Hindi Newsविदेश न्यूज़Big News Britain sanctions on person organisation Khalistan Terrorism group Babbar Khalsa
संपत्तियां फ्रीज, कंपनियों पर भी प्रतिबंध; खालिस्तानी आतंकियों के खिलाफ ब्रिटेन की बहुत बड़ी कार्रवाई

संपत्तियां फ्रीज, कंपनियों पर भी प्रतिबंध; खालिस्तानी आतंकियों के खिलाफ ब्रिटेन की बहुत बड़ी कार्रवाई

संक्षेप:

गुरप्रीत सिंह रेहल पर भारत में आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त संगठनों से जुड़ने का आरोप है। ब्रिटिश सरकार का मानना है कि वह बब्बर खालसा और बब्बर अकाली लहर की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है।

Dec 06, 2025 12:30 pm ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, लंदन
share Share
Follow Us on

भारत के दबाव के बीच ब्रिटेन ने खालिस्तानी आतंकवादी समूहों के खिलाफ बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है। ब्रिटिश सरकार ने 4 दिसंबर को गुरप्रीत सिंह रेहल नामक एक व्यक्ति और बब्बर अकाली लहर संगठन पर आतंकवाद से जुड़े आरोपों के तहत प्रतिबंध लगा दिए हैं। यह कार्रवाई खासतौर पर बब्बर खालसा इंटरनेशनल नामक प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकवादी संगठन से इनकी सांठगांठ के लिए की गई है। इस कदम से ब्रिटेन की वित्तीय प्रणाली का दुरुपयोग करने वाले चरमपंथियों को झटका लगेगा और भारत-ब्रिटेन के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग को नई मजबूती मिलेगी।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

संपत्ति फ्रीज और कंपनियों पर असर

ब्रिटेन सरकार ने काउंटर-टेररिज्म (सैंक्शंस) (ईयू एग्जिट) रेगुलेशंस 2019 के तहत इन प्रतिबंधों को लागू किया है। मुख्य कार्रवाइयों में शामिल हैं-

संपत्ति फ्रीज: रेहल, बब्बर अकाली लहर और इनसे जुड़ी कंपनियों की ब्रिटेन में स्थित सभी संपत्तियों, फंड्स और आर्थिक संसाधनों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिया गया है। ब्रिटिश नागरिकों या संस्थाओं को इन संसाधनों से कोई सौदा करने, या इन्हें कुछ भी उपलब्ध कराने की अनुमति नहीं है, जब तक कि एचएम ट्रेजरी से लाइसेंस न मिले।

कंपनियों पर असर: रेहल से जुड़े संगठन सेविंग पंजाब सीआईसी, वाइटहॉक कंसल्टेशंस लिमिटेड और अनइनकॉर्पोरेटेड संगठन लोहा डिजाइन्स पर भी प्रतिबंध लगे हैं।

निदेशक पद पर प्रतिबंध: गुरप्रीत सिंह रेहल को किसी कंपनी का निदेशक बनने या उसके प्रबंधन में प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से भाग लेने से रोक दिया गया है।

प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर सात साल तक की कैद या 10 लाख पाउंड तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। ब्रिटेन के वित्त मंत्रालय के मूल्यांकन के अनुसार, यह पहली बार है जब घरेलू काउंटर-टेररिज्म रिजीम का इस्तेमाल खालिस्तानी मिलिटेंट ग्रुप्स के फंडिंग को बाधित करने के लिए किया गया है।

खालिस्तानी आतंक से जुड़े आरोप: भर्ती, फंडिंग और हथियार खरीद

गुरप्रीत सिंह रेहल पर भारत में आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त संगठनों से जुड़ने का आरोप है। ब्रिटिश सरकार का मानना है कि वह बब्बर खालसा और बब्बर अकाली लहर की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है। इन आतंकी संगठनों की गतिविधियों में समूहों का प्रचार-प्रसार और प्रोत्साहन, भर्ती अभियान चलाना, वित्तीय सेवाएं प्रदान करना, हथियारों और अन्य सैन्य सामग्री की खरीद में सहायता और ऐसे ही संगठनों को समर्थन और सहयोग देना शामिल है।

बब्बर अकाली लहर को बब्बर खालसा का सहयोगी संगठन माना जाता है, जो इसकी भर्ती, प्रचार और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। बब्बर खालसा इंटरनेशनल एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है, जो खालिस्तान आंदोलन के नाम पर हिंसा और घृणा फैलाने के लिए फेमस है। ब्रिटेन सरकार की ये कार्रवाइयां भारत में हो रही आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने वाले नेटवर्क को निशाना बनाती है।

ब्रिटिश अधिकारियों के बयान: 'आतंकवाद के फंडिंग को कुचलेंगे'

आर्थिक सचिव लूसी रिग्बी केसी एमपी ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि जब आतंकवादी ब्रिटेन की वित्तीय प्रणाली का शोषण करेंगे तो हम चुपचाप नहीं देखेंगे। यह ऐतिहासिक कदम दर्शाता है कि हम हर उपलब्ध टूल का इस्तेमाल करके आतंकवाद की फंडिंग को रोकने के लिए तैयार हैं- चाहे वह कहीं भी हो। ब्रिटेन उन शांतिपूर्ण समुदायों के साथ दृढ़ता से खड़ा है, जो हिंसा और घृणा को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ हैं।

भारत-ब्रिटेन सहयोग को मिली मजबूती: वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त मोर्चा

यह कदम भारत और ब्रिटेन के बीच बढ़ते आतंकवाद विरोधी सहयोग का प्रतीक है। ब्रिटेन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह विदेशी मिट्टी पर आतंकवाद को समर्थन देने वाले नेटवर्क को बर्दाश्त नहीं करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे खालिस्तानी चरमपंथियों के वैश्विक फंडिंग चैनलों पर असर पड़ेगा। इससे भारत की सुरक्षा चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं।

बब्बर खालसा का इतिहास और खतरा

बब्बर खालसा 1980 के दशक में खालिस्तान आंदोलन के दौरान उभरा। यह भारत में कई आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है। यह संगठन हथियार तस्करी, विस्फोटक हमले और राजनीतिक हत्याओं में लिप्त रहा है। ब्रिटेन में इसके समर्थक लंदन और अन्य शहरों में सक्रिय हैं, जहां वे फंडिंग और प्रचार के जरिए गतिविधियां चलाते हैं। हाल के वर्षों में, भारत ने ब्रिटेन से ऐसे नेटवर्क्स पर कार्रवाई की मांग की थी, और यह संयुक्त घोषणा उसी दिशा में एक बड़ा कदम है। यह कार्रवाई ब्रिटेन की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो वैश्विक आतंकवाद को फंडिंग रोकने पर केंद्रित है। आने वाले दिनों में और प्रतिबंधों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, खासकर जब अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ रहा है।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

Amit Kumar
अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।