कनाडा ने जासूसी वाली लिस्ट में डाला भारत का नाम, पहले खुद किया था इनकार; खालिस्तान पर नरम
कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS ने अपनी 'पब्लिक रिपोर्ट 2025' में भारत पर विदेशी दखलंदाजी और जासूसी के गंभीर आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट में साथ ही खालिस्तानी खतरे को भी स्वीकार किया गया है। पढ़ें पूरी खबर।

कनाडा की खुफिया एजेंसी ने अपनी एक नई रिपोर्ट में भारत पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए हैं। कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) ने अपनी 'पब्लिक रिपोर्ट 2025' में भारत को उन देशों की लिस्ट में रखा है जो कनाडाई धरती पर 'विदेशी दखलंदाजी' और जासूसी की गतिविधियों में शामिल हैं। इसके साथ ही, इस रिपोर्ट में चरमपंथी खालिस्तानी तत्वों से देश को होने वाले खतरे को भी स्वीकार किया गया है। कनाडा की खुफिया एजेंसी की 'पब्लिक रिपोर्ट' में 'बिश्नोई गैंग' को लेकर भी एक बड़ा दावा किया गया है।
रिपोर्ट की खास बातें:
- कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS ने अपनी 'पब्लिक रिपोर्ट 2025' जारी की है।
- भारत को चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान के साथ दखलंदाजी करने वाले प्रमुख देशों की लिस्ट में रखा गया है।
- खुफिया एजेंसी ने दावा किया है कि भारत ने कनाडाई नेताओं और पत्रकारों से खुफिया रिश्ते बनाने की कोशिश की है।रिपोर्ट में खालिस्तानी चरमपंथियों की तरफ से होने वाले हिंसक खतरे का भी जिक्र किया गया है।
भारत पर लगाए गए क्या आरोप?
CSIS की इस रिपोर्ट में भारत से जुड़ी कई बातों पर चिंता जाहिर की गई है। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि नई दिल्ली ने अपने रणनीतिक हितों को साधने के लिए कनाडाई राजनेताओं, पत्रकारों और इंडो-कनाडाई समुदाय के सदस्यों के साथ गुपचुप संबंध बनाने की 'ऐतिहासिक' कोशिशें की हैं। इसके अलावा, रिपोर्ट में 'अंतरराष्ट्रीय दमन' का भी जिक्र है। इसमें दावा किया गया है कि भारत सरकार की आलोचना को दबाने के लिए निगरानी रखने और दबाव बनाने जैसी रणनीतियों का इस्तेमाल किया गया।
खालिस्तानी मूवमेंट पर क्या बोला कनाडा?
कनाडा की रिपोर्ट में खालिस्तान समर्थक आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा गया है कि भारत इस मुद्दे को अपनी घरेलू सुरक्षा के नजरिए से देखता है। हालांकि, रिपोर्ट में कनाडाई रुख को दोहराते हुए कहा गया है कि शांतिपूर्ण तरीके से खालिस्तान की वकालत करना कनाडा के भीतर एक "वैध राजनीतिक गतिविधि" है और इसे चरमपंथ नहीं माना जाता। रिपोर्ट यह भी मानती है कि भारत खालिस्तानी अलगाववाद को अपनी घरेलू स्थिरता के लिए खतरे के तौर पर देखता है और उसी से निपटने के लिए कदम उठाता है।
रिपोर्ट में कनाडा के इतिहास के सबसे घातक आतंकी हमले- एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम धमाके की 40वीं बरसी का जिक्र किया गया है, जिसमें 329 लोग मारे गए थे। रिपोर्ट मानती है कि इसके संदिग्ध कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथी (CBKE) थे। खुफिया एजेंसी के मुताबिक, साल 2025 में कनाडा में CBKE से जुड़ा कोई हमला नहीं हुआ है, लेकिन हिंसक चरमपंथी गतिविधियों में इनकी संलिप्तता कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक खतरा बनी हुई है। चरमपंथियों का एक छोटा गुट भारत में हिंसा को बढ़ावा देने, फंड जुटाने और योजना बनाने के लिए अभी भी कनाडाई धरती का इस्तेमाल कर रहा है।
रिपोर्ट में यह सनसनीखेज दावा किया गया है कि ये खालिस्तानी चरमपंथी कनाडाई नागरिकों से जुड़े हुए हैं जो अपने हिंसक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कनाडाई संस्थानों का इस्तेमाल करते हैं। ये चरमपंथी समुदाय के भोले-भाले लोगों से फंड इकट्ठा करते हैं, जिसे बाद में हिंसक गतिविधियों की तरफ मोड़ दिया जाता है।
पुलिस के बयान और खुफिया रिपोर्ट में विरोधाभास
दिलचस्प बात यह है कि CSIS की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब कुछ समय पहले ही कनाडा की पुलिस का रुख इस मामले में थोड़ा अलग था। इसी साल मार्च में, रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के कमिश्नर माइक डुहेम ने एक इंटरव्यू में साफ कहा था कि जांच में ऐसा कोई भी मौजूदा सबूत नहीं मिला है जो भारत सरकार के एजेंटों को कनाडा में किसी खुफिया या हिंसक गतिविधि से जोड़ता हो।
निज्जर विवाद से बिगड़े थे रिश्ते
गौरतलब है कि साल 2023 में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद कनाडा ने भारत पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिससे दोनों देशों के बीच एक बड़ा कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। इस घटना के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था। हालांकि, भारत सरकार और नई दिल्ली के अधिकारियों ने कनाडा के इन सभी पिछले आरोपों को हमेशा प्रेरित और बिना किसी ठोस सबूत का बताकर पूरी तरह खारिज किया है। फिलहाल दोनो देशों के रिश्ते फिर से पटरी पर लौट रहे हैं।
बिश्नोई गैंग को घोषित किया आतंकी समूह
CSIS की इस रिपोर्ट का एक बेहद अहम पहलू क्रिमिनल कोड के तहत नए आतंकी समूहों को लिस्ट करना है। साल 2025 में 12 नए समूहों को 'आतंकी संस्था' के रूप में जोड़ा गया है। इन अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठनों की लिस्ट में 'बिश्नोई गैंग' का नाम भी शामिल किया गया है।
युवाओं में तेजी से फैल रहा कट्टरपंथ
खुफिया रिपोर्ट में युवाओं के बीच बढ़ते कट्टरपंथ पर गहरी चिंता जाहिर की गई है। चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि CSIS की हर 10 में से लगभग 1 आतंकवाद निरोधी जांच में कम से कम एक विषय 18 साल से कम उम्र का नाबालिग है। हाल के वर्षों में 13 साल तक के युवा भी आतंकवाद निरोधी जांच के घेरे में आए हैं। साल 2025 में ही आतंकवाद से जुड़े मामलों में चार नाबालिगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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