गंगा जल संधि खत्म होने से पहले बांग्लादेश की बढ़ी बेचैनी, कहा- इसी से तय होंगे भारत से रिश्ते

Upendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा  जल संधि अपने अंतिम चरण में है। ऐसे में बांग्लादेश की बेचैनी बढ़ी हुई है। वहां की बीएनपी सरकार का कहना है कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते कैसे होंगे, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि गंगा जल संधि कैसे होती है।

गंगा जल संधि खत्म होने से पहले बांग्लादेश की बढ़ी बेचैनी, कहा- इसी से तय होंगे भारत से रिश्ते

भारत और बांग्लादेश के बीच हुई गंगा जल संधि दिसंबर खत्म होने वाली है। वर्तमान में बीएनपी सरकार भारत विरोधी बयानों और पाकिस्तान के साथ नजदीकी बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध है। ऐसी स्थिति में बीएनपी सरकार को आशंका है कि उसकी पुरानी हरकतों की वजह से भारत के साथ इस संधि को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है। अब बांग्लादेश की तरफ से भारत को लगातार चेतावनी दी जा रही हैं। शनिवार को बीएनपी की तरफ से कहा गया कि भारत के साथ बांग्लादेश के रिश्ते कैसे रहेंगे। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों देशों के बीच गंगा जल बंटवारा संधि किस तरीके से होती है।

बीएनपी महासचिव और स्थानीय सरकार में सहकारिता मंत्री मिर्जा फकरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि भारत के साथ संबंध गंगा जल संधि पर निर्भर करते हैं। उन्होंने कहा, "हम भारत सरकार को स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि बांग्लादेश के लोगों की जरूरतों के अनुसार नई गंगा जल संधि तुरंत ही लागू की जानी चाहिए।" उन्होंने कहा कि पुरानी गंगा जल संधि 1996 में शेख हसीना के समय में हुई थीं। अब वह सत्ता में नहीं है। ऐसे में भारत और बांग्लादेश के बीच नई जल संधि को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसकी वजह से करोड़ों लोगों का जीवन अधर में लटका हुआ है।

आलमगीर ने गंगा जल संधि को बांग्लादेश के लिए जरूरी बताते हुए कहा कि इससे करोड़ों लोगों की जीविका जुड़ी हुई है। ऐसे में तुरंत ही नई संधि लागू होनी चाहिए। उन्होंने एक सुझाव देते हुए कहा कि नई संधि को अनिश्चित समय के लिए लागू होना चाहिए।

पद्मा पर डैम परियोजना तैयार करवा रहा बांग्लादेश

बांग्लादेशी मंत्री का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब इससे पहले वहां के जल संसाधन मंत्री ने भारत को लेकर तीखा बयान दिया था। पद्मा बैराज को लेकर कहा था कि यह बांग्लादेश के अपने हित का मामला है इसमें भारत के साथ चर्चा जरूरी नहीं है। गौरतलब है कि बांग्लादेश के इस नए बैराज प्रोजेक्ट का निर्माण 2033 तक पूरा होने की संभावना है।

भले ही बांग्लादेश इस प्रोजेक्ट को भारत के फरक्का बैराज का जवाब मान रहा हो, लेकिन विशेषज्ञों की इस पर राय अलग है। कई जल विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बांग्लादेश द्वारा प्रस्तावित बैराज से वहां पर पद्मा नदी का तल ऊंचा हो सकता है। तलछट के जमाव की वजह से नदी उथली और चौड़ी हो सकती है, जिससे फरक्का बैराज के दुष्प्रभाव और बढ़ सकते हैं।

क्या है विवाद?

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल संधि विवाद पिछले काफी समय से चला आ रहा है। बांग्लादेश का आरोप है कि भारत ने फरक्का बैराज का निर्माण करके उसकी तरफ जाने वाले पानी को रोकने की कोशिश की है। वहीं भारत शुरुआत से ही कहता आया है कि इसका उद्देश्य केवल कोलकाता बंदरगाह की क्षमता को बढ़ाना है।

इन्हीं मतभेदों को दूर करने के लिए 1996 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के बीच में 30 वर्ष का एक समझौता हुआ था। लेकिन अब उसका समय पूरा होने वाला है। बांग्लादेश में लगातार भारत विरोधी माहौल को देखते हुए सरकार द्वारा इस पर विचार किया जा रहा है। दरअसल, भारत और बांग्लादेश के बीच नदियों का एक बड़ा जाल है। बांग्लादेश की 54 नदियां भारत से होकर निकलती हैं। ऐसे में यही नदियां भारत के लोगों के लिए भी जरूरी हैं, दूसरी तरफ यही नदियां बांग्लादेश के लिए भी जरूरी हैं।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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