US में भारतीयों को एक और झटका, ट्रंप ने बनवाई खूंखार अपराधियों की सूची; 89 हिन्दुस्तानियों के नाम

Feb 06, 2026 04:59 pm ISTPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, वॉशिंगटन
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DHS ने लिखा है कि ये सिर्फ एक झलक है और यह भी साफ किया कि यह सूची सिर्फ एक ‘स्नैपशॉट’ है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन के दौरान पकड़े गए अपराधियों की पूरी संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।

US में भारतीयों को एक और झटका, ट्रंप ने बनवाई खूंखार अपराधियों की सूची; 89 हिन्दुस्तानियों के नाम

अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी कार्रवाई के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) द्वारा जारी की गई “Worst of the Worst” यानी खूंखार अपराधियों की लिस्ट में भारतीय मूल के 89 लोगों के नाम शामिल हैं। यह ट्रंप प्रशासन की भारतीयों समेत अन्य प्रवासियों पर कठोर कार्रवाई का नवीनतम मामला है।यह सूची एक सार्वजनिक डेटाबेस के रूप में जारी की गई है, जिसमें करीब 25,000 ‘क्रिमिनल इल्लीगल एलियंस’ का ब्योरा है। यानी ऐसे अवैध प्रवासी जो हत्या, यौन अपराध, ड्रग तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में दोषी पाए गए हैं और जिन्हें ICE (Immigration and Customs Enforcement) तथा CBP (Customs and Border Protection) ने गिरफ्तार किया है।

नाम, फोटो और अपराध: सब कुछ सार्वजनिक

DHS द्वारा लॉन्च की गई वेबसाइट WOW.DHS.GOV पर अपराधियों के नाम, उनकी तस्वीरें, उनके द्वारा किए गए अपराध और उनकी राष्ट्रीयता सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई गई है। DHS ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है, “यह वेबसाइट इसलिए शुरू की गई है ताकि अमेरिकी नागरिक देख सकें कि हम किन आपराधिक अवैध प्रवासियों को गिरफ्तार कर रहे हैं, उन्होंने क्या अपराध किए और किन समुदायों से उन्हें हटाया गया।” भारतीय मूल के अमनदीप मुल्तानी और हरजिंदर सिंह को भी इस खूंखार अपराधियों की लिस्ट में रखा गया है। इन पर ड्रग्स की तस्करी के आरोप चल रहे हैं।

ये सिर्फ एक झलक है

DHS ने लिखा है कि ये सिर्फ एक झलक है और यह भी साफ किया कि यह सूची सिर्फ एक ‘स्नैपशॉट’ है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन के दौरान पकड़े गए अपराधियों की पूरी संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। एक कड़े बयान में विभाग ने कहा, “ये वे लोग हैं जिन्होंने हमारे समुदायों को आतंकित किया। हम तब तक नहीं रुकेंगे, जब तक ऐसे हर व्यक्ति को देश से बाहर नहीं कर दिया जाता। अमेरिकी नागरिकों को उन लोगों से पीड़ित नहीं होना चाहिए, जिन्हें यहाँ रहने का कानूनी हक ही नहीं है।”

ट्रंप की इमिग्रेशन नीति: शुरुआत से ही सख़्त

बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव अभियान के दौरान ही अवैध आव्रजन पर सख़्त कार्रवाई का वादा किया था। अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन उन्होंने अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर “राष्ट्रीय आपातकाल” घोषित किया था और सीमा पर अधिक सैनिकों की तैनाती का ऐलान किया था। उन्होंने “क्रिमिनल एलियंस” को देश से बाहर निकालने की बात भी दोहराई थी।

कार्रवाई पर विवाद और विरोध

हालांकि, इस सख़्ती को लेकर अमेरिका में विवाद भी गहराता जा रहा है। कई राज्यों में इमिग्रेशन छापों के दौरान हिंसक घटनाएँ सामने आईं हैं। डेमोक्रेट सांसदों के साथ-साथ कुछ रिपब्लिकन नेता भी इस कार्रवाई से नाराज हैं। अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट्स सांसदों ने DHS की फंडिंग रोक दी है और ICE और CBP में सुधारों की मांग की है। उनकी मांग है कि फेडरल एजेंट बॉडी पर कैमरा पहने और और अपनी ID भी पहने। उनकी मांग यह भी है कि यह एजेंट अपने मास्क को भी उतारे ताकि उनकी पहचान हो सके। हालांकि ट्रंप सरकार इन मांगों को मानने से इनकार कर रही है।

भारतीय समुदाय के लिए संवेदनशील मुद्दा

‘Worst of the Worst’ सूची में 89 भारतीय मूल के लोगों का नाम आना भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए संवेदनशील और चिंता का विषय है। हालांकि यह भी साफ है कि सूची में शामिल सभी लोग गंभीर अपराधों में दोषी हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम का असर अमेरिका में इमिग्रेशन नीति, प्रवासी समुदायों की छवि और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार बहस तीनों पर पड़ेगा।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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