अजरबैजान के खिलाफ भारतीय हथियार बनेंगे आर्मेनिया की ढाल, लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी
भारत के लिए यह सौदा हाल के वर्षों में सबसे बड़ी रक्षा-निर्यात उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। इससे भारत की दक्षिण कॉकस क्षेत्र में रणनीतिक उपस्थिति और प्रभाव भी मजबूत होगा।
भारत और आर्मेनिया के बीच एक बड़ा रक्षा सौदा अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इसके तहत आर्मेनिया हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित Su-30MKI मल्टीरोल फाइटर जेट्स खरीदेगा। इस समझौते की अनुमानित कीमत 2.5 से 3 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 25,000 करोड़ रुपये) के बीच बताई जा रही है।

आर्मेनियाई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस सौदे के तहत पहला बैच 8 से 12 विमानों का होगा, जिसकी डिलीवरी 2027 से शुरू होकर 2029 तक पूरी होने की संभावना है। यह सौदा आर्मेनिया के लिए अपने रक्षा साझेदारों को विविध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि अब तक वह रूस पर अत्यधिक निर्भर रहा है।
रूस से दूरी, भारत की ओर झुकाव
आर्मेनिया ने वर्ष 2019 में रूस से चार Su-30SM लड़ाकू विमान खरीदे थे, लेकिन रूसी हथियारों और तकनीकी समर्थन की कमी के कारण वे सीमित सेवा में ही रह पाए। ऐसे में भारत के साथ यह नया सौदा आर्मेनिया के लिए आधुनिक और आत्मनिर्भर हवाई शक्ति हासिल करने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है।
भारत से होने वाला यह सौदा केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है। इससे पहले भी आर्मेनिया ने भारत से कई एडवांस हथियार प्रणालियां खरीदी हैं- जिनमें पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम, स्वाथी काउंटर-बैटरी रडार और ATAGS 155mm हॉवित्जर तोपें शामिल हैं।
भारतीय संस्करण में आर्मेनियाई अपग्रेड
Su-30MKI एक भारी, दो-इंजन वाला मल्टीरोल फाइटर है, जिसे भारत और रूस ने संयुक्त रूप से विकसित किया था। आर्मेनिया के लिए इसके भारतीय संस्करण में कई स्वदेशी अपग्रेड शामिल होंगे, जैसे-
- उत्तम AESA रडार,
- अस्त्र MK-1 और MK-2 बीवीआर मिसाइलें,
- और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम।
इन सुधारों से आर्मेनिया को बेहतर हवाई युद्ध क्षमता, लंबी दूरी की मारक क्षमता और बेहतर स्थिति-जागरूकता हासिल होगी। माना जा रहा है कि यह कदम आर्मेनिया को अपने कट्टर दुश्मन अजरबैजान के टक्कर देने में मदद करेगा। अजरबैजान ने हाल ही में पाकिस्तान निर्मित चीन के JF-17C Block-III फाइटर जेट्स की खरीद को आगे बढ़ाया है।
भारत के लिए रणनीतिक सफलता
भारत के लिए यह सौदा हाल के वर्षों में सबसे बड़ी रक्षा-निर्यात उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। इससे भारत की दक्षिण कॉकस क्षेत्र में रणनीतिक उपस्थिति और प्रभाव भी मजबूत होगा। भारत और आर्मेनिया के बीच रक्षा सहयोग का यह विस्तार 2022 में हुए 720 मिलियन डॉलर के आकाश-1S सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम सौदे से शुरू हुआ था।
आर्मेनिया इस प्रणाली का पहला विदेशी खरीदार बना। नवंबर 2024 में भारत ने इसका पहला बैच आर्मेनिया को सौंपा, जबकि दूसरा बैच 2025 के मध्य तक भेजे जाने की योजना है। इसके अलावा, भारत ने पहले ही आर्मेनिया को पिनाका रॉकेट सिस्टम भी सौंप दिए हैं, जिससे उसकी दीर्घ दूरी की तोपखाना क्षमताएं बढ़ी हैं।
रणनीतिक महत्व
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए यह केवल एक निर्यात सौदा नहीं, बल्कि रक्षा कूटनीति के माध्यम से वैश्विक प्रभाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। वहीं, आर्मेनिया के लिए यह सौदा रूसी रक्षा सप्लाई चैन पर निर्भरता कम करने और आधुनिक पश्चिमी व भारतीय तकनीक तक पहुंच बनाने का अवसर प्रदान करता है। यदि यह सौदा तय समय पर औपचारिक रूप से साइन होता है, तो यह सोवियत संघ के पतन के बाद से आर्मेनिया की सबसे बड़ी वायुसेना आधुनिकीकरण पहल मानी जाएगी और भारत की "मेक इन इंडिया, डिफेंस एक्सपोर्ट" नीति के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।

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