हर घंटे धमाके, रात भर दिखीं मिसाइलें; दुबई से लौटे यात्रियों ने बताया ईरान जंग का आंखों देखा हाल
दुबई से सुरक्षित लौटी शुब्रा नाम की एक महिला ने बताया कि हमें हर कुछ घंटे में धमाकों की आवाज सुनाई देती थी। रात में हमें मिसाइलें दिखती थीं। आज हम सुरक्षित और जीवित घर वापस आकर बहुत खुश हैं।
पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते फंसे लोगों में से कई ने घर वापस लौटने पर राहत की सांस ली और संकट के भयावह अनुभव को याद किया। संघर्षग्रस्त क्षेत्र से यहां पहुंचने वाले लोगों ने दुबई में अपने संक्षिप्त प्रवास के दौरान विस्फोटों की आवाज़ों और सड़कों के सुनसान हो जाने की घटनाओं को याद किया। अमेरिका और इजराइल के हमलों के जवाब में ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) तथा अन्य खाड़ी देशों पर हमला किए जाने से अनेक यात्री फंस गए। घर वापस लौटे लोगों ने केंद्र और राज्य सरकार को धन्यवाद दिया।
न्यूयॉर्क से आईं शुभा को रविवार को चेन्नई लौटना था। उन्होंने बताया कि संघर्ष के बाद सड़कें सुनसान दिख रही थीं और दुबई में स्थिति ''भयावह'' थी। उन्होंने यहां हवाई अड्डे पर पत्रकारों से कहा, ''यहां वापस आना एक आजादी जैसा है। मैं न्यूयॉर्क से आ रही हूं। शनिवार को दुबई में मेरा ठहराव था। उसी दिन दोपहर करीब एक बजे, उन्होंने (एयरलाइन अधिकारियों ने) बताया कि दुबई का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया है।''
जीवित घर वापस आकर बहुत खुश हैं
शुभा ने कहा, ''एमिरेट्स एयरलाइंस और दुबई हवाई अड्डा अधिकारियों ने हमारी बहुत अच्छी देखभाल की तथा हमें तुरंत होटलों में पहुंचा दिया। हम वहां होटलों में ठहरे हुए थे। हालांकि, होटल पहुंचने के बाद हमें बताया गया कि दुबई हवाई अड्डे पर कुछ मलबा या छर्रे जैसी कोई चीज़ गिरी है जिससे कुछ नुकसान हुआ है।'' उन्होंने कहा, ''हमारे प्रवास के दौरान भयावह स्थिति बनी रही क्योंकि हमें हर कुछ घंटे में धमाकों की आवाज सुनाई देती थी। रात में हमें मिसाइल दिखती थीं। आज हम सुरक्षित और जीवित घर वापस आकर बहुत खुश हैं।''
परिवार के साथ दुबई घूमने गए चेन्नई निवासी कार्तिक ने कहा, ''हम पिछले मंगलवार (24 फरवरी) को घूमने गए थे। हमें शनिवार को वापस लौटना था। लेकिन शनिवार को हमें हवाई क्षेत्र बंद होने की खबर मिली।'' उन्होंने कहा कि हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण उड़ान संचालन में कुछ देरी हो सकती है, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि उड़ानें रद्द हो जाएंगी।
मिसाइलों की आवाजें सुनाई दे रही थी
कार्तिक ने कहा, ''हम उसी दिन होटल लौट आए और वहीं ठहरे। हमें मिसाइलों की आवाजें सुनाई दे रही थीं। शुक्र है कि हमें आज की यात्रा के लिए टिकट मिल गया और हम चेन्नई वापस आ गए।'' वहीं, एक अन्य यात्री सैयद अली ने कहा, ''खबर सुनते ही दुबई हवाई अड्डे पर हालात देखकर कई बच्चे रोने लगे। हालांकि, होटल अधिकारियों ने हमारी बहुत मदद की और हमें ठहरने की जगह दी।'' तमिलनाडु के नागूर निवासी अली ने कहा, ''लगभग 20,000 लोग लंबी कतारों में खड़े देखे गए और उन्हें विभिन्न होटलों में भेजा गया। हमें अपनी सुरक्षित वापसी के लिए कदम उठाने पर केंद्र और राज्य सरकारों दोनों का आभार व्यक्त करना चाहिए।''
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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