पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, इस बीच ड्रैगन ने भारत के साथ रिश्तों पर कह दी बड़ी बात
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच चीन ने भारत के साथ रिश्तों को बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के मजबूत करने की बात कही है। चीनी विदेश मंत्री ने कहा कि आने वाले दो वर्षों में ब्रिक्स की अध्यक्षता में दोनों देशों को एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए।

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल में जारी जंग के बीच चीन ने भारत के साथ अपने रिश्तों पर बड़ी बात कही है। रविवार को चीनी विदेश मंत्री वांय यी ने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे का प्रतिद्वंदी नहीं बल्कि साझेदार के रूप में देखना चाहिए और खतरे की जगह अवसर के रूप में देखना चाहिए। आने वाले समय में ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता को लेकर कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से जयपुर में 5-6 मार्च को होने वाली ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक के गवर्नरों की बैठक स्थगित कर दी गई है। आगे अब यह बैठक कब होगी, इस पर कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
चीनी विदेश मंत्री ने नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के दौरान आयोजित अपनी वार्षिक बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा तय दिशा में आगे बढ़कर संबंधों को बेहतर बना सकते हैं। दोनों देशों के नेताओं की पिछली बैठकों का जिक्र करते हुए यी ने कहा कि 2024 में कजान में हुई बैठक से दोनों देशों के रिश्तों में सुधार हुआ था, उसी आधार पर तिआनजिन शिखर सम्मेलन में रिश्ते और भी बेहतर हुए।
सभी स्तरों पर बढ़े संबंध
वांग यी ने कहा कि इन बैठकों के दौरान दोनों देश जिन विषयों पर सहमत हुए थे, उस पर दोनों देशों की तरफ से उत्सुकता से साथ काम किया जा रहा है। सभी स्तरों पर दोनों देशों के बीच बातचीत और संपर्क फिर से तेज हुए हैं द्विपक्षीय व्यापार ने नया रिकॉर्ड बनाया है। लोगों के बीच संपर्क भी बढ़ा है।
एशिया और ग्लोबल साउथ के लिए जरूरी दोनों देशों का साथ: वांग यी
वांग यी ने कहा कि विश्वास और सहयोग दोनों देशों के विकास के लिए लाभकारी हैं, जबकि विभाजन और टकराव एशिया के पुनरुत्थान के लिए हानिकारक हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे के महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं और ग्लोबल साउथ के सदस्य हैं। ऐसे में एशिया के उत्थान और ग्लोबल साउथ के विकास के लिए दोनों को एक-साथ आना चाहिए। भारत और चीन को अगले दो वर्षों में ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए, ताकि ब्रिक्स सहयोग को मजबूत बनाया जा सके और ग्लोबल साउथ को नई उम्मीद मिले।
गौरतलब है कि चीन की तरफ से यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब ब्रिक्स के बाहरी कोर के सदस्य ईरान के ऊपर अमेरिका और इजरायल ने हमला बोला हुआ है। चीन, ईरान का एक बड़ा सहयोगी देश है, लेकिन इस युद्ध में उसने ईरान की ज्यादा कोई मदद नहीं की है। गलवान घाटी की झड़प के बाद भारत और चीन के बीच संबंध खराब हो गए थे। हालांकि, बाद में रूस में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग की मुलाकात हुई थी, तब जाकर दोनों देशों के बीच सीमा विवाद कुछ हद तक सुलझ गया था। इसी बीच अमेरिका और भारत के बीच संबंधों में भी थोड़ी गिरावट देखने को मिली थी, जिसके बाद पीएम मोदी ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन गए थे, जहां से दोनों देशों के संबंधों में और भी ज्यादा सुधार हुआ था।
लेखक के बारे में
Upendra Thapakलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


