
बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या, ऑटो ड्राइवर को पीट-पीटकर मार डाला
बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार का सिलसिला थम ही नहीं रहा है। यहां चटगांव में एक 28 साल के हिंदू ऑटो चालक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। बीते कुछ ही दिनों में कम से कम आधा दर्जन हिंदुओं की हत्या कर दी गई है।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार का सिलसिला थम ही नहीं रहा है। यहां चटगांव में एक 28 साल के हिंदू ऑटो चालक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। बीते कुछ ही दिनों में कम से कम आधा दर्जन हिंदुओं की हत्या कर दी गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दगानभुइयां समीर दास नाम के युवक पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया। हमलावरों ने उसकी बुरी तरह पिटाई की और फिर चाकू से हमला कर दिया। समीर की मौत के बाद आरोपी उसका सीएनजी रिक्शा लेकर भी भाग गए।
समीर के परिवार का कहना है कि बीते कुछ दिनों से कट्टरपंथी गुटों के कुछ लोग उसे धमका रहे थे। वे समीर से पैसे ऐंठना चाहते थे। समीर दास की मौत के बाद उनके पिता कार्तिक कुमार दास और रीना रानी दास का बुरा हाल है। समीर उनका सबसे बड़ा बेटा था। स्थानीय मीडिया का कहना है कि आरोपियों का संबंध बीएनपी-जमात ग्रुप से है। पुलिस का कहना है कि यह सोच-समझकर की गई हत्या है। आरोपियों ने पहले ही समीर दास की हत्या का प्लान बना लिया था।
समीर के परिवार का कहना है कि वह रिक्शा चलाकर पूरे परिवार का पेट पालता था। उनका कहना है कि वह जल्दी किसी से झगड़ता नहीं था। हालांकि बीते कुछ दिनों से उसके पास धमकीभरे फोन आते थे और पैसे की मांग की जाती थी।
बीते कुछ ही दिनों में 6 से ज्यादा हिंदुओं की हत्या
बता दें कि बीते कुछ ही दिनों में 6 से ज्यादा हिंदुओं की बेरहमी से हत्या कर दी गई है। 5 जनवरी की रात को चोरसिंदूर बाजार में किराना की दुकान चलाने वाले मोनी चक्रवर्ती की बदमाशों ने हत्या कर दी थी। वह एक प्रतिष्ठित व्यापारी थे। इससे पहले पत्रकार राणा प्रताप बैरागी को गोली मार दी गई थी। इस लिस्ट में दीपू चंद्र दास, अमृत मंडल, बृजेंद्र विश्वास और खोकोन दास का नाम शामिल है।
दीपू चंद्र दास पर ईशनिंदा के झूठे आरोप लगाए गए और फिर भीड़ ने बेरहमी की सारी हदें पार कर दीं। भीड़ ने उनकी पिटाई की और फिर पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया। इसके बाद उनके शव को पेड़ से लटका दिया गया। बांग्लादेश के हालात इतने बिगड़ गए हैं कि हिंदुओं का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। वहीं यूसुफ की अंतरिम सरकार कान में उंगली डाले केवल मुंह से सफाई देती नजर आती है।

लेखक के बारे में
Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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