ईरान-अमेरिका में फिर बढ़ा तनाव, अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों पर किया हमला
मिडिल ईस्ट से एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर हमला कर दिया है। बताया जा रहा है कि जहाजों पर हमले के जवाब में ईरानी ठिकानों पर हमला किया गया है।

मिडिल ईस्ट से एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर हमला कर दिया है। बताया जा रहा है कि जहाजों पर हमले के जवाब में ईरानी ठिकानों पर हमला किया गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं।
अमेरिकी सेना ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों और मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के हमले के प्रयासों के बाद उसने ईरान में आईआरजीसी के ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारतीय समय के अनुसार रात 9:30 बजे अमेरिकी सेना ने ईरान स्थित आईआरजीसी ठिकानों पर हमला करना शुरू किया।
सेंटकॉम के पोस्ट में आगे कहा गया है कि आज दोपहर 12 बजे पूर्वी समय के अनुसार अमेरिकी सेना ने ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए। ये हमले होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर आईआरजीसी द्वारा हाल में किए गए हमले के प्रयासों के बाद किए गए हैं।
इससे पहले रविवार को अमेरिका ने कई हफ्तों बाद ईरान पर हमला किया था। अमेरिकी सेना ने लार्क द्वीप पर स्थित ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया था। अमेरिका का कहना है कि यह कदम ईरान को जलमार्ग में और अधिक समुद्री सुरंगें बिछाने से रोकने के लिए उठाया गया। ईरान ने जवाब में जॉर्डन स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, जिन्हें अमेरिकी पक्ष ने सफलतापूर्वक रोक दिया। संयुक्त अरब अमीरात ने भी अपने जलक्षेत्र में एक ईरानी ड्रोन को रोकने का दावा किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि अमेरिका और इजरायल की बमबारी से ईरान 'विफल राष्ट्र' बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि वहां का नेतृत्व खत्म हो गया है, सेना तबाह हो चुकी है और अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि और हमले जरूरी हो सकते हैं। पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि हम उन्हें सबक नहीं सिखाएंगे। देखते हैं क्या होता है।


