'ये क्या दादागिरी है?' भाषण के बीच चीन ने थमाई पर्ची, फिलीपींस के रक्षा मंत्री ने मंच से पढ़कर कर दिया बेनकाब!
मंच पर ही चीनी दूतावास के अधिकारियों की इस अजीब हरकत से भड़के फिलिपींस के रक्षा मंत्री ने खुले मंच से चीन के इरादों पर सवाल उठाए और उस पर 'धौंस जमाने, गुंडागर्दी करने और आक्रामकता दिखाने' का सीधा आरोप जड़ा।

दक्षिण कोरिया में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय डिफेंस समिट के दौरान उस समय बड़ी नाटकीय स्थिति पैदा हो गई, जब फिलिपींस के रक्षा मंत्री गिलबर्टो सी. तेओदोरो को भाषण देते समय अचानक चीन का एक नोट थमा दिया गया। इस नोट में दक्षिण चीन सागर पर बीजिंग के रुख और दावों का ब्योरा दिया गया था।
मंच पर ही चीनी दूतावास के अधिकारियों की इस अजीब हरकत से भड़के फिलिपींस के रक्षा मंत्री ने खुले मंच से चीन के इरादों पर सवाल उठाए और उस पर 'धौंस जमाने, गुंडागर्दी करने और आक्रामकता दिखाने' का सीधा आरोप जड़ा।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल इंटरनेशनल डिफेंस फोरम पर जब तेओदोरो अपने संबोधन में क्षेत्रीय सुरक्षा और संप्रभुता पर बोल रहे थे, तभी चीन के प्रतिनिधिमंडल की ओर से उनके पास एक नोट पहुंचाया गया। इस नोट में दक्षिण चीन सागर पर चीन का क्या रुख है इसके बारे में लिखा था।
तेओदोरो ने तुरंत सबके सामने उस नोट के बारे में बताते हुए कहा कि एक खुले और लोकतांत्रिक मंच पर इस तरह दबाव बनाने की कोशिश चीन के घटिया रवैये को दर्शाती है।
फिलिपींस के रक्षा मंत्री ने कहा कि चीन पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना अवैध और एकतरफा मालिकाना हक जमाना चाहता है, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों और यूएन के समुद्री कानून (UNCLOS) का खुला उल्लंघन है।
दक्षिण चीन सागर में क्यों बढ़ा है तनाव?
पिछले कुछ महीनों में फिलिपींस और चीन के कोस्ट गार्ड जहाजों के बीच दक्षिण चीन सागर के विवादित 'सेकंड थॉमस शोल' और 'स्कारबोरो शोल' के पास कई बार खतरनाक टकराव हुआ है।
चीनी जहाजों की तरफ से फिलिपींस की री-सप्लाई बोट पर वाटर कैनन चलाने, लेजर लाइट से अंधा करने और टक्कर मारने की कई घटनाएं सामने आई हैं।
फिलिपींस ने चीन की इन उकसावे वाली कार्रवाइयों का डटकर मुकाबला किया है और उसे अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे देशों का मजबूत रणनीतिक समर्थन हासिल है।
फिलिपींस ने चीन को क्या चेतावनी दी?
तेओदोरो ने जोर देकर कहा कि फिलिपींस अपनी समुद्री सीमाओं और मछुआरों के अधिकारों की रक्षा से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने वैश्विक समुदाय से आह्वान किया कि वह दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते सैन्यीकरण और दादागिरी के खिलाफ एक साथ खड़ा हो, क्योंकि यह पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की व्यापारिक और रणनीतिक स्थिरता के लिए बड़ा खतरा है।


