भारत के नए 'जल प्रहार' से पाकिस्तान में खलबली! IWT पर रोना शुरू, चिनाब-ब्यास लिंक का नया विवाद क्या?

Pramod Praveen पीटीआई, इस्लामाबाद
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पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने मीडिया रिपोर्टों और भारत सरकार द्वारा जारी कथित टेंडर दस्तावेजों का हवाला देते हुए दावा किया कि भारत चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना पर काम करने की तैयारी कर रहा है।

भारत के नए 'जल प्रहार' से पाकिस्तान में खलबली! IWT पर रोना शुरू, चिनाब-ब्यास लिंक का नया विवाद क्या?

भारत और पाकिस्तान के बीच जल विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि भारत चिनाब नदी के पानी को सुरंग के जरिए ब्यास नदी में मोड़ने की योजना बना रहा है, जो सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty-IWT) का गंभीर उल्लंघन होगा। पाकिस्तान ने आज (गुरुवार, 4 जून को) दावा किया कि भारत द्वारा चिनाब नदी का पानी मोड़ने के लिए नदी-जोड़ो परियोजना बनाना सिंधु जल संधि और अन्य अंतरराष्ट्रीय कानूनों का ''गंभीर उल्लंघन'' होगा। विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी यह टिप्पणी मीडिया में आई उन खबरों को लेकर पूछे गए सवाल पर की, जिनमें कहा गया था कि भारत सिंधु नदी घाटी का हिस्सा रहीं चिनाब नदी के पानी को ब्यास नदी तक सुरंग के माध्यम से पहुंचाने की योजना बना रहा है।

भारत ने पिछले साल 22 अप्रैल को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा किये गए हमले और 26 लोगों की हत्या के अगले दिन पाकिस्तान के खिलाफ उठाए गए दंडात्मक उपायों के तहत 1960 की सिंधु जल संधि को 'स्थगित' कर दिया था। विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल वितरण और उपयोग को नियंत्रित करती है।

पाकिस्तान का क्या दावा

अंद्राबी ने कहा, ''जी हां, हमने यह खबर और साथ ही भारत सरकार द्वारा जारी सार्वजनिक निविदा दस्तावेज भी देखा है, जिसमें कहा गया है कि भारत ने चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं, जिसका उद्देश्य चिनाब से ब्यास प्रणाली में प्रतिवर्ष 1.9 मिलियन एकड़ फीट पानी स्थानांतरित करना है।'' उन्होंने दावा किया, ''चिनाब नदी के पानी का ब्यास नदी प्रणाली में इस तरह से मोड़ना न केवल सिंधु जल संधि का, बल्कि संधि के कानूनों, विशेष रूप से संधियों के कानून पर वियना घोषणापत्र, साथ ही अंतर्राष्ट्रीय जल कानून के व्यापक ढांचे का भी गंभीर उल्लंघन है, जिसमें 1977 के जलमार्गों पर संयुक्त राष्ट्र संधि में परिलक्षित सिद्धांत भी शामिल हैं।''

चिनाब-ब्यास लिंक का नया विवाद क्या?

सिंधु जल संधि के तहत, पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों, चिनाब, झेलम और सिंधु से आने वाला संपूर्ण जल प्रवाह प्राप्त होता था, जबकि भारत को तीन पूर्वी नदियों, सतलुज, ब्यास और रावी पर पूर्ण अधिकार प्राप्त था। अंद्राबी ने यह भी कहा कि सलाल बांध की गाद निकालने की भारत की योजना न तो सिंधु जल संधि के तहत और न ही 1978 के सलाल समझौते के तहत अनुमेय है। सलाल जलविद्युत परियोजना जम्मू -कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के रियासी जिले में चिनाब नदी पर स्थित है। इसकी क्षमता 690 मेगावाट की है और 'रन-ऑफ-द-रिवर' परियोजना है।

भारत ने कोई सूचना नहीं दी: पाक

अंद्राबी ने दावा किया कि भारत ने न तो आधिकारिक तौर पर इन परियोजनाओं के बारे में कोई सूचना दी है और न ही कोई नोटिस साझा किया है और न ही इस संबंध में कोई परामर्श मांगा है। हालांकि, 22 मई को प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (पीडीएमए) ने भारतीय अधिकारियों का एक पत्र पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सभी संबंधित विभागों के साथ साझा किया और उन्हें चिनाब नदी में संभावित बाढ़ के मद्देनजर उच्च सतर्कता बरतने का निर्देश दिया। इसमें दावा किया गया था कि भारत ने सलाल बांध से गाद साफ करने के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। पीडीएमए के प्रवक्ता मजहर हुसैन ने लाहौर में बताया था कि उन्हें इस संबंध में कृषि विभाग से निर्देश प्राप्त हुए थे, जिसने दावा किया कि उसे भारतीय अधिकारियों से 21 से 30 मई के बीच भारत की ओर से पानी के बढ़े हुए प्रवाह के संबंध में सूचना प्राप्त हुई थी।

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लेखक के बारे में

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प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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