
दुबई से भारत का चावल महंगे दाम में खरीद रहा बांग्लादेश, एक्सपर्ट्स बोले- ये तो पैसों की बर्बादी है
बांग्लादेश की मिनिस्ट्री ऑफ फूड के एक प्रपोजल के मुताबिक, एडवाइजरी काउंसिल ऑन गवर्नमेंट प्रोक्योरमेंट ने म्यांमार और दुबई से कुल 100,000 टन चावल खरीदने को मंजूरी दी है।
मोहम्मद यूनुस के बांग्लादेश सरकार का प्रमुख बनने के बाद से ही नई दिल्ली और ढाका के बीच संबंधों में खटास आ गई। इसके बाद भारत ने बांग्लादेश के खिलाफ कई कड़े ऐक्शन लिए। अब बांग्लादेश को महंगे दाम में चावल खरीदना पड़ रहा है। वह अब दुबई के जरिए भारत का ही चावल महंगी कीमत पर लेना पड़ रहा है। बांग्लादेश के फूड डिपार्टमेंट ने भी कन्फर्म किया है कि वह जो चावल दुबई से खरीद रहा है, वह असल में भारतीय ही है। ऐसे में बांग्लादेश के हैरान एक्सपर्ट्स ने भी सवाल खड़े किए हैं कि आखिर में भारत का चावल, भारत के बजाए दुबई से क्यों खरीदा जा रहा। यह तो पैसों की बर्बादी है।

जब पूछा गया कि चावल सीधे भारत से इंपोर्ट क्यों नहीं किया जाता, तो एक अधिकारी ने भारत के साथ ट्रेड डेफिसिट का हवाला देते हुए कहा कि सीधे इंपोर्ट को बायपास करने से इम्बैलेंस को और बिगड़ने से रोकने में मदद मिलती है। बांग्लादेश की मिनिस्ट्री ऑफ फूड के एक प्रपोजल के मुताबिक, एडवाइजरी काउंसिल ऑन गवर्नमेंट प्रोक्योरमेंट ने म्यांमार और दुबई से कुल 100,000 टन चावल खरीदने को मंजूरी दी है। बांग्लादेश की फाइनेंस मिनिस्ट्री ने एक बयान में कहा कि 50,000 टन पारबॉयल्ड चावल म्यांमार से और 50,000 टन नॉन-बासमती पारबॉयल्ड चावल दुबई से आएगा, जिसकी कुल कीमत TK 4,462,380,570 (323 करोड़ रुपये) होगी।
देशकाल न्यूज के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के तहत, बांग्लादेश सरकार ने पैकेज-2 के तहत एक इंटरनेशनल ओपन टेंडर के जरिए 50,000 टन नॉन-बासमती पारबॉयल्ड चावल के इम्पोर्ट को मंजूरी दी है। चावल दुबई में M/s Credent One FZE से USD 355.99 प्रति टन के हिसाब से खरीदा जाएगा, जिसकी कीमत TK 2,169,047,070 होगी। इस बीच, 50,000 टन पारबॉयल्ड चावल म्यांमार से गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट बेसिस पर USD 376.50 प्रति टन के हिसाब से इम्पोर्ट किया जाएगा, जिसकी कीमत TK 2,293,261,500 होगी। दुबई अपना लगभग सारा चावल इंपोर्ट करता है, जिसमें ज्यादातर भारत से आता है। दुबई का जेबेल अली पोर्ट एक बड़ा री-एक्सपोर्ट हब है, जो अफ्रीका और मिडिल ईस्ट के देशों में चावल भेजता है। Credent One FZE जैसी कंपनियां भारतीय बासमती और नॉन-बासमती चावल की बड़ी इंपोर्टर हैं।
अतिरिक्त पैसा खर्च कर रही यूनुस सरकार
वहीं, बांग्लादेश के जानकारों के अनुसार, दुबई के जरिए चावल इंपोर्ट करने पर एक्स्ट्रा खर्च आ रहा है, जो जनता के पैसे की बर्बादी है। दुबई चावल बनाने वाला देश नहीं है, बल्कि वह भारत से चावल इंपोर्ट करके उसे फिर से एक्सपोर्ट करता है। हालांकि भारत से सीधे चावल इंपोर्ट करने का मौका है, लेकिन किसी इंटरमीडियरी कंपनी के जरिए खरीदने के फैसले ने सवाल खड़े कर दिए हैं। खाद्य विभाग में प्रोक्योरमेंट डिवीजन के डायरेक्टर, मोहम्मद मोनिरुज्जमां ने बताया, ‘सप्लायर का ऑफिस दुबई में है। अगर मीडिया में यह रिपोर्ट आती है कि चावल दुबई से आता है, तो हम क्या कह सकते हैं? चावल का सोर्स भारत है।’

लेखक के बारे में
Madan Tiwariलखनऊ के रहने वाले मदन को डिजिटल मीडिया में आठ साल से अधिक का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में यह दूसरी पारी है। राजनीतिक विषयों पर लिखने में अधिक रुचि है। नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स, यूटीलिटी, एजुकेशन समेत विभिन्न बीट्स में काम किया है। लगभग सभी प्रमुख अखबारों के संपादकीय पृष्ठ पर 200 से अधिक आर्टिकल प्रकाशित हो चुके हैं। खाली समय में लॉन टेनिस खेलना पसंद है।
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