फिर होगी ईरान-इजरायल में जंग? नेतन्याहू दिख रहे बेकरार पर ट्रंप को सता रहा बड़ा डर, दोस्ती दो फाड़

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि एक तरफ इजरायल जहां ईरान संग तनाव बढ़ाने के संकेत दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका इस तनाव से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ रहा है।

Israel Attack Iran
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात करते हुए।

मध्य-पूर्व में हाल में लंबे समय से थमी जंग एक बार फिर शुरू हो सकती है। इज़रायली मीडिया के अनुसार, इज़रायल की नेतन्याहू सरकार ईरान पर एक और हमला करने की तैयारी कर रही है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका प्रशासन वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव का कूटनीतिक समाधान खोजने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इज़रायल के ऊर्जा मंत्री एली कोहेन ने कहा है कि तेल अवीव अमेरिका और ईरान के बीच हुए किसी भी समझौते से बंधा हुआ महसूस नहीं करेगा और ईरान पर हमले करेगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायल अब ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की प्लानिंग कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पारंपरिक सैन्य विकल्पों के खत्म होने और कूटनीतिक प्रयासों के विफल होने के संकेतों के बीच, अब इज़रायल और ईरान दोनों ही देश एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। बता दें कि ईरान पहले ही खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस सुविधाओं पर हमला करने की अपनी क्षमता दिखा चुका है।

इजरायली ऊर्जा ठिकानों के लिए चिंता

इससे यह चिंता भी बढ़ गई है कि इजरायल का कोई भी एकतरफा हमला ईरान की ओर से व्यापक जवाबी कार्रवाई को भड़का सकता है, जिसमें पूरे क्षेत्र में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जा सकता है। ऐसे में अगर दोनों देशों के बीच फिर से जंग शुरू हुई तो इज़रायल की ऊर्जा संपत्तियां भी ईरान के सीधे हमलों की चपेट में आ सकती हैं, जिससे किसी भी नए संघर्ष का असर सैन्य लक्ष्यों से कहीं आगे तक फैल सकता है।

अमेरिका बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ रहा

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि एक तरफ इजरायल जहां ईरान संग तनाव बढ़ाने के संकेत दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका इस तनाव से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ रहा है। इसलिए, मिसाइलों के नए दौर से ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर टकराव के केंद्र में आ सकता है, और हमले सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर महत्वपूर्ण ऊर्जा सुविधाओं तक फैल सकते हैं। तनाव में ऐसी बढ़ोतरी क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति को बाधित कर सकती है और वैश्विक तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी का दबाव बना सकती है, जिससे इस संघर्ष में एक आर्थिक पहलू भी जुड़ जाएगा।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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