बीएनपी ने की मतदान केंद्रों पर फजर की नमाज पढ़ने की अपील, क्या है असली मकसद?
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के प्रमुख तारिक रहमान ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से एक अनोखी अपील की है। उन्होंने कहा है कि चुनाव के दिन मतदान केंद्रों पर पहुंचकर फजर की नमाज अदा करें और वहां से वोटों की गिनती पूरी होने तक न हटें।
बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनाव से ठीक पहले बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) के प्रमुख तारिक रहमान ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से एक अनोखी अपील की है। उन्होंने कहा है कि चुनाव के दिन मतदान केंद्रों पर पहुंचकर फजर की नमाज अदा करें और वहां से वोटों की गिनती पूरी होने तक न हटें। बीएनपी प्रमुख के इस अपील के बाद चर्चाओं के बाजार गरम है, और लोग कई तरह के कयास लगा रहे हैं। लोग ये भी जानना चाहते हैं कि अखिर बीएनपी प्रमुख ने इस तरह की अपील क्यों की?
ढाका के जात्राबारी में रैली में तारिक रहमान ने कहा कि मतदान केंद्र पर जाएं और वहां फजर की नमाज अदा करें। वहीं रुकें ताकि कोई साजिश न रच सके। वोट डालना काफी नहीं है। वोट डालने के बाद मत जाइए। सुनिश्चित करें कि वोटों की सही गिनती हो। उन्होंने आगे कहा कि कई लोग कहते हैं कि फजर के बाद लाइन में लगें। मैं कहता हूं कि इस बार जल्दी उठें, तहज्जुद पढ़ें और फिर मतदान केंद्र जाएं। बता दें कि फजर की नमाज सुबह की अनिवार्य प्रार्थना है, जबकि तहज्जुद रात की स्वैच्छिक नमाज है, जो मुश्किल समय में ईश्वर से मदद मांगने से जुड़ी होती है।
इस अपील के पीछे मुख्य मकसद
दरअसल, बांग्लादेश में चुनाव से पहले हिंसा की कई घटनाएं हो चुकी हैं, जैसे मतदान केंद्रों में आगजनी, हथियारों के साथ गिरफ्तारियां, और राजनीतिक हत्याएं हो चुकी है। कहा तो ये भी जा रहा है कि पुलिस की कमी के कारण कानून-व्यवस्था बहुत ही खराब है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि अंतरिम सरकार (मोहम्मद यूनुस) के तहत पुलिस बल कमजोर है, जिससे केंद्रों पर कब्जे या गड़बड़ी की आशंका बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि बीएनपी को संस्थाओं पर पूरा भरोसा नहीं है, इसलिए समर्थकों से कहा जा रहा है कि वे सुबह जल्दी पहुंचकर पूरे दिन मौजूद रहें। बता दें कि पुलिस-प्रशासन ने लगभग 24000 मतदान केंद्रों (कुल 42779 में से आधे) को उच्च या मध्यम जोखिम वाला बताया है।
गौरतलब है कि शेख हसीना के विरोध प्रदर्शनों के बाद पुलिस बल कमजोर हुआ है। यूनुस की अंतरिम सरकार हिंसा रोकने और सुधारों में नाकाम रही है। ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट में कहा गया कि मनमानी गिरफ्तारियां जारी हैं और राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध हैं। नोआखली और पटुआखली में हिंसा से 39 लोग घायल हुए। नेत्रकोना में पांच संस्थानों में आग लगाई गई। भोला में तलवारें लहराकर मतदाताओं को डराया गया। केरानीगंज में एक बीएनपी नेता की गोली मारकर हत्या हुई। मानवाधिकार समूह ऐन ओ सालिश केंद्र (ASK) के अनुसार, जनवरी 2026 में राजनीतिक हिंसा की घटनाएं दिसंबर की तुलना में तीन गुना बढ़ी है। 75 घटनाओं में 616 घायल और 11 मौतें हुईं।
लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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