सावधान! नौकरी के धोखे से जासूस भर्ती कर रहा चीन, भारत के लिए खतरे की घंटी?

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चीन अपना जासूसी नेटवर्क फैलाने के लिए नौकरी की फर्जी भर्ती के विज्ञापनों का सहारा ले रहा है। खुफिया जासूसी ग्रुप फाइव आइज ने दावा किया है कि ड्रैगन कई देशों में ऐसे जासूसों की भर्ती कर रहा है, जो उसे खुफिया  जानकारी दे सकें या फिर चीन के बारे में अच्छे आर्टिकल्स लिख सकें।

सावधान! नौकरी के धोखे से जासूस भर्ती कर रहा चीन, भारत के लिए खतरे की घंटी?

भारत का पड़ोसी देश चीन आए दिन अपनी हरकतों की वजह से दुनिया की नजरों में आता रहता है। हाल ही में आपस में खुफिया जानकारी साझा करने वाले पांच देशों (ऑस्ट्रेलिया, यूके, कनाडा, न्यूजीलैंड, अमेरिका) के समूह (फाइव आइज) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चीन नौकरी देने के बहाने कई देशों के लोगों को जासूसी करने के लिए भर्ती कर रहा है। चीनी जासूसी एजेंसी से जुड़े लोग किसी सामान्य जॉब एड की तरफ ही सोशल मीडिया साइट पर पोस्ट करते हैं और उसके बाद ऐसे व्यक्तियों को नौकरी पर रखते है, जिनसे खुफिया जानकारी हासिल की जा सकती है।

फाइव आइज की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया कि चीनी खुफिया एजेंसी के जासूस सोशल मीडिया (लिंक्डन, इंडीड, अपवर्क और अन्य) पर इस तरह की भर्ती करने के लिए काफी आक्रामक रणनीति अपना रहे हैं। ग्रुप ने कहा, "फाइव आइज और अन्य देशों की खुफिया जानकारी जुटाने के लिए चीनी एजेंसी तेजी के साथ काम कर रही है। वह ज्यादातर ऐसे लोगों को निशाना बनाती है, जो अन्य देशों के खुफिया या अन्य मिशनों में काम कर चुके होते हैं या फिर थिंक टैंक, पत्रकार या सरकारी जानकारी से किसी भी तरह का संपर्क रखते हैं। इन लोगों को फंसाने के लिए चीनी जासूसी नौकरी का विज्ञापन देते हैं और बाद में सीवी के आधार पर इनकी भर्ती करते हैं। इसके बाद बाद में पैसा या दूसरा लालच देकर या डर दिखाकर इनसे खुफिया जानकारी निकाल लेते हैं।"

कुछ हजार डॉलर में देश विरोधी आर्टिकल्स लिखवाने का दवाब

ग्रुप के मुताबिक, पत्रकारों और थिंक टैंक में काम करने वाले लोगों से कुछ हजार डॉलर में दूसरे देशों के खिलाफ या फिर चीन के समर्थन में आर्टिकल्स लिखने के लिए कहा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन लोगों को भरोसे में लेने के बाद और भी ज्यादा खुफिया जानकारी निकलवाने की कोशिश की जाती है। इसके लिए इन्हें चीनी मैसेजिंग एप का इस्तेमाल करने के लिए कहा जाता है।

सुरक्षा और अन्य विभागों से जुड़े लोग सतर्क रहे: ब्रिटिश रक्षा मंत्री

चीन द्वारा बढ़ती जासूसी की कोशिशों के बीच ब्रिटेन के कान खड़े हो गए हैं। ब्रिटिश रक्षा मंत्री डैन जार्विस ने सुरक्षा विभाग और अन्य प्रमुख विभागों में काम कर चुके लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा है। उन्होंने कहा, "ऑनलाइन निशाना बनाए जाने वाले सभी संकेतों का ख्याल रखें। ऐसे विज्ञापनों पर नजर बनाए रखें और अनजाने में देश की सुरक्षा को खतरे में न डालें।"

भारत के लिए क्यों खतरा है यह तरीका?

भारत जैसी बड़ी आबादी वाले देश में आम तौर पर लोग नौकरी ढूंढ़ने की कोशिश में लगे रहते हैं। ऐसे में लिंक्डन और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे खतरे बढ़ जाते हैं। अगर सरकारी एजेंसियां ध्यान न दें तो ऐसे कई लोग चीन के जाल में फंस जाते हैं। भारत में हर साल सैन्य सेवा पूरी कर निकलने वाले अग्निवीर जवान भी चीन के निशाने पर हो सकते हैं क्योंकि यह जवान खुफिया जगहों पर नौकरी करके आए होते हैं। इसके अलावा पत्रकार, थिंकटैंक वाले लोगों के लिए भी चीन का यह जाल खतरा हो सकता है। गौरतलब है कि कोविड काल के समय भारत सरकार ने चीनी एप्स को जासूसी के आरोप में बैन कर दिया था। इससे पहले देश में कई ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके ऊपर चीन से पैसे लेकर आर्टिकल लिखने का आरोप था। इन लोगों का केस अभी जारी है। सरकार लगातार चीन और पाकिस्तान से होने वाली जासूसी की कोशिशों पर लगाम लगाने की कोशिश लगाती रही है।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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