दूसरा पाकिस्तान बन गया बांग्लादेश, यहीं से अब निकलेंगे आतंकवादी; शेख हसीना के बेटे ने चेताया
शेख हसीना के बेटे वाजेद ने दुनियाभर के देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अभी नहीं रोका गया तो भविष्य में आतंकवादियों का अगला ग्रुप अब बांग्लादेश से ही आएगा।

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वह इस साल दिसंबर में स्वदेश लौट जाएंगी और इसके लिए चाहे उन्हें जेल जाना पड़े या अपनी जान गंवानी पड़े, वह पीछे नहीं हटेंगी। हसीना भारत में निर्वासन में रहने के दो वर्ष बाद विदेशी मीडिया के पत्रकारों से वर्चुअल माध्यम से बातचीत कर रही थीं। हसीना के अलावा, उनके बेटे सजीब वाजेद ने दावा किया कि बांग्लादेश एक फेल देश बन गया है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश अब भारत के लिए एक और पाकिस्तान बन गया है और अगर नहीं रोका गया तो अब आतंकवादी वहीं से आएंगे।
नई दिल्ली में साउथ एशिया के फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब को संबोधित करते हुए, वाजेद ने बांग्लादेश को वर्तमान समय में नाकाम देश बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में कोई ह्यूमन राइट्स और बोलने की आजादी नहीं है। वाजेद ने दावा किया कि बांग्लादेश भारत की पूर्वी सीमा पर एक और पाकिस्तान बन गया है। उन्होंने कहा, “भारत को सबसे ज्यादा चिंता इस बात की होनी चाहिए कि बांग्लादेश भारत की पूर्वी सीमा पर एक और पाकिस्तान बन गया है।” वाजेद ने दुनियाभर के देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अभी नहीं रोका गया तो भविष्य में आतंकवादियों का अगला ग्रुप अब बांग्लादेश से ही आएगा।
वहीं, शेख हसीना ने निर्वासन में रहते हुए मीडिया से पहली बातचीत में कहा, "मैं हमेशा भारत में नहीं रह सकतीं और एक दिन मुझे अपने लोगों के बीच लौटना ही होगा। बांग्लादेश की जनता सुरक्षा, विकास और लोकतंत्र की हकदार है तथा देश को विकास, शांति और धर्मनिरपेक्षता के मार्ग पर वापस लाना आवश्यक है।" उन्होंने कहा कि वह दिसंबर में स्वदेश लौटना चाहती हैं, हालांकि वह वापसी की तारीख की घोषणा उचित समय पर करेंगी। सन् 1971 में बांग्लादेश की आजादी के बाद से दिसंबर को बांग्लादेश का 'विजय का महीना' कहा जाता है।
हसीना ने कहा कि उन्हें पता है कि स्वदेश लौटने पर वर्तमान सरकार उन्हें गिरफ्तार करने या रोकने की कोशिश करेगी, लेकिन वह भय के कारण अपना फैसला नहीं बदलेंगी। उन्होंने कहा, "मैं लौटूंगी, चाहे मुझे जेल में डाल दिया जाए या मेरी हत्या कर दी जाए।" हसीना ने वर्तमान बांग्लादेश सरकार से अवामी लीग पर लगाया गया प्रतिबंध हटाने, राजनीतिक बंदियों को रिहा करने और देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बहाल करने की मांग की।
'छात्रों का इस्तेमाल सत्ता परिवर्तन के लिए किया गया'
उन्होंने 2024 के छात्र आंदोलन को शांतिपूर्ण आंदोलन मानने से इनकार करते हुए आरोप लगाया कि छात्रों का इस्तेमाल सत्ता परिवर्तन के लिए किया गया। उनके अनुसार आंदोलन का कोई स्पष्ट नेतृत्व नहीं था और विभिन्न संगठनों ने इसका उपयोग हिंसा और अराजकता फैलाने के लिए किया। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान करीब 460 पुलिस थानों पर हमले किए गए, उन्हें आग के हवाले किया गया और कई पुलिसकर्मियों को जिंदा जला दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालयों और पुलिस थानों पर हमलों को रोकना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी थी और ऐसा करना कोई अपराध नहीं था।
'बांग्लादेश के दोस्तों को देश में लोकतंत्र का समर्थन करना चाहिए'
इस बीच, बांग्लादेश के पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी नौफुल ने कहा कि बांग्लादेश के दोस्तों को देश में लोकतंत्र का समर्थन करना चाहिए, न कि धार्मिक चरमपंथियों का। अमेरिका में रह रहे हसीना के बेटे साजीब वाजेद ने यूनुस प्रशासन और मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने पुलिसकर्मियों की हत्या करने वालों सहित प्रदर्शनकारियों को छूट दी। वाजेद ने बांग्लादेश को असफल देश बताया और कहा कि वहां मानवाधिकार एवं अभिव्यक्ति की आजादी खत्म हो गई है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की गिरफ्तारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया समुदाय को चिंता होनी चाहिए।
लेखक के बारे में
Madan Tiwariलखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं और मीडिया में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है।
परिचय, अनुभव एवं शिक्षा
वर्तमान में मदन हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। कुल एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।
यूपी-बिहार की पॉलिटिक्स से लेकर राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक खबरों को कवर करने का लंबा अनुभव है। पॉलिटिकल न्यूज में ज्यादा रुचि है और पिछले एक दशक में देशभर में हुए विभिन्न विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा चुनावों को भी कवर किया है। लाइव हिन्दुस्तान के लिए मदन देश-विदेश में रोजाना घटित होने वाली खबरों के साथ-साथ पॉलिटिकल खबरों का एनालिसिस, विभिन्न अहम विषयों पर एक्सप्लेनर, ब्रेकिंग न्यूज, वायरल न्यूज आदि कवर करते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर से लेकर मिडिल ईस्ट में असली वॉर तक की इंटरनेशनल खबरों पर लिखते-पढ़ते रहते हैं। पिछले एक दशक में पत्रकारिता क्षेत्र में कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
मीडिया में अवॉर्ड्स.
मदन ने लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर, मंथली अवॉर्ड्स, पॉपुलर च्वॉइस, एचटी स्टार अवॉर्ड्स समेत एक दर्जन से ज्यादा पुरस्कार जीते हैं।
विशेषज्ञता
देश-विदेश की राजनीति पर गहरी पकड़
यूपी-बिहार समेत सभी राज्यों की खबरों को कवर करने का व्यापक अनुभव
विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव, संसद की कार्यवाही को लंबे समय से कवर किया
ब्रेकिंग न्यूज, वायरल न्यूज, एनालिसिस स्टोरीज, एशिया, मिडिल ईस्ट, पश्चिमी देशों की खबरों को कवर करने का एक दशक से ज्यादा का एक्सपीरियंस
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


