चीन का कारनामा; बनाया 20 मंजिला एयर प्यूरीफायर टावर, कितनी साफ कर पाता है हवा
यह टॉवर पारंपरिक एयर प्यूरीफायर की तरह बिजली पर पूरी तरह निर्भर नहीं है। इसके आधार के आसपास बड़े-बड़े कांच के ग्रीनहाउस बनाए गए हैं। प्रदूषित हवा इन संरचनाओं में प्रवेश करती है, जहां सूर्य की गर्मी से वह गर्म होकर ऊपर उठती है।

चीन ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दुनिया का सबसे बड़ा एयर प्यूरीफायर टॉवर बनाया है। यह विशालकाय टॉवर उत्तरी चीन के शान्शी प्रांत के शिआन शहर में स्थित है और इसकी ऊंचाई 100 मीटर से अधिक है, यानी लगभग 20 मंजिला इमारत के बराबर। इस प्रोजेक्ट को चीनी विज्ञान अकादमी के इंस्टीट्यूट ऑफ अर्थ एनवायरनमेंट ने तैयार किया है। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह टॉवर प्रतिदिन 1 करोड़ घन मीटर (10 मिलियन क्यूबिक मीटर) तक स्वच्छ हवा तैयार करने में सक्षम है, जिससे आसपास के बड़े इलाके की वायु गुणवत्ता में सुधार देखा गया है।
यह टॉवर पारंपरिक एयर प्यूरीफायर की तरह बिजली पर पूरी तरह निर्भर नहीं है। इसके आधार के आसपास बड़े-बड़े कांच के ग्रीनहाउस बनाए गए हैं। प्रदूषित हवा इन संरचनाओं में प्रवेश करती है, जहां सूर्य की गर्मी से वह गर्म होकर ऊपर उठती है। इसके बाद हवा टॉवर के भीतर लगे कई फिल्टरों से गुजरती है, जो धूल, धुएं और अन्य हानिकारक कणों को हटाते हैं। इस सौर ऊर्जा आधारित प्रणाली के कारण दिन के समय इसे बहुत कम अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है।
खतरनाक कणों की मात्रा कितनी हुई कम
शोध के दौरान टॉवर के आसपास 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए गए थे। इनसे प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, भारी प्रदूषण वाले दिनों में पीएम 2.5 (PM2.5) जैसे बेहद सूक्ष्म और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक कणों की मात्रा औसतन 15 प्रतिशत तक कम हुई। वैज्ञानिकों का कहना है कि कई अवसरों पर गंभीर स्तर के स्मॉग को मध्यम स्तर तक लाने में भी यह प्रणाली सफल रही। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नतीजे अभी प्रारंभिक हैं और लंबे समय तक अध्ययन के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाले जा सकेंगे।
इस प्रोजेक्ट को चीन के लंबे समय से चले आ रहे स्मॉग संकट के समाधान की दिशा में अहम प्रयोग माना जा रहा है। वैज्ञानिक भविष्य में इससे कहीं बड़े वैरिएंट का निर्माण करना चाहते हैं। प्रस्तावित मॉडल लगभग 500 मीटर ऊंचा और 200 मीटर व्यास वाला हो सकता है, जिसके साथ विशाल ग्रीनहाउस क्षेत्र जुड़े होंगे। उनका मानना है कि ऐसी प्रणाली भविष्य में किसी छोटे शहर की हवा को भी साफ करने की क्षमता रख सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वायु प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान केवल उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने से ही संभव होगा।
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