अब समुद्र के पानी से घातक हथियार बनाएगा चीन, अमेरिका को छोड़ दिया पीछे

लाइव हिन्दुस्तान, बीजिंग
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चीन ने एक नई तकनीक इजाद की है, जिससे वह समुद्र के पानी से परमाणु हथियार बनाने के लिए यूरेनियम हासिल कर सकता है। चीनी शोधकर्ताओं ने इस बारे में बड़ी सफलता हासिल की है।

China Sea
चीन की यह खोज काफी मायने रखती है।

चीन ने एक नई तकनीक इजाद की है, जिससे वह समुद्र के पानी से परमाणु हथियार बनाने के लिए यूरेनियम हासिल कर सकता है। चीनी शोधकर्ताओं ने इस बारे में बड़ी सफलता हासिल की है। चीन द्वारा विकसित किए गए इस नए मटीरियल से वह समुद्र से यूरेनियम निकाल पाने में सक्षम होगा। खास बात यह है कि इस मामले में चीन ने अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है। अमेरिका, समुद्र के एक ग्राम पानी से मात्र 6 मिलीग्राम यह पदार्थ निकाल पाता था। वहीं, चीन ने एक मिलीग्राम समुद्री पानी से 50.4मिलीग्राम पदार्थ निकालने में कामयाबी हासिल की है। इस तरह से अब समुद्र का पानी, परमाणु ईंधन के लिए अहम स्रोत बन गया है।

क्या है यह मटीरियल

चीन समुद्री पानी से जो मटीरियल निकालने में सफल हुआ है, उसका नाम है फॉसकेज। यह एक स्पंज जैसा मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर है, जिसमें फॉस्फेट होता है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह रासायनिक जाल की तरह काम करते हैं। शोधकर्ताओं ने इस प्रयोग के दौरान फॉसकेज को मिलीमीटर-साइज के बीड्स (छोटी गोलियों) में बदल दिया। इन्हें खुले समुद्र में इस्तेमाल करना और वापस निकालना आसान है। इन बीड्स ने प्रति ग्राम 22.55मिलीग्राम यूरेनियम सोखा और सात बार दोबारा इस्तेमाल किए जाने पर भी काम करते रहे।

क्या हैं इसके मायने

चीन के लिए यह तकनीक बहुत ज्यादा मायने रखती है। इससे चीन के घरेलू यूरेनियम प्रोडक्शन में तेजी से इजाफा होगा। चीन ने साल 2024 में घरेलू खदानों से 1600 टन यूरेनियम का उत्पादन किया। हालांकि वर्ल्ड न्यूक्लियर एसोसिएशन के मुताबिक चीन को इससे कहीं ज्यादा 13,000 टन यूरेनियम की जरूरत है। इस भारी गैप को पूरा करने के लिए चीन आयात पर निर्भर था। ऐसे में समुद्र के पानी से यूरेनियम की पूर्ति होने से चीन का काम काफी आसान हो जाएगा।

समुद्र के पानी में कैसे पहुंचा यूरेनियम

गौरतलब है कि पूरी दुनिया में धरती पर 7.9 मिलियन टन यूरेनियम के ज्ञात स्रोत हैं। वहीं, समुद्र में यह आंकड़ा 4.5 बिलियन टन का हो सकता है। यह यूरेनियम समुद्र के पानी में बारिश के वक्त चट्टानों से धुलकर नदियों के रास्ते पहुंचा है। यह यूरेनियम है तो बहुत बड़ी मात्रा में, लेकिन इसे समुद्र के पानी निकालना बहुत बड़ी चुनौती है। एक टन समुद्री पानी में मात्र 3.3 मिलीग्राम यूरेनियम होता है। यानी, समुद्र के पानी से यूरेनियम प्रॉसेस करने के लिए बहुत ज्यादा मात्रा में इसके पानी की जरूरत होगी।

क्या हैं चुनौतियां

ऐसा नहीं है कि समुद्र के पानी में केवल यूरेनियम ही है। इसमें और भी बहुत सारी चीजें घुली हुई हैं। ऐसे में यूरेनियम को समुद के पानी से अलग करना बहुत बड़ी चुनौती है। अमेरिका में शोधकर्ताओं इस चुनौती से पार पाने के लिए कई साल मेहनत की। ओक रिज नेशनल लैबोरेट्री ने स्पेशलाइज्ड फाइबर्स डिजाइन किए। इसकी मदद से यूरेनियम कैप्चर किया जाता था। वहीं, पैसेफिक नॉर्थवेस्ट नेशनल लेबोरेट्री ने प्राकृतिक रूप से बहते समुद्री पानी के ऊप्र इस टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया। हालांकि इतनी कवायदों के बावजूद यह लोग एक ग्राम समुद्री पानी से मात्र 6 मिलीग्राम यूरेनियम ही निकाल पाते थे।

Deepak Mishra

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Deepak Mishra

मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

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