स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तख्तापलट कर सकता है चीन! ईरान संग मिलकर बड़े गेम की तैयारी?

Apr 06, 2026 03:11 pm ISTJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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चीन पहले ही अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए ईरान से सस्ता तेल खरीद रहा है। ईरान उसका एक अहम सप्लायर बना हुआ है। 2021 में दोनों देशों के बीच 25 साल की रणनीतिक साझेदारी भी हुई है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तख्तापलट कर सकता है चीन! ईरान संग मिलकर बड़े गेम की तैयारी?

पूरी दुनिया में ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग की वजह से मचे हाहाकार के बीच चीन बड़ा गेम खेल रहा है। विश्लेषक इस बात की चेतवानी दे रहे हैं कि हालात ऐसे ही रहें तो चीन दुनिया के सबसे अहम जलमार्गों में एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कब्जा कर सकता है। इसके लिए चीन ने तगड़ी प्लानिंग भी शुरू कर दी है। बता दें कि बीते 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद यह जलमार्ग प्रभावी रूप से बंद हो गया है। इसके चलते दुनियाभर में तेल की कीमतों में भारी उछाल आया और साथ ही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर आपूर्ति में भारी रुकावटें पैदा हुई हैं। यह इसीलिए अहम है क्योंकि इस जलमार्ग से दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है और यह कुल प्रवाह के पांचवें हिस्से को नियंत्रित करता है।

चीन इसी जलमार्ग पर नजरें गड़ाए हुए हैं। मार्सेलस इन्वेस्टमेंट्स के फाउंडर सौरभ मुखर्जी ने मौजूदा समीकरणों को देखते हुए कहा है कि चीन वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ी रणनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए ईरान के साथ मिलकर होर्मुज पर नियंत्रण बनाने की कोशिश कर सकता है। उन्होंने एनडीटीवी के साथ कहा बातचीत में कहा कि अगर ऐसा होता है, तो दुनिया के बड़े हिस्से की तेल सप्लाई पर चीन का प्रभाव बढ़ जाएगा। उन्होंने एक बयान में कहा, “मेरा आकलन है कि चीन अब इस दिशा में आगे बढ़ेगा। चीन ईरान के साथ गठबंधन करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि चीन और ईरान मिलकर होर्मुज पर नियंत्रण रखें, और इस तरह दुनिया के एक बड़े हिस्से की तेल आपूर्ति पर भी उनका ही नियंत्रण हो। यह चीन के लिए एक तखतापलट की तरह होगा।"

ईरान संग बढ़ी नजदीकी

वहीं कार्नेगी के अब्दुल्ला बाबूद का कहना है कि चीन की खाड़ी देशों के तेल पर निर्भरता अब एक बड़ी रणनीतिक सोच में बदल चुकी है। दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक होने के कारण चीन के लिए होर्मुज के रास्ते तेल सप्लाई जारी रहना बेहद जरूरी है। बता दें कि चीन पहले ही अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए ईरान से सस्ता तेल खरीद रहा है, जिससे ईरान उसका अहम सप्लायर बन गया है। 2021 में दोनों देशों के बीच 25 साल की रणनीतिक साझेदारी भी हुई, जिससे यह रिश्ता और मजबूत हुआ। इसमें सस्ते तेल के साथ बड़े स्तर पर चीनी निवेश शामिल है और इससे सैन्य सहयोग की संभावना भी बढ़ी है।

अमेरिका OUT, चीन IN?

ईरान के अलावा चीन ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों जैसे यूएई, ओमान, ईरान और पाकिस्तान में बंदरगाहों में भारी निवेश किया है। इसके साथ ही पाइपलाइन और रेल नेटवर्क भी विकसित किए हैं, जिससे व्यापार को बढ़ावा मिला है और होर्मुज पर निर्भरता कम करने की कोशिश की गई है। अब चीन का प्रभाव इंफ्रास्ट्रक्चर, टेलीकॉम, ऊर्जा और रक्षा से जुड़े क्षेत्रों तक फैल चुका है। हालांकि बाबूद का कहना है कि अभी चीन के पास इतनी सैन्य ताकत नहीं है कि वह अमेरिका की जगह सुरक्षा गारंटर बन सके, लेकिन अमेरिका की घटती सक्रियता और खाड़ी देशों का संतुलन बनाने का रुख चीन के लिए मौके बना रहा है।

लंबी चलेगी लड़ाई

सौरभ मुखर्जी ने कहा कि यह कोई छोटा या तुरंत खत्म होने वाला विवाद नहीं है। उनके मुताबिक, “यह तेल और होर्मुज को लेकर शक्ति की लड़ाई है और यह जल्दी खत्म नहीं होगी। यह कई महीनों तक चल सकती है।” वहीं भारत पर इसके असर को लेकर उन्होंने कहा कि हालात पहले से ही चुनौतीपूर्ण थे और अब महंगा तेल, कमजोर रुपया और बढ़ती ब्याज दरें अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाएंगी। उन्होंने कहा कि इससे आम लोगों और बाजार दोनों पर असर पड़ेगा।”

Jagriti Kumari

लेखक के बारे में

Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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