Hindi Newsविदेश न्यूज़Bangladeshi leaders express sympathy for Pakistan BNP leader says India massacred intellectuals
बांग्लादेशी नेताओं में जागी पाक से हमदर्दी, BNP लीडर बोले- भारत ने किया बुद्धिजीवियों का नरसंहार

बांग्लादेशी नेताओं में जागी पाक से हमदर्दी, BNP लीडर बोले- भारत ने किया बुद्धिजीवियों का नरसंहार

संक्षेप:

बांग्लादेश में इन दिनों एक बार फिर भारत विरोधी बयानों की बाढ़ आ गई है। आम चुनाव नजदीक आते ही भारत विरोध को मुद्दा बनाया जा रहा है। बीएनपी नेता ने जहर उगलते हुए कहा कि पाक ने नहीं बल्कि एक पड़ोसी ने बांग्लादेशी बुद्धिजीवियों का नरसंहार करवाया था।

Dec 16, 2025 10:20 am ISTAnkit Ojha वार्ता
share Share
Follow Us on

चुनाव करीब आते ही बांग्लादेश में भारत विरोधी बयानबाजी में उछाल आ गया है। बीएनपी के एक नेता ने दावा किया है कि 1971 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में बंगाली बुद्धिजीवियों की सामूहिक हत्या पाकिस्तानी सेना ने नहीं, बल्कि "एक पड़ोसी देश" की सेना ने की थी। यह अप्रत्यक्ष इशारा भारत की ओर था।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

बांग्लादेश की राष्ट्रवादी पार्टी के नेता एडवोकेट अबू अल यूसुफ खान टिपू, जो पार्टी की नारायणगंज शहर इकाई के सदस्य सचिव हैं, ने रविवार को शहीद बुद्धिजीवी दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा आयोजित एक चर्चा में ये टिप्पणियां कीं। इन टिप्पणियों की काफी आलोचना हुई है और बीएनपी ने इस बयान से खुद को अलग कर लिया है। ये टिप्पणियां बंगलादेश के विजय दिवस, 16 दिसंबर से एक दिन पहले आई हैं, जो पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण का प्रतीक है और भारत में भी विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

टीपू ने जमात को पश्चिमी पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों में ऐतिहासिक रूप से मिलीभगत के आरोप से बरी करते हुए कहा कि हत्याओं के लिए किसी एक विशेष राजनीतिक समूह को दोषी ठहराना "इतिहास का विकृतिकरण" है और उन्होंने जमात से अंतरिम सरकार से "इतिहास को सही करने" की मांग करने का आग्रह किया।

उनकी ये टिप्पणियां जमात नेता गुलाम पोरवार द्वारा कार्यक्रम के दौरान किए गए इसी तरह के दावों के बाद आईं, जिन्होंने दावा किया कि बुद्धिजीवियों की हत्या के पीछे भारत का हाथ था, जो "भारतीय सेना और उसकी खुफिया एजेंसी द्वारा रची गई एक सुनियोजित साजिश" का हिस्सा था और यहां तक कि उन्होंने झूठा दावा भी किया कि भारतीय सेना ने 8 दिसंबर तक ढाका पर कब्जा कर लिया था।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha
अंकित ओझा पिछले 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। अंकित ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से स्नातक के बाद IIMC नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है। इसके बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है। राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डेस्क पर कार्य करने का उनके पास अनुभव है। इसके अलावा बिजनेस और अन्य क्षेत्रों की भी समझ रखते हैं। हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही पंजाबी और उर्दू का भी ज्ञान है। डिजिटल के साथ ही रेडियो और टीवी के लिए भी काम कर चुके हैं। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।