
कड़ाके की ठंड में ब्लैकआउट, बर्लिन में 45000 घरों की बिजली गुल; आतंकी जांच के आदेश
जर्मनी की राजधानी बर्लिन में कड़ाके की ठंड और बर्फबारी के बीच एक बड़ा बिजली संकट छा गया। 3 जनवरी 2026 को दक्षिण-पश्चिमी बर्लिन में लिश्टरफेल्डे गैस पावर प्लांट के पास हाई-वोल्टेज केबलों पर आगजनी का हमला हुआ, जिससे बिजली गुल रही।
बिजली कटौती आमतौर पर विकासशील देशों की आम समस्या मानी जाती है, लेकिन यूरोप के सबसे बड़े शहर बर्लिन में ऐसा होना असामान्य है। यही कारण है कि जब जर्मन राजधानी के दक्षिण-पश्चिमी इलाकों में कई दिनों तक बिजली गुल रही, तो इसने दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं और आतंकवाद की जांच शुरू कराई। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शहर में हुई सबसे लंबी बिजली कटौती के कारण कड़ाके की सर्दी में हजारों घरों में बिजली और हीटिंग नहीं पहुंची।
जर्मन अधिकारियों ने कहा कि वे इस हमले की जांच 'आतंकवादी संगठन की सदस्यता, तोड़फोड़, आगजनी और सार्वजनिक सेवाओं में व्यवधान' के संदेह में कर रहे हैं। बर्लिन में बिजली धीरे-धीरे बहाल हुई और अब पूरी तरह रिस्टोर हो गई। जर्मन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला इतना गंभीर था कि प्रभावित लोगों की मदद के लिए सेना को तैनात करना पड़ा। नागरिक अधिकारियों और चैरिटी संगठनों ने होटलों, स्कूलों और स्पोर्ट्स सेंटर्स में अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराया।
रिपोर्ट के अनुसार, हमले के समय बर्लिन में तापमान -9 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया था। इन दिनों शहर में औसत तापमान -2 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है, और न्यूनतम -11 डिग्री तक पहुंच जाता है। हालांकि बिजली अब पूरी तरह बहाल हो चुकी है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि 3 जनवरी 2026 को दक्षिण-पश्चिमी बर्लिन में लिश्टरफेल्डे गैस पावर प्लांट के पास हाई-वोल्टेज केबलों पर हुए हमले के बाद करीब 45000 घरों, 2000 से अधिक व्यवसायों, अस्पतालों, नर्सिंग होम्स और स्कूलों में बिजली गुल रही।
बताया गया कि बिजली कटौती के दौरान सार्वजनिक स्विमिंग पूल 24 घंटे खुले रखे गए ताकि लोग नहा सकें और गर्म पानी का इस्तेमाल कर सकें, जबकि बसों को अस्थायी वार्मिंग स्टेशन के रूप में इस्तेमाल किया गया। बर्लिन के अधिकारियों ने घोषणा की कि प्रभावित लोगों के होटल खर्च को वहन किया जाएगा, लेकिन दरें एक निश्चित सीमा तक सीमित रहेंगी।

लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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