चीन की नींद उड़ाने आए 'समुद्री जासूस', सेंसर लगाकर छोड़े जा रहे कछुए; ड्रैगन का बड़ा दावा
चीन ने दावा किया है कि विदेशी खुफिया एजेंसियां समुद्री डेटा चुराने के लिए सेंसर लगे 'जासूस कछुओं और मछलियों' का इस्तेमाल कर रही हैं। मछुआरों को इन्हें पकड़ने पर लाखों के इनाम का ऐलान किया गया है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

चीन ने दावा किया है कि विदेशी खुफिया एजेंसियां उसके समुद्री क्षेत्र में संवेदनशील डेटा इकट्ठा करने के लिए 'जासूस कछुओं' और 'जासूस मछलियों' का इस्तेमाल कर रही हैं। चीन के सरकारी सुरक्षा मंत्रालय (MSS) ने विदेशी एजेंसियों की इस हरकत को एक "अदृश्य गुप्त युद्ध" करार दिया है।
शुक्रवार को वीचैट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट शेयर करते हुए चीनी मंत्रालय ने बताया कि उनके जलक्षेत्र में ऐसे कई बड़े समुद्री जीव तैरते हुए मिले हैं, जिनके शरीर पर सेंसर लगे हुए थे। दावा किया गया है कि ये जीव पानी के तापमान, खारेपन और समुद्री धाराओं का रियल-टाइम डेटा इकट्ठा कर रहे थे और सैटेलाइट के जरिए इसे विदेशों में भेज रहे थे। हालांकि, चीन ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि ये जासूस जीव कहां मिले हैं या इसके पीछे उसे किस देश पर शक है।
समुद्र में उतारे गए तीन तरह के 'जासूस'
चीन के मुताबिक, विदेशी खुफिया एजेंसियां सालों से चीनी नौसेना की गतिविधियों का विश्लेषण करने, समुद्र के नीचे का नक्शा बनाने और तेल व गैस भंडारों की निगरानी करने की कोशिश कर रही हैं। इसके लिए वे तीन तरह के 'समुद्री जासूसों' का इस्तेमाल कर रही हैं।
अंडरवाटर 'संतरी' (Sentries): ये लंबे समय तक समुद्र के तल में घात लगाकर छिपे रहते हैं और हाइड्रोग्राफिक जानकारी व जहाजों की गतिविधियों का डेटा जुटाते हैं।
सीक्रेट एजेंट: ये जासूस समुद्री धाराओं के साथ-साथ तैरते हुए आगे बढ़ते हैं और जानकारी जुटाते हैं।
अंडरवाटर 'लाइटहाउस': ये उपकरण विदेशी पनडुब्बियों को चीनी जलक्षेत्र में रास्ता दिखाते हैं, ताकि वे बिना किसी की नजर में आए आसानी से गुजर सकें।
अत्याधुनिक उपकरणों और 'सेल्फ-डिस्ट्रक्ट' सिस्टम से लैस
मंत्रालय ने बताया कि उन्हें कुछ ऐसे 'बॉय' (Buoys) भी मिले हैं जिन्हें विदेशी समुद्री अनुसंधान संस्थानों ने तैनात किया था। मौसम संबंधी सेंसर से लैस ये उपकरण चीनी पनडुब्बियों की आवाज को रियल-टाइम में ट्रैक करने में सक्षम हैं। इसके अलावा सौर ऊर्जा और समुद्री लहरों से चलने वाले एक नए "वेव ग्लाइडर" का भी पता चला है, जो सैन्य डेटा भेज रहा था। चीनी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इन जासूसी उपकरणों की तीन प्रमुख विशेषताएं हैं-
- ये ऑटोमैटिक तरीके से या रिमोट कंट्रोल के जरिए लंबे समय तक काम कर सकते हैं।
- इनमें डेटा स्टोर करने, विश्लेषण करने और ट्रांसमिट करने की बेहद जटिल और शक्तिशाली क्षमता होती है।
- ये उपकरण मिशन पूरा होने के बाद 'सेल्फ-डिस्ट्रक्ट मैकेनिज्म' के जरिए खुद को नष्ट करने में सक्षम होते हैं, ताकि कोई सुबूत न बचे।
मछुआरों के लिए लाखों के इनाम का ऐलान
चीनी सरकार ने संदिग्ध जासूसी उपकरणों को पकड़ने के लिए अपने मछुआरों को वित्तीय इनाम देने की पेशकश की है। अगर किसी मछुआरे को राष्ट्रीय जलक्षेत्र में ऐसे उपकरण मिलते हैं, तो खोज के महत्व के आधार पर उन्हें 50,000 से लेकर 5,00,000 युआन तक का इनाम दिया जाएगा।
पहले भी सामने आ चुके हैं जानवरों की जासूसी के मामले
चीन नियमित रूप से दक्षिण चीन सागर, पूर्वी चीन सागर और ताइवान जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में जासूसी के दावे करता रहा है।
समुद्री जीवों के सैन्य इस्तेमाल के आरोप नए नहीं हैं। साल 2023 में ब्रिटिश खुफिया एजेंसी ने बताया था कि रूस ने अपने नौसैनिक बेस की सुरक्षा के लिए डॉल्फिन मछलियों को तैनात किया है।
साल 2019 में नॉर्वे के तट पर एक बेलुगा व्हेल मिली थी, जिसने एक हार्नेस (पट्टा) पहना हुआ था जिसमें कैमरा लगाने की जगह थी। तब माना गया था कि इसे रूसी नौसेना ने जासूसी की ट्रेनिंग दी है। हालांकि, चीन के मौजूदा दावों की अभी तक किसी भी बाहरी एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है।
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