ट्रंप को बड़ा झटका, स्पेन-फ्रांस के बाद अब इस देश ने भी दिखाया अंगूठा; नहीं उतरने दिया युद्धक विमान
एक सूत्र ने मंगलवार को एक अखबार की रिपोर्ट की पुष्टि करते हुए बताया कि इटली ने अमेरिकी सैन्य विमानों को मध्य-पूर्व जाने से पहले सिसिली के सिगोनेला एयर बेस पर उतरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।

ईरान जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति यूरोपीय देशों और अपने मित्र देशों से मदद के लिए छटपटा रहे हैं लेकिन एक-एक कर बारी-बारी से सभी देश ट्रंप को झटका दे रहे हैं। एक दिन पहले ही स्पेन ने ईरान युद्ध में शामिल अमेरिकी लड़ाकू विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था। अब इटली ने भी अमेरिका को करारा झटका दिया है। इटली ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अमेरिका को अपने सैन्य अड्डे के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में युद्ध को लेकर वैश्विक तनाव बढ़ा हुआ है।
इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने मंगलवार को एक अखबार की रिपोर्ट की पुष्टि करते हुए बताया कि इटली ने अमेरिकी सैन्य विमानों को मध्य-पूर्व जाने से पहले सिसिली के सिगोनेला एयर बेस पर उतरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इटैलियन अखबार डेली कोरिएरे डेला सेरा ने रिपोर्ट किया कि कुछ अमेरिकी बॉम्बर विमानों को मध्य-पूर्व जाने से पहले पूर्वी सिसिली में स्थित सैन्य अड्डे पर उतरना था लेकिन इसकी इजाजत उन्हें नहीं दी गई।
US ने आधिकारिक अनुरोध नहीं किया था
हालांकि, अखबार ने यह नहीं बताया कि उन्हें कब उतरना था। अखबार को सूत्रों (जिसे मीडिया से बात करने का अधिकार नहीं था) ने अपनी पहचान बताने से इनकार करते हुए ये जानकारी दी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि इसमें कितने विमान शामिल थे या रोम ने अनुमति देने से कब इनकार किया। अखबार ने आगे बताया कि अनुमति इसलिए नहीं दी गई क्योंकि अमेरिका ने इसके लिए कोई आधिकारिक अनुरोध नहीं किया था और इटली के सैन्य नेतृत्व से परामर्श नहीं किया गया था; जबकि देश में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के उपयोग को नियंत्रित करने वाली संधियों के तहत ऐसा करना अनिवार्य है।
इटली के रक्षा मंत्रालय ने नहीं दी प्रतिक्रिया
फिलहाल, इटली के रक्षा मंत्रालय की ओर से इस पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की गई है। बता दें कि इटली में वामपंथी विपक्षी दलों ने सरकार से आग्रह किया है कि वह इस संघर्ष में शामिल होने से बचने के लिए इटली में स्थित अमेरिकी ठिकानों के उपयोग को रोक दे। इस पर इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी की दक्षिणपंथी सरकार ने कहा है कि यदि इस तरह का कोई अनुरोध किया जाता है, तो वह इसके लिए संसदीय अनुमति लेगी। बता दें कि कुछ दिन पहले फ्रांस ने भी अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की इजाजत अमेरिका को नहीं दी थी।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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