ट्रंप-ईरान बातचीत पटरी से उतारने की कोशिश... नेतन्याहू की 'खतरनाक चाल' का हो गया खुलासा?
इजरायल ने कथित तौर पर सीआईए को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की ईरान की नकली साजिश के बारे में खुफिया जानकारी दी थी। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस चेतावनी का उद्देश्य वाशिंगटन की ईरान नीति को प्रभावित करना और तुर्की के साथ ट्रंप के बढ़ते संबंधों को नुकसान पहुंचाना था।

वॉशिंगटन पोस्ट की ताजा रिपोर्ट में चौंकाने वाला बड़ा खुलासा हुआ है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार ने कथित तौर पर सीआईए को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की ईरान की नकली साजिश के बारे में झूठी खुफिया जानकारी दी थी। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस 'खतरनाक चाल' का मकसद ट्रंप-ईरान वार्ता को पटरी से उतारना, वाशिंगटन की ईरान नीति को प्रभावित करना और तुर्की के साथ ट्रंप के बढ़ते संबंधों को नुकसान पहुंचाना था। रिपोर्ट के अनुसार, सीआईए के एक्सपर्ट्स को यह खुफिया जानकारी विश्वसनीय नहीं लगी और उन्होंने ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों को अपने संदेह से अवगत कराया है। वहीं, एक अमेरिकी अधिकारी ने इस रिपोर्ट को 'इजरायल से प्राप्त, अमेरिका से नहीं और कम भरोसेमंद' बताया है।
इजरायली खुफिया पर सवाल
वहीं, कुछ अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि इजरायल की चेतावनी महज जानकारी देने के बजाय ट्रंप के फैसलों और क्षेत्र में अमेरिकी नीति को प्रभावित करने के लिए थी। एक पूर्व अधिकारी ने इसे इजरायली खुफिया रिपोर्टिंग के 'बड़े पैटर्न' का हिस्सा बताया, जिसमें राष्ट्रपति के निर्णयों को प्रभावित करने की कोशिश भी शामिल रही है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इजरायल ट्रंप को ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई के लिए प्रेरित करना चाहता था।
दूसरी ओर तुर्की अधिकारी भी मानते हैं कि यह रिपोर्ट ईरान के साथ ट्रंप की वार्ता को पटरी से उतारने और तुर्की की एफ-35 लड़ाकू विमान खरीद में रुकावट डालने के उद्देश्य से तैयार की गई थी। बता दें कि इजरायल ईरान को अपना सबसे बड़ा खतरा मानता है। साथ ही वह तुर्की को मध्यम से दीर्घकालिक खतरा मानता है और वाशिंगटन-अंकारा के बढ़ते संबंधों को लेकर चिंतित है, जो ट्रंप और तुर्की राष्ट्रपति रेसेप तय्यिप एर्दोगन के निजी संबंधों से और मजबूत हुए हैं।
क्या है वाइट हाउस का रुख
इजरायली खुफिया पर संदेह के बावजूद एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अंकारा में सिक्रेट सर्विस का अभियान सावधानी के तौर पर चलाया गया। अधिकारी ने कहा कि सिक्रेट सर्विस इस राष्ट्रपति के साथ तीन बार बाल-बाल बची है, इसलिए वे कोई जोखिम नहीं ले रहे। उन्होंने वही किया जो आवश्यक था। हालांकि वाइट हाउस ने खुफिया जानकारी या अमेरिकी अधिकारियों द्वारा उसके आकलन पर सीधे कुछ नहीं कहा है। एक अधिकारी ने कहा कि ट्रंप को ईरान सहित कई जगहों से जान का खतरा है और उनकी सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि वॉल स्ट्रीट जर्नल ने पिछले महीने सबसे पहले रिपोर्ट किया था कि इजरायल ने ईरानी खतरे के बारे में अमेरिकी सरकार के साथ खुफिया जानकारी साझा की है। सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो को भी इजरायली खुफिया और सिक्रेट सर्विस की योजना के बारे में जानकारी दी गई थी। एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने नाटो शिखर सम्मेलन में शामिल हजारों तुर्की सुरक्षा कर्मियों का हवाला देते हुए खतरे की गंभीरता पर सवाल उठाया।
वहीं, डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस अभियान पर अधिक स्पष्टता की मांग की है। सीनेटर क्रिस वैन हॉलन ने सवाल किया कि क्या इजरायल की दी गई खुफिया जानकारी विश्वसनीय और स्वतंत्र रूप से सत्यापित की जा सकती थी। उन्होंने कहा कि ईरान ट्रंप को मारना चाहेगा, लेकिन यह सब थोड़ा काल्पनिक लगता है।
ट्रंप के तुर्की दौरे पर क्या हुआ था?
बता दें कि यह धमकी ट्रंप के 8 जुलाई के तुर्की दौरे के दौरान दी गई बताई जाती है। इसके बाद अमेरिकी सिक्रेट सर्विस ने बड़े पैमाने पर सुरक्षा अभियान शुरू कर दिया। कतर से गिफ्ट में मिले नए 747-8 विमान की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई गई थी। ट्रंप शुरू में अंकारा में पुराने एयर फोर्स वन में सवार हुए। बाद में वे चुपके से विमान से निकलकर एयरपोर्ट केटरिंग ट्रक के जरिए एयर फोर्स के सी-32ए विमान में पहुंचे। इसी विमान से ट्रंप और उनके कुछ सहयोगी ब्रिटेन गए।
अमेरिकी अधिकारियों और वॉशिंगटन पोस्ट द्वारा समीक्षित सामग्री के अनुसार, विमान को एफ-16 लड़ाकू विमानों के साथ मिल्डेनहॉल एयर बेस तक ले जाया गया। ट्रंप ने बाद में कहा कि दूसरे विमान का इस्तेमाल सिक्रेट सर्विस का फैसला था। उन्होंने कहा कि यह असल में सिक्रेट सर्विस पर निर्भर करता है। मैं वही करता हूं जो उन्हें पसंद है। वे चाहते थे कि मैं अलग उड़ान और अलग विमान में जाऊं, समान सुरक्षा के साथ। मैं वही करता हूं जो वे कहते हैं।


