
हिंदुओं के लिए नरक बना बांग्लादेश, अब हिन्दू नेता की पुलिस कस्टडी में मौत; परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
प्रलय चाकी की मौत ऐसे समय में हुई है जब बीते कुछ सप्ताह में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के साथ बर्बरता की कई खबरें सामने आई हैं। 18 दिसंबर को मैमनसिंह में दीपू चंद्र दास की लिंचिंग के बाद से कई हिंदुओं की हत्या कर दी गई है।
बांग्लादेश में चुनाव से पहले हिंसक घटनाओं के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। खासकर हिन्दू और अन्य अल्पसंख्यकों के लिए बांग्लादेश नरक बनता जा रहा है। यहां बीते कुछ दिनों में ही कई हिंदुओं की बेरहमी से हत्या कर दी गई है और मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार इस पर एक्शन लेने की बजाय इसे प्रोपेगंडा खबरें कहकर पल्ला झाड़ रही है। इस बीच बांग्लादेश में मशहूर हिंदू संगीतकार और आवामी लीग के सीनियर नेता प्रलय चाकी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई है, जिसके बाद परिवारवालों ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
पुलिस ने 60 वर्षीय प्रलय की मौत को स्वाभाविक मौत बताया है। हालांकि प्रलय चाकी के परिवार वालों ने जेल प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रलय की तबियत बिगड़ने के बावजूद उन्हें जरूरी मेडिकल सुविधाएं नहीं दी गईं जिनसे उनकी मौत हो गई।
पुलिस ने किया था गिरफ्तार
बता दें कि प्रलय चाकी को जुलाई 2024 में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्र आंदोलन से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। 16 दिसंबर को पुलिस ने पार्टी की पाबना यूनिट के सांस्कृतिक मामलों के सचिव प्रलय को अचानक पाबना के दिलालपुर स्थित उनके घर से उठा लिया और बाद में उन्हें गिरफ्तार बताया गया।
क्या कह रहे अधिकारी?
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाबना जेल अधीक्षक मोहम्मद उमर फारूक ने कहा है कि प्रलय कई स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे और उन्हें डायबिटीज और दिल की बीमारी शामिल थी। जेल अधिकारी ने कहा कि उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ था और शुक्रवार को उन्हें पहले पाबना जनरल अस्पताल ले जाया गया। बाद में, जब उनकी हालत बिगड़ी, तो उन्हें राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां रविवार रात करीब 9 बजे उनकी मौत हो गई।”
परिवार के गंभीर आरोप
हालांकि प्रलय के बेटे सोनी चाकी ने इन दावों को झूठा बताया। उन्होंने कहा, “मेरे पिता को उस समय किसी भी मामले में नाम ना होने के बावजूद गिरफ्तार कर लिया गया। वह लंबे समय से डायबिटीज और दिल की बीमारी से पीड़ित थे। जेल में उनकी हालत बिगड़ गई, लेकिन अधिकारियों ने हमें सूचित नहीं किया।” उन्होंने कहा, “दूसरों से पता चलने के बाद हम अस्पताल पहुंचे लेकिन उन्हें सही इलाज नहीं मिला था जिससे उनकी मौत हो गई।”

लेखक के बारे में
Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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