंट्स और 7 अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है, जो पानी में तरंगें पैदा कर इसे 0.6 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से 5 मीटर की गहराई तक तैरने में मदद करती हैं।

झुंड में काम करेगी रोबोटिक मछलियों की 'सेना'

कंपनी ने इसके एक और एडवांस वर्जन BG-5V का भी खुलासा किया है। यह मॉडल एक कदम आगे की सोचता है। इसमें 'मल्टी-रोबोट कोऑपरेशन' तकनीक दी गई है।

इसका मतलब यह हुआ कि ऐसी कई रोबोटिक मछलियां पानी के भीतर एक साथ मिलकर काम कर सकती हैं। वे आपस में काम बांट सकती हैं, एक-दूसरे को सिग्नल भेज सकती हैं और पूरे इलाके का एक साथ सर्वे कर सकती हैं।

क्या नेवी और जासूसी के काम आएगा यह फिश रोबोट?

केवल इंसानी कौतुक के लिए रोबोट को मछली का रूप नहीं दिया गया है। मछली का आकार होने से यह गहरे पानी और संकरी चट्टानों के बीच आसानी से छिपकर निकल सकता है।

सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात यह है कि इसे बनाने वाली कंपनी बोयागोंगदाओ के संबंध चीन के नेशनल डिफेंस प्रोजेक्ट से रहे हैं। कंपनी इससे पहले चीनी सेना की एक यूनिट के साथ मिलकर 'ROBO-SHARK' नाम का हमलावर अंडरवाटर रोबोट भी बना चुकी है।

हालांकि, कंपनी ने अभी इसे किसी सैन्य मिशन में तैनात करने की पुष्टि नहीं की है। लेकिन जानकारों का मानना है कि छोटे आकार, रडार की नजर से बचने वाले डिजाइन और झुंड में काम करने की क्षमता के कारण ऐसी 'रोबोटिक मछलियों' का इस्तेमाल भविष्य में नौसेना की जासूसी, तटीय सुरक्षा और दुश्मन के इलाकों की टोह लेने के लिए किया जाना लगभग तय है।

Shubham Sharma

लेखक के बारे में

Shubham Sharma
शुभम शर्मा साल 2017 से पत्रकारिता और मीडिया जगत में काम कर रहे हैं। टीवी में इनपुट असाइनमेंट से शुरुआत करते हुए डिजिटल मीडिया की दुनिया में कदम रखा। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक का अनुभव। TV9 भारतवर्ष और मनीकंट्रोल हिंदी (Network 18) जैसे बड़े संस्थानों के बाद अब लाइव हिंदुस्तान में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर खबरों को आप तक पहुंचाने के काम कर रहे हैं। और पढ़ें

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