UAE की मदद को आगे आया इजरायल, पहली बार मुस्लिम देश को दिया आयरन बीम; सैनिक भी भेजे

लाइव हिन्दुस्तान, अबु धाबी
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इजरायल ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाव के लिए पहली बार UAE को अपना अत्याधुनिक लेजर हथियार 'आयरन बीम' और 'आयरन डोम' दिया है। साथ ही इजरायली सैनिक भी तैनात किए गए हैं। पढ़ें इस ऐतिहासिक रक्षा समझौते की पूरी इनसाइड स्टोरी।

Israel's Iron Dome

मध्य पूर्व में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच एक बेहद अहम और ऐतिहासिक कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। इजरायल ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाव के लिए गुपचुप तरीके से अपनी सबसे आधुनिक लेजर-आधारित वायु रक्षा प्रणाली 'आयरन बीम' को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में तैनात कर दिया है।

साल 2020 में हुए 'अब्राहम एकॉर्ड्स' के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग का यह अब तक का सबसे बड़ा और अभूतपूर्व कदम है, जहां इजरायल ने न सिर्फ अपने अत्याधुनिक हथियार बल्कि उन्हें संचालित करने के लिए अपने सैनिक भी पहली बार किसी अरब देश की धरती पर उतारे हैं। गौरतलब है कि अमेरिका के साथ युद्धविराम से पहले ईरान लगातार यूएई पर हमले कर रहा था।

UAE को इजरायल ने क्या-क्या दिया?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल ने UAE के लिए एक पूरा रक्षा कवच तैयार किया है। इसके तहत तीन प्रमुख चीजें भेजी गई हैं:

  1. आयरन बीम: यह इजरायल का नया हाई-एनर्जी लेजर वेपन है। यह कम दूरी के रॉकेट, आर्टिलरी और ड्रोन को हवा में ही लेजर बीम से जलाकर नष्ट कर देता है। इसे टारगेट को खत्म करने में महज 4 से 5 सेकंड का समय लगता है।
  2. आयरन डोम: लेजर वेपन के साथ-साथ इजरायल ने अपनी सबसे परखी हुई और दुनिया की बेहतरीन वायु रक्षा प्रणाली 'आयरन डोम' भी UAE को दी है।
  3. स्पेक्ट्रो सिस्टम: यह एक बेहद आधुनिक निगरानी प्रणाली है जो खास तौर पर 'शाहेद' जैसे छोटे ईरानी ड्रोन्स को 20 किलोमीटर दूर से ही रडार पर डिटेक्ट कर लेती है। छोटे आकार के कारण इन ड्रोन्स को पकड़ना मुश्किल होता है।

इजरायली सैनिकों की तैनाती

इस रक्षा समझौते की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इजरायल ने केवल हथियार निर्यात नहीं किए हैं, बल्कि इन प्रणालियों को ऑपरेट करने के लिए दर्जनों इजरायली सैन्य कर्मियों को भी UAE में तैनात किया है। रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि यह सैन्य मौजूदगी छोटी नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर बूट्स ऑन द ग्राउंड है। इसके अलावा, इजरायल ने पश्चिमी ईरान से होने वाले मिसाइल लॉन्च की रियल-टाइम खुफिया जानकारी भी UAE के साथ साझा की।

आनन-फानन में भेजे गए 'प्रोटोटाइप' हथियार

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच हालिया संघर्ष के दौरान UAE ईरान के निशाने पर आ गया था। बताया जा रहा है कि ईरान ने UAE पर 500 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें और लगभग 2000 ड्रोन दागे थे।

हमलों की तीव्रता और मिडिल ईस्ट में बढ़ती युद्ध की आशंका को देखते हुए हालात इतने गंभीर थे कि इजरायल ने अपने वे हथियार भी UAE भेज दिए जो अभी 'प्रोटोटाइप' के चरण में थे। इनमें से कई सिस्टम इजरायल के अपने रडार नेटवर्क से भी पूरी तरह जुड़े नहीं थे, लेकिन जरूरत को देखते हुए उन्हें तुरंत "बेंच से उठाकर" मैदान में उतार दिया गया।

यह कदम इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

दशकों तक अरब देशों और इजरायल के बीच कड़वाहट रही है। एक मुस्लिम/अरब देश को अपनी सबसे संवेदनशील तकनीक देना यह दर्शाता है कि इजरायल UAE को अपना एक बेहद अहम और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार मान चुका है। यह कदम ईरान को एक स्पष्ट संदेश है कि खाड़ी के अरब देश और इजरायल अब उसके खिलाफ एक साझा रक्षा मोर्चे पर खड़े हैं।

युद्ध में इस्तेमाल होने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलें (जो हमलों को रोकती हैं) करोड़ों रुपये की होती हैं और ईरान लगातार सस्ते ड्रोन से हमले कर रहा था। ऐसे में लेजर आधारित 'आयरन बीम' का प्रति-फायर खर्च बहुत कम (लगभग न के बराबर) होता है, जिससे यह ड्रोन हमलों का सबसे सटीक और किफायती तोड़ बन गया है।

Amit Kumar

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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