पत्नी-बेटी को एयर इंडिया हादसे में खोया, अब इस भारतीय को ब्रिटेन का 22 अप्रैल तक 'देश छोड़ो' अल्टीमेटम

Devendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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एयर इंडिया फ्लाइट 171 दुर्घटना में पत्नी और दो वर्षीय बेटी को खोने वाले भारतीय व्यक्ति मोहम्मद शेठवाला को ब्रिटेन सरकार ने 22 अप्रैल तक देश छोड़ने का आदेश दे दिया है। अगर उन्होंने समय पर देश नहीं छोड़ा तो उन्हें निर्वासित कर दिया जाएगा

पत्नी-बेटी को एयर इंडिया हादसे में खोया, अब इस भारतीय को ब्रिटेन का 22 अप्रैल तक 'देश छोड़ो' अल्टीमेटम

एयर इंडिया फ्लाइट 171 दुर्घटना में पत्नी और दो वर्षीय बेटी को खोने वाले भारतीय व्यक्ति मोहम्मद शेठवाला को ब्रिटेन सरकार ने 22 अप्रैल तक देश छोड़ने का आदेश दे दिया है। अगर उन्होंने समय पर देश नहीं छोड़ा तो उन्हें निर्वासित कर दिया जाएगा। इस फैसले पर ब्रिटेन में व्यापक आलोचना हो रही है और गृह मंत्रालय की संवेदनहीनता की तीखी निंदा की जा रही है। मेट्रो अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, मोहम्मद शेठवाला अपनी पत्नी के छात्र वीजा पर आश्रित के रूप में ब्रिटेन में रह रहे थे। गृह मंत्रालय ने 'दयालुता' और 'मानवीय आधार' पर उनके वीजा विस्तार के अनुरोध को खारिज कर दिया है। उन्हें फिलहाल आव्रजन जमानत (इमिग्रेशन बेल) पर रिहा किया गया है। शेठवाला ने मेट्रो को बताया कि मैं सरकार के इस फैसले को स्वीकार नहीं कर रहा हूं।

बता दें कि जून 2025 में अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया फ्लाइट 171 उड़ान भरने के महज कुछ सेकंड बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में कुल 260 लोगों की मौत हो गई, जिनमें शेठवाला की पत्नी सादिकाबानू तपेलीवाला और उनकी दो वर्षीय बेटी फातिमा भी शामिल थीं। द सन अखबार के अनुसार, शेठवाला मार्च 2022 में अपनी पत्नी के साथ ब्रिटेन गए थे। उनकी पत्नी लंदन के अल्स्टर विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रही थीं। बाद में दंपति को एक बेटी हुई, जिसका नाम फातिमा रखा गया। दुर्घटना से पहले सादिकाबानू कुशल श्रमिक कार्यक्रम के तहत ब्रिटेन में रहकर अपना करियर आगे बढ़ाने की योजना बना रही थीं।

शेठवाला ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि वे और उनकी पत्नी आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पड़ोसियों ने ब्रिटेन जाने के सपने को पूरा करने के लिए पैसे जमा किए थे। दुर्घटना के बाद जून के अंत में जब वे ब्रिटेन लौटे तो उन्हें गहरा मानसिक आघात लगा। उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले तक घर शोर-शराबे से भरा रहता था। पत्नी और बेटी की खुशबू महकती थी, बच्चों के गीत गूंजते थे और उनके कपड़े-सामान हर जगह बिखरे रहते थे। तनाव की वजह से मैं रात को सो भी नहीं पाता था। शेठवाला ने बताया कि भारत लौटने पर उन्हें सादिका और फातिमा की लगातार याद आएगी। उन्होंने आगे बताया कि एयर इंडिया ने उन्हें लंदन में नौकरी की पेशकश की थी, लेकिन वीजा की समय सीमा समाप्त होने के कारण उन्हें इसे ठुकराना पड़ा। वे डिलीवरी ड्राइवर के रूप में काम कर रहे थे।

शेठवाला ने कहा कि अगर उनकी पत्नी जीवित होतीं तो उन्हें ब्रिटेन में रहने की अनुमति मिल जाती। अगर बेटी जीवित होती तो अनिश्चितकाल तक रह सकते थे, लेकिन दोनों की मौत हो गई। उन्होंने गृह मंत्रालय पर निष्पक्ष न होने का आरोप लगाते हुए फैसले की समीक्षा की मांग की। बता दें कि ब्रिटेन का आश्रित वीजा प्राथमिक वीजाधारक के जीवनसाथी और बच्चों को रहने की अनुमति देता है, लेकिन शेठवाला का वीजा उनकी पत्नी की मौत के सात महीने बाद समाप्त हो गया। उन्होंने दिसंबर में मानवीय आधार पर FLR (विदेशी निवास) के लिए आवेदन किया, लेकिन उसे अस्वीकार कर दिया गया।

गृह मंत्रालय ने अपने पत्र में कहा है कि मोहम्मद को रहने का अधिकार नहीं दिया गया है क्योंकि उनका परिवार भारत में है और वे भारतीय भाषा बोलते हैं, इसलिए उनका पुनः एकीकरण संभव है। उन्हें 22 अप्रैल तक इमिग्रेशन बेल दी गई है, उसके बाद देश छोड़ना होगा, वरना हिरासत में लेकर निर्वासित किया जाएगा। इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए ब्रिटिश सामाजिक न्याय नेता और प्रवासी अधिकार नेटवर्क की सीईओ फिजा कुरैशी ने कहा कि गृह मंत्रालय की इस संवेदनहीनता से हम स्तब्ध हैं। एक शोकसंतप्त पिता और पति को उसके समर्थन नेटवर्क से अलग किया जा रहा है। शोक की घड़ी में भी सहानुभूति दिखाने से इनकार किया जा रहा है। उन्हें अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

इस बीच, ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि सभी वीजा आवेदनों का मूल्यांकन आव्रजन नियमों के अनुसार व्यक्तिगत योग्यता के आधार पर किया जाता है।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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