क्या खिचड़ी पका रहा बांग्लादेश? भारत में रॉ चीफ से मुलाकात, फिर ISI के पास पहुंचे खुफिया प्रमुख

Apr 04, 2026 02:33 pm ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, ढाका
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बांग्लादेश के खुफिया प्रमुख ने दिल्ली में R&AW और फिर पाकिस्तान में ISI अधिकारियों से मुलाकात की है। जानिए तारिक रहमान सरकार की इस नई 'बैलेंसिंग कूटनीति' और भारत-पाकिस्तान के साथ चल रहे इस रणनीतिक खेल के क्या मायने हैं।

क्या खिचड़ी पका रहा बांग्लादेश? भारत में रॉ चीफ से मुलाकात, फिर ISI के पास पहुंचे खुफिया प्रमुख

बांग्लादेश में प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद से ही वहां की विदेश और रक्षा नीति में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ ढाका नई दिल्ली के साथ अपने संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों के साथ भी अपने रणनीतिक और सैन्य संबंधों को मजबूत कर रहा है। इसकी सबसे ताजा मिसाल है- बांग्लादेशी सेना की मिलिट्री इंटेलिजेंस एजेंसी DGFI के डायरेक्टर जनरल मेजर जनरल मोहम्मद कैसर राशिद चौधरी का बैक-टू-बैक दौरा।

DGFI चीफ का 'सीक्रेट' भारत दौरा

बांग्लादेश की सैन्य खुफिया एजेंसी (DGFI) के नवनियुक्त प्रमुख मेजर जनरल मोहम्मद कैसर राशिद चौधरी ने हाल ही में नई दिल्ली का एक अघोषित दौरा किया था। आधिकारिक तौर पर इसे एक मेडिकल यात्रा बताया गया, लेकिन इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, भारतीय खुफिया एजेंसी (R&AW) के प्रमुख पराग जैन और सैन्य खुफिया महानिदेशक (DGMI) लेफ्टिनेंट जनरल आर.एस. रमन के साथ अहम सुरक्षा वार्ताएं कीं।

पाकिस्तान और ISI से संपर्क

दिल्ली से लौटने के करीब एक महीने बाद, 1-2 अप्रैल के आसपास मेजर जनरल कैसर राशिद चौधरी थाई एयरवेज की फ्लाइट से बैंकॉक होते हुए इस्लामाबाद पहुंच गए। यह दो दिवसीय आधिकारिक दौरा है। उनके साथ अन्य DGFI अधिकारी भी हैं। कार्यक्रम में पाकिस्तान आर्मी के सीनियर अधिकारियों और ISI के काउंटरपार्ट्स से मुलाकात शामिल है। यह कदम स्पष्ट करता है कि ढाका दोनों तरफ अपने सुरक्षा हितों को साध रहा है।

भारतीय सेना के साथ कूटनीतिक तालमेल

जिस वक्त DGFI प्रमुख पाकिस्तान के दौरे पर जाने की तैयारी में थे, उसी दौरान दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग में तैनात शीर्ष अधिकारी भारतीय सेना प्रमुख और शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ कूटनीतिक बैठकें कर रहे थे। हाई कमिश्नर एम रियाज हमीदुल्लाह ने भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी (COAS) से साउथ ब्लॉक में मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय डिफेंस सहयोग, जॉइंट ट्रेनिंग और क्षेत्रीय शांति पर चर्चा की। भारतीय आर्मी ने तस्वीरें भी शेयर कीं।

तुर्की के साथ बढ़ती नजदीकियां

इन सबके बीच, 30 मार्च से 2 अप्रैल तक ढाका में बांग्लादेश-तुर्की के चौथी सेना स्टाफ वार्ता (AST) 2026 सफलतापूर्वक संपन्न हुई। दोनों पक्षों ने डिफेंस सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। यह तुर्की के साथ बांग्लादेश की बढ़ती सैन्य साझेदारी का हिस्सा है। पहले एयर चीफ और आर्मी चीफ के विजिट भी हो चुके हैं। तुर्की रक्षा उपकरणों (विशेषकर ड्रोन्स) का एक बड़ा निर्यातक है और बांग्लादेश अपनी सेना के आधुनिकीकरण के लिए अंकारा को एक अहम भागीदार के रूप में देख रहा है।

आखिर क्या 'खिचड़ी' पका रहा है बांग्लादेश?

तारिक रहमान की सरकार जानती है कि भारत जैसे बड़े और निकटतम पड़ोसी के साथ तनावपूर्ण रिश्ते देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं हैं। R&AW और NSA के साथ बैठकें भारत की चिंताओं विशेषकर पूर्वोत्तर की सुरक्षा को शांत करने का एक प्रयास हैं। लेकिन तुर्की और पाकिस्तान के साथ सैन्य स्तर पर बातचीत का उद्देश्य रक्षा खरीद और खुफिया साझेदारी के लिए किसी एक शक्ति पर अपनी निर्भरता को कम करना माना जा रहा है। पिछली सरकार के पतन के बाद, नई सरकार सेना के भीतर हुए बड़े फेरबदल के बाद उन धड़ों को भी संतुलित करने की कोशिश कर रही है, जो पारंपरिक रूप से पाकिस्तान या अन्य मुस्लिम राष्ट्रों के साथ घनिष्ठ संबंधों के पैरोकार रहे हैं। फिलहाल भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इसे करीबी से मॉनिटर कर रही हैं। खासकर पिछले यूनुस शासन में पाक-चीन-तुर्की डिफेंस एंगेजमेंट बढ़ने की चिंता के बाद यह बैलेंसिंग एक्ट लग रहा है।

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