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शेख हसीना की वजह से गई खालिदा जिया की जान, BNP ने लगा दिया बहुत बड़ा इल्जाम

शेख हसीना की वजह से गई खालिदा जिया की जान, BNP ने लगा दिया बहुत बड़ा इल्जाम

संक्षेप:

बंगलादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और 3 दशकों से अधिक समय तक देश की राजनीति में एक प्रभावशाली व्यक्तित्व रहीं बेगम खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को निधन हो गया था। बुधवार को ढाका में उनका अंतिम संस्कार हुआ।

Jan 01, 2026 10:25 am ISTJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के निधन के बाद अब उनकी पार्टी BNP ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर बहुत बड़ा इल्जाम लगा दिया है। बीएनपी ने बुधवार को आरोप लगाते हुए कहा है कि शेख हसीना को पार्टी चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया की मौत की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि लंबी बीमारी के बाद 80 वर्षीय खालिदा जिया का मंगलवार को निधन हो गया था।

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ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक बीएनपी स्थायी समिति के सदस्य नजरुल इस्लाम खान ने जातीय संसद भवन के साउथ प्लाजा में खालिदा जिया के अंतिम संस्कार से पहले उन्हें याद करते हुए शेख हसीना पर इस तरह के आरोप लगाए। नजरुल लंबे समय से खालिदा जिया के राजनीतिक सहयोगी रहे थे। अंतिम संस्कार से पहले उन्होंने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस, बांग्लादेशी सशस्त्र बलों के प्रमुख और कई राजनीतिक दलों के नेता के सामने पार्टी की ओर से एक लिखित बयान पढ़ा।

क्या बोले नजरुल इस्लाम?

इस बयान में नजरुल इस्लाम खान ने कहा कि खालिदा जिया को 8 फरवरी, 2018 से दो साल से ज्यादा समय तक एक झूठे मामले में जेल में रखा गया था और इस दौरान सही इलाज ना मिलने के कारण उनकी सेहत बहुत ज्यादा खराब हो गई। उन्होंने कहा, "पूरे देश ने देखा कि जो नेता खुद चलकर जेल गई थीं, वह एकांत कारावास से गंभीर रूप से बीमार होकर निकलीं।" नजरुल ने आगे कहा कि डॉक्टरों ने बताया कि अगले चार सालों की नजरबंदी के दौरान उनकी हालत और खराब हो गई क्योंकि उन्हें विदेश में इलाज कराने की इजाजत नहीं दी गई। उन्होंने कहा, "इसका नतीजा तब हुआ कि इस महान नेता की आखिरकार मौत हो गई। इसलिए, फासीवादी हसीना को इस मौत की ज़िम्मेदारी से कभी भी मुक्त नहीं किया जा सकता।"

पांच हफ्तों से बीमार थीं जिया

इससे पहले बंगलादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और तीन दशकों से अधिक समय तक देश की राजनीति में एक प्रभावशाली व्यक्तित्व रहीं बेगम खालिदा जिया का बुधवार को अंतिम संस्कार किया गया। जिया का जन्म 1945 में भारत के वर्तमान पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में हुआ था। वह लंबे समय से हृदय और फेफड़ों के गंभीर संक्रमण से जूझ रही थीं। उन्होंने ढाका के एवरकेयर अस्पताल में सुबह छह बजे अंतिम सांस ली, जहां पिछले पांच हफ्तों से उनका इलाज चल रहा था।

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बेगम जिया 1991 से 1996 तक और फिर 2001 से 2006 तक देश की प्रधानमंत्री रहीं। वह इस पद को संभालने वाली देश की पहली महिला थीं। उनके पति जनरल जिया उर रहमान एक स्वतंत्रता सेनानी और देश के पूर्व सैन्य शासक थे। राजनीति विश्लेषकों का मानना है कि बेगम जिया का निधन एक युग के अंत का प्रतीक है। उनके निधन से उनकी पार्टी बीएनपी को मतदाताओं की सहानुभूति का चुनावों में लाभ मिल सकता है।

Jagriti Kumari

लेखक के बारे में

Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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