हां, रूसी महिला से थे संबंध; एपस्टीन फाइल्स पर बिल गेट्स का बड़ा कबूलनामा, स्टाफ के सामने मांगी माफी

Pramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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टाउन हॉल में बिल गेट्स ने कथित तौर पर यह भी माना कि एपस्टीन फाइल्स में बताए गए रूसी महिलाओं के साथ उनके दो अफेयर थे, लेकिन उन्होंने साफ किया कि उन रिश्तों का एपस्टीन के पीड़ितों से कोई लेना-देना नहीं था।

हां, रूसी महिला से थे संबंध; एपस्टीन फाइल्स पर बिल गेट्स का बड़ा कबूलनामा, स्टाफ के सामने मांगी माफी

दुनिया के मशहूर उद्योगपति और परोपकारी बिल गेट्स एक बार फिर जेफ्री एपस्टीन से जुड़े विवादों के चलते सुर्खियों में हैं। इस मामले में फंसे बिल गेट्स अब माफी मांग रहे हैं। उन्होंने कबूल किया है कि उनके दो रूसी महिलाओं से संबंध थे। हाल ही में सामने आए नए दस्तावेजों के बाद बढ़े विवाद के बीच गेट्स ने अपनी संस्था बिल गेट्स फाउंडेशन के कर्मचारियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा है कि उनसे बड़ी गलती हुई है। सूत्रों के अनुसार, एक आंतरिक टाउनहॉल मीटिंग में गेट्स ने अपने पुराने संबंधों को लेकर सवालों का जवाब देते हुए स्वीकार किया कि एपस्टीन के साथ समय बिताना और फाउंडेशन के वरिष्ठ अधिकारियों को उससे मिलवाना “एक बड़ी गलती” थी।

उन्होंने कहा कि इस फैसले के कारण संगठन के लोगों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जिसके लिए वे जिम्मेदारी लेते हैं। टाउन हॉल में, गेट्स ने कथित तौर पर यह भी माना कि एपस्टीन फाइल्स में बताए गए रूसी महिलाओं के साथ उनके दो अफेयर थे, लेकिन उन्होंने साफ किया कि उन रिश्तों का एपस्टीन के पीड़ितों से कोई लेना-देना नहीं था। माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर की यह बात मीडिया रिपोर्ट्स में एपस्टीन के साथ उनकी पिछली बातचीत की डिटेल्स सामने आने के बाद नए सिरे से जांच के बाद आई है।

'मैंने कुछ भी गैरकानूनी नहीं किया': बिल गेट्स

यह विवाद तब फिर से उभरा जब अमेरिकी न्याय विभाग से जुड़े दस्तावेज और तस्वीरें सार्वजनिक हुईं, जिनमें गेट्स और एपस्टीन की कई मुलाकातों का जिक्र है। कुछ तस्वीरों में गेट्स उन महिलाओं के साथ नजर आए, जिनकी पहचान गोपनीय रखी गई है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, टाउनहॉल मीटिंग के दौरान बिल गेट्स ने यह भी स्वीकार किया कि उनके दो निजी संबंध रूसी महिलाओं के साथ थे, जिनका जिक्र इन फाइल्स में किया गया है। हालांकि उन्होंने कर्मचारियों से कहा, “मैंने कुछ भी गैरकानूनी नहीं किया और न ही ऐसा कुछ देखा।”

AI इम्पैक्ट समिट 2026 में नहीं आए थे गेट्स

इस पूरे विवाद का असर बिल गेट्स क सार्वजनिक कार्यक्रमों पर भी पड़ा है। गेट्स ने हाल ही में भारत में आयोजित होने वाले AI इम्पैक्ट समिट 2026 में अपनी भागीदारी रद्द कर दी थी, ताकि कार्यक्रम का ध्यान मुख्य विषयों से न भटके। गौरतलब है कि गेट्स फाउंडेशन पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि उसका एपस्टीन से कोई वित्तीय लेन-देन नहीं रहा और न ही उसे कभी संगठन में कोई भूमिका दी गई। इसके बावजूद, नए खुलासों के बाद गेट्स की छवि और उनकी पेशेवर विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि सार्वजनिक जीवन में प्रभावशाली हस्तियों के निजी संबंध किस हद तक उनकी साख को प्रभावित कर सकते हैं।

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लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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