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बांग्लादेश में महिला नेताओं को ऐसा हाल, आम चुनाव के लिए उम्मीदवारों में महज 4% हिस्सेदारी

बांग्लादेश में महिला नेताओं को ऐसा हाल, आम चुनाव के लिए उम्मीदवारों में महज 4% हिस्सेदारी

संक्षेप:

आगामी चुनाव के लिए सिर्फ 110 महिला उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। यह कुल अभ्यर्थियों की तुलना में बेहद कम है और साफ संकेत देता है कि राजनीतिक दल अब भी महिलाओं को टिकट देने में हिचकिचा रहे हैं।

Jan 02, 2026 12:44 pm ISTNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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बांग्लादेश में फरवरी में संसदीय चुनाव होना है, जिसके लिए महिला प्रतिनिधित्व बेहद कम नजर आ रहा है। इसे लेकर राजनीति में लैंगिक असमानता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुल उम्मीदवारों में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 4% के आसपास है, जबकि देश की आबादी में महिलाओं की भागीदारी लगभग आधी है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब बांग्लादेश लंबे समय तक महिला प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में रहा है। इसके बावजूद, संसद में सीधे चुनाव लड़ने वाली महिला उम्मीदवारों की संख्या चिंता का विषय बनी हुई है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, आगामी चुनाव के लिए सिर्फ 110 महिला उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। यह कुल अभ्यर्थियों की तुलना में बेहद कम है और स्पष्ट संकेत देता है कि राजनीतिक दल अब भी महिलाओं को टिकट देने में हिचकिचा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि राजनीतिक पूंजी की कमी, धन-संपत्ति और मसल पावर पर आधारित चुनावी संस्कृति महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में बड़ी बाधा हैं। कई मामलों में देखा गया है कि जो महिलाएं चुनावी राजनीति में आगे आती भी हैं, वे अक्सर किसी प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से जुड़ी होती हैं। जमीनी स्तर पर सक्रिय, स्वतंत्र और साधारण पृष्ठभूमि वाली महिलाओं को अवसर बहुत सीमित मिलता है।

आखिर क्या आ रही दिक्कत

राजनीतिक विश्लेषकों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि दलों के भीतर महिलाओं के लिए अनुकूल माहौल नहीं बन पाने के कारण वे नेतृत्व के स्तर तक पहुंचने से वंचित रह जाती हैं। चुनाव आयोग ने दलों को निर्देश दिया है कि वे अपने संगठनों में कम से कम एक-तिहाई नेतृत्व पद महिलाओं को दें। लेकिन, अधिकांश प्रमुख दल इस लक्ष्य से अब भी काफी दूर हैं जिससे टिकट बंटवारे में भी पुरुष वर्चस्व बना हुआ है। जानकारों के अनुसार, अगर पार्टियां सचमुच महिलाओं को नेतृत्व में पर्याप्त स्थान दें और सुरक्षित व समान अवसर वाला माहौल बनाएं, तो भविष्य के चुनावों में महिला उम्मीदवारों की संख्या बढ़ सकती है।

Niteesh Kumar

लेखक के बारे में

Niteesh Kumar
नीतीश 7 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024 की कवरेज कर चुके हैं। पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से ग्रैजुएशन किया। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। और पढ़ें

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