ईरान में उलझे ट्रंप को कनाडा ने दिया जोर का झटका, रक्षा समझौते की दशकों पुरानी परंपरा की खत्म

Apr 12, 2026 10:33 pm ISTUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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ईरान युद्ध में उलझे डोनाल्ड ट्रंप को मजबूत साथी कनाडा ने जोर का झटका दिया है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्को कार्नी ने ऐलान किया है कि कनाडा अब अपनी 1 डॉलर रक्षा खर्च में से 70 सेंट अमेरिका भेजने की नीति का पालन नहीं करेगा। अभी तक कनाडा की 70 फीसदी रक्षा सौदे अमेरिका से संबद्ध थे।

ईरान में उलझे ट्रंप को कनाडा ने दिया जोर का झटका, रक्षा समझौते की दशकों पुरानी परंपरा की खत्म

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अड़ियल रवैया अब भारी उनके देश के ऊपर भारी पड़ता हुआ नजर आ रहा है। ईरान में उलझ चुके ट्रंप की मदद करने के नाटो सहयोगी पहले ही मना कर चुके हैं। अब अमेरिका के पड़ोसी कनाड़ा ने भी अमेरिका से अपनी रक्षा निर्भरता को कम करने का ऐलान किया है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्को कार्नी ने घोषणा की कि कनाडा अपने रक्षा खर्च की दशकों पुरानी 'हर डॉलर का 70 सेंट अमेरिका भेजने' की परंपरा को खत्म करेगा। इसके साथ ही उन्होंने कनाडा को सैन्य रूप से मजबूत बनाने की कई योजनाएं भी लोगों के सामने रखीं।

मॉन्ट्रियल में लिबरल पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए, कार्नी ने कहा कि कनाडा को अपने रक्षा आधार और अर्थव्यवस्था को मजबूत करना होगा। उन्होंने प्रतिनिधियों से कहा कि "हमारे सैन्य बलों द्वारा हर डॉलर का 70 सेंट अमेरिका को भेजने के दिन अब समाप्त हो गए हैं।" कार्नी के द्वारा इस घोषणा के बाद वहां पर मौजूद लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाई। यह इस बात को प्रदर्शित करता है कि ट्रंप के रवैए की वजह से कनाडा में अमेरिका को लेकर नजरिया किस तरह बदला है।

कार्नी ने कहा कि उनकी सरकार घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और कनाडाई आपूर्तिकर्ताओं को प्राथमिकता देकर रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित करेगी। उन्होंने कहा, "हम कनाडाई स्टील, कनाडाई एल्युमीनियम, कनाडाई लकड़ी और कनाडाई श्रमिकों के साथ कनाडा को मजबूत बनाएंगे," और कहा कि आर्थिक संप्रभुता और राष्ट्रीय एकता प्रमुख लक्ष्य हैं।

कार्नी ने अपने संबोधन में लोगों से कनाडाई सामान खरीदने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे समुदायों को मजबूत बनाने और विदेशी बाजारों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

पिछले महीने रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा के सैन्य खर्च का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा वर्तमान में अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं को जाता है। एक अलग रक्षा रणनीति दस्तावेज में कहा गया है कि ओटावा घरेलू खरीद बढ़ाकर और मजबूत स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण करके इस संरचना को बदलना चाहता है।

आपको बता दें, नाटो सहयोगी के तौर पर अमेरिका और कनाडा के बीच में लगातार मजबूत संबंध बने रहे हैं। अमेरिका से सीमा साझा करने के बाद भी दोनों देशों के बीच में कभी कोई ज्यादा बढ़ा विवाद सामने नहीं आया है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप के सत्ता में आने के बाद कनाडा और अमेरिका के रिश्तों में दरार आना शुरू हो गई थी। ट्रंप ने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य कहकर और तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री ट्रूडो को गवर्नर कहकर संबोधित किया था। इसका कनाडा में काफी विरोध हुआ था। इसके बाद ट्रंप ने मार्को कार्नी के साथ ही अजीब बर्ताव किया। रही सही कसर अमेरिका द्वारा कनाडा पर टैरिफ लगाने से पूरी हो गई। इसके बाद कनाडा ने भी सीधे तौर पर जबाव देना शुरू कर दिया और अन्य नाटो सहयोगियों के साथ अपनी नजदीकी बढ़ाना शुरू की।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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