
बांग्लादेश में भीड़ तंत्र! अखबारों के दफ्तर आग के हवाले; पत्रकारों को क्यों बनाया जा रहा निशाना?
एक पत्रकार ने देश में मौजूदा स्थिति के बारे में बात करते हुए कहा कि कई पत्रकारों को बिना वजह बताए गिरफ्तार किया जा रहा है और असल में उन पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है जो सरकार की आलोचना करते हैं।
बांग्लादेश में पिछले साल जुलाई में हुए हिंसक प्रदर्शनों की अगुवाई करने वाले नेताओं में से एक शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद देश में एक बार हिंसा भड़क उठी है। कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और हिंसा की घटनाएं हुई है जिससे देशभर में तनाव बढ़ गया है। प्रदर्शनकारियों ने पहले ही ध्वस्त हो चुके, बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान के आवास पर तोड़फोड़ की। वहीं देश में कई अखबारों के दफ्तरों को भी निशाना बनाया गया है। प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने राजधानी के कारवां बाजार में शाहबाग चौराहे के पास स्थित बांग्ला समाचार पत्र ‘प्रोथोम आलो’ के कार्यालय और पास के ‘डेली स्टार’ अखबार के कार्यालयों पर हमला किया। खबरों के मुताबिक भीड़ ने कई मंजिलों में तोड़फोड़ की और इमारत के सामने आग लगा दी। इस दौरान इमारत में पत्रकार और अखबार के कर्मचारी अंदर ही फंसे रहे।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया है कि, ‘‘रात लगभग 11 बजे सैकड़ों प्रदर्शनकारी ‘प्रोथोम आलो’ के कार्यालय पहुंचे और बाद में इमारत को घेर लिया।’’ उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने ‘प्रोथोम आलो’ की इमारत में तोड़फोड़ करने के बाद ‘डेली स्टार’ के कार्यालय में आग लगा दी। इस बीच एक अन्य पत्रकार ने बताया है कि बांग्लादेश में किस तरह पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है और सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों को जबरन गिरफ्त में ले लिया जाता है।
पत्रकार ने बताई सच्चाई?
ढाका के एक पत्रकार ने देश में न्यूज18 को बताया कि अगर कोई सरकार की आलोचना करता है, तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है। उन्होंने आगे कहा, "मेरा ऑफिस डेली स्टार के सामने है। यहां सेना को तैनात कर दिया गया है। पुलिस सड़कों पर है। खुलना में एक पत्रकार को लोगों ने गोली मार दी।”
उन्होंने आगे बताया, "बांग्लादेश में पत्रकारों को गिरफ्तार किया जा रहा है। असल में, जिन्होंने जुलाई के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया था उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।" उन्होंने कहा, "अगर आप सरकार की आलोचना करेंगे, तो या तो सरकार आपको निशाना बनाएगी या प्रदर्शनकारी आपको नहीं छोड़ेंगे।"
बांग्लादेश में अशांति
इससे पहले हादी की मौत की खबर सामने आते ही देश में हालात एक बार बेकाबू हो गए। बता दें कि हादी देश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव में उम्मीदवार थे और पिछले सप्ताह ढाका के विजयनगर इलाके में चुनाव प्रचार शुरू करते समय नकाबपोश बंदूकधारियों ने उनके सिर में गोली मार दी थी। गोली मारे जाने के बाद हादी की हालत को ढाका के चिकित्सकों ने बेहद नाजुक बताया था जिसके बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने सोमवार को उन्हें बेहतर इलाज के लिए एयर एंबुलेंस से सिंगापुर भेजा था।
क्या बोले यूनुस?
अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने गुरुवार रात को टेलीविजन पर राष्ट्र के नाम संबोधन में हादी की मौत की पुष्टि की और उनके हत्यारों को पकड़ने के लिए कार्रवाई का वादा भी किया। यूनुस ने बयान में कहा, ‘‘आज मैं आपके समक्ष अत्यंत दुखद समाचार लेकर आया हूं। ‘जुलाई विद्रोह’ के निडर योद्धा और इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी अब हमारे बीच नहीं रहे।’’ यूनुस ने हादी के हत्यारों को पकड़ने के लिए त्वरित कार्रवाई का वादा किया और एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की। उन्होंने इस वारदात में शामिल लोगों को जल्द से जल्द न्याय के कठघरे में लाने का संकल्प लिया और कहा, ‘‘हत्यारों के प्रति कोई नरमी नहीं दिखाई जाएगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं सभी नागरिकों से अपील करता हूं- धैर्य और संयम बनाए रखें।’’
हम युद्ध की स्थिति में हैं…
हादी की मौत की घोषणा के बाद ढाका विश्वविद्यालय परिसर के पास शाहबाग चौराहे पर सैकड़ों छात्र और लोग जमा हो गए और ‘‘तुम कौन हो, मैं कौन हूं- हादी, हादी’’ जैसे नारे लगाए। ‘जातीय छात्र शक्ति’ नामक एक छात्र समूह ने ढाका विश्वविद्यालय परिसर में मातमी जुलूस निकाला और प्रदर्शन में शामिल होने के लिए शाहबाग की ओर मार्च किया। पिछले साल के हिंसक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन’ (एसएडी) के एक बड़े सहयोगी संगठन नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) ने भी छात्रों के साथ आंदोलन में हिस्सा लिया और भारत विरोधी नारे लगाते हुए आरोप लगाया कि हादी पर हमला करने के बाद हमलावर भारत भाग गए। उन्होंने अंतरिम सरकार से मांग की कि जब तक हमलावरों को वापस नहीं लाया जाता, तब तक भारतीय उच्चायोग को बंद रखा जाए।
एनसीपी के एक प्रमुख नेता सरजिस आलम ने कहा, ‘‘जब तक भारत हादी भाई के हत्यारों को वापस नहीं कर देता, तब तक अंतरिम सरकार में बांग्लादेश स्थित भारतीय उच्चायोग बंद रहेगा। अभी नहीं तो कभी नहीं। हम युद्ध में हैं!’’

लेखक के बारे में
Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
और पढ़ेंलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




