चीन की नई चाल, एशियाई समुद्र में बढ़ा रहा अपना दबदबा; बड़े बेड़ों की तैनाती
एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन अपनी ग्रे-जोन रणनीति के तहत अब ज्यादा से ज्यादा नागरिक मछली पकड़ने वाले बेड़ों पर निर्भर हो रहा है। ये बेड़े दोहरे इस्तेमाल वाले ऑपरेशन्स के लिए तैयार किए गए हैं

नई चाल के तह चीन एशिया के विवादित समुद्री इलाकों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। इसके लिए वह मछली पकड़ने वाली नावों, कोस्ट गार्ड जहाजों और समुद्री मिलिशिया यूनिट्स के बड़े बेड़े तैनात कर रहा है। यह एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद बिना किसी सीधी सैन्य टकराव के अपना नियंत्रण मजबूत करना है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट और ताइवान न्यूज के हवाले से यह जानकारी दी गई है। हाल ही में चीन की लगभग 200 मछली पकड़ने वाली नावें येलो सी में और अंदर तक चली गईं।
ये नावें उन समुद्री इलाकों के और करीब पहुंच गईं, जिन पर चीन और दक्षिण कोरिया दोनों अपना दावा करते हैं। जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस कंपनी Ingenispace द्वारा जुटाए गए डेटा से पता चला है कि अहम शिपिंग मार्गों और विवादित समुद्री क्षेत्रों में जहाजों की आवाजाही असामान्य रूप से बहुत ज्यादा बढ़ गई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बीजिंग अपनी 'ग्रे-जोन' रणनीति के तहत अब ज्यादा से ज्यादा नागरिक मछली पकड़ने वाले बेड़ों पर निर्भर हो रहा है। ये बेड़े दोहरे इस्तेमाल वाले ऑपरेशन्स के लिए तैयार किए गए हैं। इस रणनीति का मकसद धीरे-धीरे अपना प्रभाव बढ़ाना है, लेकिन साथ ही खुले युद्ध की स्थिति से भी बचना है।
Ingenispace के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर जेसन वांग ने कहा कि इन जहाजों की तैनाती से यह जाहिर होता है कि चीन अनियमित समुद्री ऑपरेशन्स के जरिए क्षेत्रीय समुद्री इलाकों पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि जहाजों की यह बढ़ती संख्या चीन की उस संभावित क्षमता को भी दर्शाती है, जिसके तहत वह तनाव बढ़ने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक शिपिंग मार्गों को बाधित कर सकता है। पूर्वी चीन सागर में भी चीन की समुद्री गतिविधियां तेज हो गई हैं। 3 अप्रैल को 600 से ज्यादा चीनी मछली पकड़ने वाली नावें लगभग 18 घंटों तक एक लंबी कतार बनाकर खड़ी देखी गईं।
कोस्ट गार्ड की गश्त भी बढ़ी
इसके साथ ही, बीजिंग ने विवादित डियाओयुताई द्वीपों के आसपास कोस्ट गार्ड की गश्त भी बढ़ा दी। साउथ चाइना सी में, चीन ने पिछले एक साल में स्कारबोरो शोल के पास अपने कोस्ट गार्ड ऑपरेशन्स को कथित तौर पर दोगुना कर दिया है और इस इलाके को 'नेशनल नेचर रिजर्व' घोषित करने के बाद ज्यादा सख्त प्रशासनिक उपाय लागू किए हैं। वियतनाम के पास पैरासेल आइलैंड्स में नई कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी देखी गई है।
क्या कह रहे एक्सपर्ट्स?
सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के 'सीलाइट प्रोजेक्ट' के रिसर्चर्स ने बताया कि चीन ने पिछले साल समुद्री मिलिशिया और कोस्ट गार्ड जहाजों की सुरक्षा में 'एंटेलोप रीफ' का विस्तार करना शुरू कर दिया था। एक्सपर्ट्स ने कहा कि चीन का लंबे समय का मकसद विवादित पानी में अपने दबदबे को धीरे-धीरे सामान्य बनाना है, और साथ ही सीधे टकराव से बचना है। CSIS में जियोपॉलिटिक्स और विदेश नीति विभाग के प्रेसिडेंट विक्टर चा ने कहा कि चीन की कार्रवाइयां बहुत सोच-समझकर की गई हैं, ताकि बिना युद्ध छेड़े क्षेत्रीय नियंत्रण को मजबूत किया जा सके।
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