कार्नी के भारत दौरे से पहले कनाडा का बड़ा कदम, तहव्वुर राणा से छीनने जा रहा नागरिकता; क्या वजह?
कनाडा ने 26/11 मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा की नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पीएम मार्क कार्नी के भारत दौरे से पहले यह बड़ा कदम है। जानिए राणा के 'झूठ' और फर्जीवाड़े की पूरी कहानी विस्तार से।

कनाडा सरकार ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर हुसैन राणा की कनाडाई नागरिकता रद्द करने की आधिकारिक कार्यवाही शुरू कर दी है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के 26 फरवरी को होने वाले भारत दौरे से ठीक पहले उठाया गया यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है। इसे पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में खराब हुए भारत-कनाडा संबंधों को सुधारने और नई दिल्ली के साथ रिश्ते बहाल करने की ओटावा की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
राणा की वर्तमान स्थिति और भारत प्रत्यर्पण
पाकिस्तान में जन्मा 65 वर्षीय तहव्वुर हुसैन राणा वर्तमान में भारत की हिरासत में है। वह पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा द्वारा किए गए 26/11 मुंबई आतंकी हमलों से जुड़े आरोपों में मुकदमे का सामना कर रहा है। इस भयानक हमले में 160 से अधिक लोगों की जान गई थी।
बीते 10 अप्रैल को अमेरिका से प्रत्यर्पण के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने राणा को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया था। उसे अमेरिका के लॉस एंजिल्स से एक विशेष विमान के जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) और NIA के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम नई दिल्ली लाई थी।
नागरिकता रद्द होने का असली कारण: आतंकवाद नहीं, धोखाधड़ी
कनाडाई सरकार का उसकी नागरिकता रद्द करने का यह कदम आतंकवाद के आरोपों पर आधारित नहीं है। आव्रजन, शरणार्थी और नागरिकता कनाडा (IRCC) विभाग ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है कि राणा को नागरिकता 'गलत बयानी' के आधार पर दी गई थी।
राणा 1997 में कनाडा गया था। विभाग का आरोप है कि साल 2000 में नागरिकता के लिए आवेदन करते समय राणा ने कनाडा में अपने निवास को लेकर झूठी जानकारी दी थी, जिसके आधार पर उसे 2001 में नागरिकता मिल गई थी।
IRCC की रिपोर्ट के मुताबिक, राणा ने दावा किया था कि वह आवेदन करने से पहले चार साल तक ओटावा और टोरंटो में रहा था और इस दौरान वह सिर्फ 6 दिन के लिए कनाडा से बाहर गया था। लेकिन, 'रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस' (RCMP) की जांच में यह झूठ पकड़ा गया।
जांच में सामने आया कि उसने अपना ज्यादातर समय अमेरिका के शिकागो में बिताया था, जहां उसके नाम पर कई संपत्तियां थीं और वह वहां इमिग्रेशन कंसल्टेंसी और किराने की दुकान सहित कई व्यवसाय चलाता था।
विभाग ने इसे एक गंभीर और जानबूझकर किया गया धोखा बताया है, जिसके कारण अधिकारियों ने गलत निष्कर्ष निकाला कि वह कनाडाई नागरिकता की शर्तों को पूरा करता है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया और कोर्ट की भूमिका
31 मई, 2024 के एक पत्र में, IRCC ने राणा को सूचित किया था कि उसकी कथित गलत बयानी ने नागरिकता देने वाले अधिकारियों को गुमराह किया है। अब इस मामले को फेडरल कोर्ट ऑफ कनाडा को सौंप दिया गया है, जिसके पास यह तय करने का अंतिम अधिकार है कि नागरिकता धोखाधड़ी या तथ्यों को छिपाकर प्राप्त की गई थी या नहीं।
राणा के वकील ने इस फैसले को अनुचित बताते हुए चुनौती दी है और इसे अधिकारों का उल्लंघन बताया है। पिछले हफ्ते फेडरल कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान, सरकारी वकीलों ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी कुछ संवेदनशील जानकारियों को सार्वजनिक न करने की अनुमति मांगी थी।
कनाडाई सरकार का रुख
आव्रजन विभाग के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि गलत बयानी के मामलों में नागरिकता रद्द करना कनाडा की नागरिकता प्रणाली की पवित्रता बनाए रखने के लिए जरूरी है। सरकार ऐसे फैसले हल्के में नहीं लेती। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में नागरिकता रद्द करने के ऐसे मामले बेहद दुर्लभ रहे हैं।
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