
आसिम मुनीर के CDF बनते ही पाकिस्तान में बड़ा आतंकी हमला, 6 जवानों की मौत
पाकिस्तान में आसिम मुनीर के सीडीएफ बनते ही टीटीएफ ने कुर्रम जिले में एक सुरक्षा चौकी के पास बड़ा हमला किया है। इसमें कम से कम 6 जवान मारे गए हैं। माना जा रहा है कि यह टीटीएफ की आसिम मुनीर को चुनौती है।
पाकिस्तान में अफगानिस्तान की सीमा के करीब कुर्रम में हुए आतंकी हमले में कम से कम 6 जवान मारे गए हैं। जानकारी के मुताबिक सोमवार देर रहात एक सिक्योरिटी पोस्ट के पास धमाका हुआ था। बता दें कि पाकिस्तान में आए दिन इस तरह के हमले होते रहते हैं। पाकिस्तान की सरकार और सेना इसके लिए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराती है। आमाज न्यूज के मुताबिक कुर्रम जिले के मनाटो इलाके में यह हमला हुआ था जिसमें चार सुरक्षाकर्मी बुरी तरह घायल भी हुए हैं। बता दें कि हाल ही में पाकिस्तान के पहले सीडीएफ आसिम मुनीर ने पदभार संभाला है। ऐसे में यह हमला उनको सीधी चुनौती है।
अफगानिस्तान से बढ़ सकता है तनाव
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव पहले से ही चल रहा है। पाकिस्तान आरोप लगाता है कि अफगानिस्तान अपनी धरती पर टीटीपी को पनाह और शह देता है। वहीं तालिबान सरकार इससे साफ इनकार करती है। वहीं टीटीपी के हमलों के चलते तनाव एक बार फिर बढ़ सकता है। अगर पाकिस्तान एयरस्ट्राइक जैसा कोई ऐक्शन लेता है तो अफगानिस्तान की तरफ से भी गोलीबारी हो सकती है।
खैबर पख्तूनख्वा बन गया पाकिस्तान का नासूर
खैबर पख्तूनख्वा इलाका पाकिस्तान के नासूर बन गया है। इसके अलावा बलूचिस्तान में भी पाकिस्तान सरकार के कर्मचारी और सेना के जवान सुरक्षित नहीं रहते हैं। हाल ही में पख्तूनख्वा में एक सरकारी अफसर की गाड़ी पर हमला हुआ था जिसमें पांच लोगों की जान चली गई थी।
हाल में पाकिसातान ने अफगानिस्तान पर हमले किए थे जिसकी भारत ने निंदा की। इस हमले में कई नागरिक मारे गए। दोनों देशों के बीच झड़प ऐसे समय हुई, जब हफ्तों तक चली लड़ाई को खत्म करने के लिए युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए हुए दो महीने से भी कम समय हुआ था। विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने अपनी साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, "हमने सीमा पर झड़पों की रिपोर्ट देखी है जिसमें कई अफगान नागरिक मारे गए हैं।"
उन्होंने कहा, "हम निर्दोष अफगान लोगों पर ऐसे हमलों की निंदा करते हैं। भारत अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और स्वतंत्रता का दृढ़ता से समर्थन करता है।" कतर और तुर्किये की मध्यस्थता में हुई बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने 19 अक्टूबर को युद्धविराम समझौता किया था।

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