भारत में पीएम मोदी का सबसे लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड, ब्रिटेन में 10 साल में छह प्रधानमंत्रियों के इस्तीफे
एक तरफ भारत है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बना दिया है। दूसरी तरफ ब्रिटेन में पिछले 10 साल में एक के बाद एक 6 प्रधानमंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है।

ब्रिटेन में एक और प्रधानमंत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बीते दस साल में एक-दो नहीं, बल्कि दस प्रधानमंत्रियों ने ब्रिटेन में अपना पद छोड़ा है। दूसरी तरफ भारत है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बना दिया है। ब्रिटेन में प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने वाला सबसे ताजा नाम है, कीर स्टार्मर का। पिछले कुछ वक्त से चल रहे तमाम अनुमानों और अफवाहों के बीच स्टार्मर ने इस्तीफा दे दिया है। आइए देखते हैं अन्य उन पांच नामों के बारे में जो पिछले दस साल में इस्तीफा दिया है...
डेविड कैमरून
ब्रिटेन में प्रधानमंत्रियों के इस्तीफे का सिलसिला शुरू हुआ जुलाई 2016 से। तब कंजर्वेटिव पार्टी के डेविड कैमरून ने छह साल के कार्यकाल के बाद अपना पद छोड़ा था। उनका इस्तीफा ब्रेग्जिट के मुद्दे पर हुआ था। कैमरून ने ब्रिटेन का प्रधानमंत्री रहते साल 2015 में पीएम मोदी से भी मुलाकात की थी। इस दौरान भारत और ब्रिटेन के रिश्ते भी काफी बेहतर थे। हालांकि ब्रिटेन के लोगों ने यूरोपियन यूनियन से बाहर होने के पक्ष में मतदान किया, जिसके बाद उन्होंने पद छोड़ दिया।
थेरेसा मे
डेविड कैमरून के बाद थेरेसा मे, ब्रिटेन की प्रधानमंत्री बनी थीं। मार्गरेट थैचर के बार थेरेसा मे, ब्रिटेन की दूसरी महिला प्रधानमंत्री थीं। हालांकि तीन साल बाद ही 24 मई 2019 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे की घोषणा करते हुए थेरेसा, आंसुओं में डूब गई थीं। ब्रेग्जिट डील को लेकर संसद की सहमति नहीं मिलने और छोटे से ही कार्यकाल में 35 मंत्रियों के इस्तीफे के बाद वह प्रधानमंत्री पद छोड़ने पर मजबूर हुई थीं।
बोरिस जॉनसन
थेरेसा मे के पद से हटने के बाद ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बने थे बोरिस जॉनसन। जॉनसन पूर्व पत्रकार रहे हैं और उनकी पढ़ाई-लिखाई इटॉन और ऑक्सफोर्ड से हुई है। जॉनसन ने उस वक्त के विदेश सचिव जेरेमी हन को नेतृत्व के चुनाव में हराया था। हालांकि उनके नेतृत्व को लेकर अंदरखाने काफी ज्यादा विरोध होने लगा था। इसके चलते जुलाई 2022 में वह इस्तीफा देने पर बाध्य हो गए थे।
लिज ट्रस
ब्रिटेन की अगली प्रधानमंत्री थीं लिज ट्रस, जिनके नाम वहां की सबसे कम कार्यकाल वाली प्रधानमंत्री होने का रिकॉर्ड है। लिज ट्रस का कार्यकाल मात्र 45 दिन का रहा। इस्तीफे से एक दिन पहले ही उन्होंने कहा था कि वह एक फाइटर हैं और छोड़कर भागने वाली नहीं हैं। ट्रस तीसरी कंजर्वेटिव नेता बनीं, जिन्हें प्रधानमंत्री पद से हटना पड़ा। इसकी वजह बनी उनकी ‘मिनी बजट’ आर्थिक योजना। इसके चलते बाजार में संकट पैदा हो गया और ब्रिटिश पाउंड की वैल्यू गिर गई। वहीं, उन्हें पार्टी के भीतर से समर्थन खोना पड़ा। उन्होंने 25 अक्टूबर, 2022 को इस्तीफा दे दिया।
ऋषि सुनक
ऋषि सुनक भारतीय मूल के पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री थे। उन्होंने अक्टूबर 2025 में कंजर्वेटिव पार्टी की लीडरशिप रेस जीतने के बाद वह पीएम बने थे। मात्र 42 साल की उम्र में वह ब्रिटेन के इतिहास में सबसे कम उम्र के पीएम बने थे। सुनक ने डेविड कैमरून का रिकॉर्ड तोड़ा था, जो 43 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बने थे। हालांकि जुलाई 2024 में न सिर्फ ऋषि सुनक ब्रिटिश पीएम के पद से हटे, बल्कि कंजर्वेटिव पार्टी के शासन का भी अंत हो गया।
कीर स्टार्मर
सुनक के बाद दौर आया लेबर पार्टी का। एक ऐतिहासिक बहुमत के साथ लेबर पार्टी सत्ता में आई। कीर स्टार्मर ने देश की तकदीर में आमूल-चूल बदलाव का वादा किया था। उनसे उम्मीदें भी काफी ज्यादा थीं। स्टार्मर को ब्रिटेन का प्रधानमंत्री इसलिए चुना गया था ताकि वे एक सुरक्षित और विश्वसनीय नेतृत्व प्रदान कर सकें, जो कंजर्वेटिव पार्टी के शासनकाल के दौरान रहे सालों के राजनीतिक गतिरोध और अराजकता को समाप्त कर सके।
हालांकि, उनका कार्यकाल दो साल से भी कम समय में समाप्त हो रहा है। इसके पीछे कई गलतियां, पार्टी की भीतरी कलह और फैसले लेने में एक ऐसी भारी चूक रही, जिसने अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें जेफरी एपस्टीन से जुड़े घोटालों में उलझा दिया। जबकि वह कभी एपस्टीन से मिले भी नहीं थे और जिसके यौन अपराधों में उनकी कोई संलिप्तता नहीं थी।
लेखक के बारे में
Deepak Mishraमूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।
आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।
यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।
जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।
अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।
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