कनाडा ने शरणार्थी सिस्टम पर कसा शिकंजा, हजारों भारतीयों पर पड़ेगा असर

Upendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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कनाडा ने देश में रिफ्यूजी स्टेटस मांगने वाले लोगों के लिए सख्त कानून पारित किया है। इस कानून के मुताबिक 2020 तक देश में प्रवेश करने वाले लोगों को अब शरणार्थी का दर्जा मिलना मुश्किल हो जाएगा। इससे हजारों भारतीय मूल के लोगों पर असर पड़ेगा।

कनाडा ने शरणार्थी सिस्टम पर कसा शिकंजा, हजारों भारतीयों पर पड़ेगा असर

कनाडा ने देश की शरणार्थी प्रणाली के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए नया कानून लागू किया है। इस कानून के तहत अब कनाडा में शरण लेने की कोशिश करने वाले लाखों लोगों पर असर पड़ेगा। बता दें, जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने वीजा प्रणाली को सख्त कर दिया था, जिसकी वजह से कनाडा में मौजूद हजारों भारतीय छात्रों और नागरिकों ने शरणार्थी स्टेटस के लिए दावा किया था। इन दावों में बढ़ते उछाल को देखते हुए कनाडा सरकार ने पिछले हफ्ते ही नया कानून पारित किया।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक कनाडा के इमिग्रेशन सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए बनाए गए इस कानून को बिल-12 के नाम से जाना जा रहा है। इस बिल के मुताबिक 24 मार्च 2020 के बाद कनाडा में आने वाले लोग अगर एक साल के बाद शरणार्थी स्टेट्स का दावा करते हैं, तो उस पर सुनवाई कम होगी। उनके दावे को इमीग्रेशन एंड रिफ्यूजी बोर्ड ऑफ कनाडा के पास नहीं भेजा जाएगा। इससे इन आवेदकों के लिए शरणार्थी स्टेटस मिलना मुश्किल हो जाएगा।

हालांकि, कनाडाई सरकार के मुताबिक ऐसे व्यक्तियों के लिए शरणार्थी स्टेटस के रास्ते पूरी तरह से बंद नहीं किए गए हैं। इनको IRCC द्वारा दिए जाने वाले प्री रिमूवल रिस्क एसेसमेंट का स्टेटस दिया जाएगा। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अगर वापस उनके देश भेजने पर ऐसे व्यक्तियों को जान का संकट न हो।

टोरंटो स्थित इमिग्रेशन वकील राघव जैन ने इस कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह कानून प्रणाली को स्थिर बनाने और उन कमजोरियों को संबोधित करने में मदद करेगा जिनका दुरुपयोग किया गया था। उन्होंने बताया कि सरकार की तरफ से उठाए गए इस कदम का सबसे बड़ा कारण 2024 में पोस्ट-ग्रेजुएट वर्क परमिट पात्रता में बदलाव था, जिससे हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्र आवेदन करने में असमर्थ रह गए।

बकौल, जैन ट्रूडो सरकार द्वारा बनाए गए नियमों की वजह से कनाडा के अंदर रहने वाले लोगों द्वारा किए जाने वाले दावों में वृद्धि हुई। इसमें भारतीय मूल के लोग सबसे ज्यादा थे। 2023 में करीब 11 हजार से ज्यादा भारतीयों ने शरणार्थी स्टेटस के लिए आवेदन किया था। 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 32 हजार के ऊपर पहुंच गया।

हालांकि, जैन ने इस कानून को लेकर चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि यह कानून पूरी प्रक्रिया के ऊपर दबाव पैदा कर सकता है। क्योंकि इससे IRCC के ऊपर कोर्ट केस होने की आशंका गहरा जाएगी। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सख्त पात्रता नियम वास्तविक शरणार्थियों को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक बच्चा जो 2020 में कनाडा आया लेकिन तुरंत शरण नहीं मांगी। अगर बाद में उनके देश में स्थिति बिगड़ती है, तो एक वर्ष की पात्रता सीमा उन्हें पूर्ण शरणार्थी सुनवाई तक पहुँचने से स्थायी रूप से रोक सकती है।

आपको बता दें, कनाडा में शुरुआत से ही शरणार्थियों का स्वागत बड़े स्तर पर किया जाता रहा है। हालांकि, बढ़ते गैंगवॉर, अपराध और नौकरियों की किल्लत की वजह से स्थानीय लोगों के मन में शरणार्थियों को लेकर अलगाव बढ़ा था। कोविड के दौर में हालात और भी ज्यादा अराजक हो गए थे। ऐसे में राजनैतिक पार्टियों ने इसको भुनाया और इमीग्रेशन के लिए और भी ज्यादा सख्त कर दिए।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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