Explainer: ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल चीनी फाइटर जेट को खरीदेगा बांग्लादेश, भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?

लाइव हिन्दुस्तान, ढाका
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Bangladesh News: बांग्लादेश पाकिस्तान द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के खिलाफ इस्तेमाल किए गए चीनी जे-10सीई लड़ाकू विमानों की खरीदने जा रहा है। संभव है कि इस सौदे पर अगस्त 2026 में हस्ताक्षर भी हो जाए।

Chinese jets

बांग्लादेश अपनी वायुसेना को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी कदम उठाते हुए चीन से 24 अत्याधुनिक J-10CE लड़ाकू विमान खरीदने जा रहा है। ये वही चीनी जेट हैं जिनका पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय वायुसेना के Su-30MKI, जगुआर और राफेल विमानों के खिलाफ सक्रिय रूप से इस्तेमाल किया था। इस सौदे को बांग्लादेश के 'फोर्सेस गोल 2030' रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम का सबसे बड़ा हिस्सा माना जा रहा है, जो न केवल ढाका की हवाई क्षमता को कई गुना बढ़ाएगा बल्कि भारत के पूर्वी पड़ोस में चीन के रणनीतिक प्रभाव को भी मजबूत करेगा।

ढाका स्थित प्रमुख समाचार पोर्टल 'डेली वादा' ने सूत्रों के हवाले से खुलासा किया है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की हालिया चीन यात्रा के दौरान इस सौदे पर गहन चर्चा हुई। बांग्लादेश सरकार के उच्चाधिकारियों ने बताया कि अगस्त 2026 तक खरीद समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जा स कते हैं। आगे कहा गया है कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ तो विमानों की पहली खेप 2026 के अंतिम महीनों या 2027 की शुरुआत में बांग्लादेश पहुंच सकती है।

विमान की खूबियां

इस विमान को चीन का सबसे सक्षम 4.5 पीढ़ी का लड़ाकू विमान माना जाता है। WS-10B आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन से लैस यह विमान अधिकतम मैक 1.8 की गति हासिल कर सकता है। इसका डेल्टा-विंग और कैनार्ड कॉन्फिगरेशन, डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर नियंत्रण प्रणाली के साथ मिलकर इसे दुश्मन के लिए खतरनाक बनाता है।

  • AESA रडार: एक साथ कई लक्ष्यों का पता लगाने और ट्रैक करने की क्षमता, साथ ही इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचाव।
  • हथियार वहन क्षमता: 11 हार्डपॉइंट्स पर 5600 किलोग्राम तक गोला-बारूद ले जाने की क्षमता। इसमें PL-15 लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, सटीक निर्देशित बम और एंटी-शिप मिसाइलें शामिल हैं।
  • हवाई रक्षा, जमीनी हमले और समुद्री अभियानों के लिए पर्याप्त रेंज और सहनशक्ति।
  • मल्टी-रोल क्षमता: डॉगफाइट, बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल वारफेयर, ग्राउंड अटैक और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर में सक्षम।

बता दें कि बांग्लादेश वायुसेना (BAF) वर्तमान में लगभग 40-44 लड़ाकू विमानों के छोटे बेड़े पर निर्भर है, जिसमें ज्यादातर पुराने चीनी चेंगदु F-7 (मिग-21 के चीनी वेरिएंट) और मात्र आठ रूसी MiG-29 शामिल हैं। नए जे-10सीई विमानों के शामिल होने से BAF की मारक क्षमता और आधुनिकता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।

कितनी हो सकती है कीमत?

रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्येक जे-10सीई विमान की अनुमानित कीमत करीब 40 मिलियन अमेरिकी डॉलर बताई जा रही है। पूरे 24 विमानों का सौदा लगभग 2.2 अरब डॉलर का हो सकता है। यह राशि राफेल (120 मिलियन डॉलर प्रति यूनिट) या F-16 जैसे पश्चिमी विमानों की तुलना में काफी कम है, जिस वजह से विकासशील देशों के लिए यह आकर्षक विकल्प बन गया है। बताया जा रहा है कि समझौते में केवल विमान ही नहीं, बल्कि व्यापक पैकेज शामिल होगा जिसमें पायलट और तकनीकी कर्मियों का प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, स्पेयर पार्ट्स, रखरखाव सुविधाएं और दीर्घकालिक तकनीकी सहायता शामिल होगी।

भारत के लिए क्या है मायने?

दूसरी ओर रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि हालांकि तत्काल सैन्य संतुलन में बड़ा बदलाव नहीं आएगा, लेकिन लंबे समय में कई गंभीर चुनौतियां पैदा होंगी। भारतीय वायुसेना की पूर्वी वायु कमान (शिलांग) के पास असम और पश्चिम बंगाल में Su-30MKI और Rafale से लैस चार पूर्ण लड़ाकू स्क्वाड्रन तैनात हैं, जिनकी कुल संख्या 60-70 आधुनिक विमानों के आसपास है। इसलिए पूर्वी क्षेत्र में वायु श्रेष्ठता अभी भी भारत के पास बनी रहेगी। फिर भी ये सौदा भारत के लिए चिंता की बात होने वाली है...

  • चीन पर बढ़ती निर्भरता: जे-10सीई जैसे उन्नत विमानों का रखरखाव, सॉफ्टवेयर अपडेट, हथियार और पार्ट्स पूरी तरह चीन पर निर्भर होंगे। इससे ढाका की बीजिंग पर रक्षा निर्भरता और मजबूत होगी।
  • पाकिस्तान के साथ इंटरऑपरेबिलिटी: पाकिस्तान वायुसेना के पास पहले से 20 J-10CE परिचालन में हैं और 16 और ऑर्डर पर हैं। दोनों देशों के बीच समान प्लेटफॉर्म होने से खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त प्रशिक्षण और संभावित परिचालन समन्वय की राह खुल सकती है।
  • लालमोनिरहाट एयरबेस का आधुनिकीकरण: भारतीय सीमा से मात्र 20 किलोमीटर दूर स्थित इस पुराने द्वितीय विश्व युद्ध काल के एयरबेस को युद्ध स्तर पर अपग्रेड किया जा रहा है। बांग्लादेश ने दावा किया है कि यह केवल उसके परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों के लिए है, लेकिन विशेषज्ञ इसे संभावित फॉरवर्ड बेसिंग पॉइंट के रूप में देख रहे हैं।

हालांकि बांग्लादेश सरकार ने बार-बार स्पष्ट किया है कि यह खरीदारी किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है बल्कि अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए है। हालांकि, क्षेत्रीय शक्ति समीकरण, हथियारों की दौड़ और पूर्वी सीमा पर सुरक्षा चुनौतियों के लिहाज से भारत को अपनी वायुसेना की आधुनिकीकरण योजनाओं को और तेज करने तथा पूर्वी मोर्चे पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी। वहीं जानकारों का कहना है कि यह विकास दक्षिण एशिया में चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति का एक और कड़ी साबित हो सकता है। ऐसे में इस पर भारत को नजर रखनी होगी।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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