
ढाका पहुंचे भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त, यूनुस सरकार ने अर्जेंट बुलाया; दिल्ली से कनेक्शन
राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक दबाव और अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के आरोपों से जूझते बांग्लादेश के भारत के साथ संबंधों में इस साल गिरावट आई और दोनों पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक तनातनी बढ़ी है। पिछले वर्ष अगस्त में तत्कालीन PM शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने और भारत चले जाने के बाद रिश्तों में खटास आई।
भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह विदेश मंत्रालय के 'आपात बुलावे' पर सोमवार रात को ढाका पहुंच गए। सोमवार देर रात मिली रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में तनाव के बीच यह कदम उठाया गया है। कहा जा रहा है कि ताजा स्थिति के मद्देनजर उन्हें ढाका बुलाया गया है।
दैनिक समाचार पत्र ‘प्रथोम आलो’ की रिपोर्ट में कहा गया है, 'भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों की हालिया स्थिति को देखते हुए नई दिल्ली में बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम रियाज हमीदुल्लाह को आपात आधार पर ढाका बुला लिया गया है।'
विदेश मंत्रालय के अनाम ‘जिम्मेदार सूत्रों’ के हवाले से समाचार पत्र ने बताया है कि इस बुलावे पर हमीदुल्लाह सोमवार की रात को ही ढाका पहुंच गए। रिपोर्ट में कहा गया है, 'उन्हें द्विपक्षीय संबंधों की हालिया स्थिति पर चर्चा के लिए ढाका बुलाया गया है।'
साल 2025 में बांग्लादेश-भारत संबंधों में आई खटास
राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक दबाव और अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के आरोपों से जूझते बांग्लादेश के भारत के साथ संबंधों में इस साल गिरावट आई और दोनों पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक तनातनी बढ़ी।
पिछले वर्ष अगस्त में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने और भारत चले जाने के बाद रिश्तों में खटास आई। प्रदर्शनों के दौरान हिंसक कार्रवाई में कथित भूमिका के लिए इस वर्ष एक न्यायाधिकरण ने हसीना की अनुपस्थिति में उन्हें मौत की सजा सुनाई।
ढाका ने भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को विभिन्न मुद्दों पर पांच बार तलब किया, जबकि भारत ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्ला को एक बार बुलाया और उनके देश में सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता जताई।
व्यापक रूप से ‘‘भारत-हितैषी’’ मानी जाने वाली अवामी लीग सरकार से मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में हुए परिवर्तन ने बांग्लादेश के कूटनीतिक रुख को काफी हद तक बदल दिया।
वहीं, इस्लामाबाद के साथ रिश्ते गहरे करने की ढाका की पहल ने क्षेत्रीय समीकरणों को और जटिल बना दिया।
क्या बोले जानकार
विशेषज्ञों के मुताबिक, यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के साथ बड़ी वैश्विक ताकतों की सीमित दिलचस्पी के कारण बांग्लादेश की स्थिति और कठिन हुई तथा ढाका कूटनीतिक रूप से दिशाहीन हो गया।
विश्लेषकों ने निर्वाचित सरकार के अभाव के कारण 2025 को बांग्लादेश के लिए ‘गायब साल’ करार दिया, जहां प्रमुख दूतावासों का संपर्क अंतरिम प्रशासन की तुलना में अगली सरकार बनाने की संभावना वाले दलों से अधिक रहा।
पूर्व राजदूत महफूजुर रहमान ने ‘पीटीआई’ से कहा कि 2025 में बांग्लादेश ‘‘किसी स्पष्ट विदेश नीति दिशा’’ के बिना आगे बढ़ा। उन्होंने कहा कि ‘‘द्विपक्षीय रिश्तों में आए तनाव को दूर करने के लिए हालांकि दिल्ली की ओर से नरमी और परिपक्वता के संकेत दिखे, लेकिन ढाका ने रिश्ते सुधारने के लिए न तो पहल की और न ही इस मौके का लाभ उठाया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘(ढाका ने) इसके बजाय एक अपरिपक्व रवैया दिखाया, जो साफ तौर पर एक घरेलू वर्ग को खुश करने के लिए था।’’
वर्ष के अंतिम महीनों में भारत-विरोधी ताकतों के उभार ने क्षेत्र में चिंता बढ़ाई। साथ ही, आम चुनाव की तारीख 12 फरवरी 2026 घोषित होने के बाद राजनीतिक हिंसा में वृद्धि देखी गई।

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Nisarg Dixitलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




