ईरान जंग के बीच खाड़ी देशों में तैनात सैनिकों से गुपचुप मिलने क्यों पहुंचे US रक्षा मंत्री; अटकलें तेज

Pramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, वॉशिंगटन
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हेगसेथ के अनुसार, सैनिकों के बीच और अधिक आक्रामक कार्रवाई के लिए भी ज़ोर बढ़ रहा है; सैनिक ईरान के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए बड़े बम और हथियार मांग रहे हैं।

ईरान जंग के बीच खाड़ी देशों में तैनात सैनिकों से गुपचुप मिलने क्यों पहुंचे US रक्षा मंत्री; अटकलें तेज

ईरान युद्ध का आज 32वां दिन है। इस बीच खबरें आ रही हैं कि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने खाड़ी क्षेत्रों में तैनात अमेरिकी सैनिकों से वहां जाकर गुपचुप मुलाकात की है। इस दौरान उन्होंने संकेत दिया कि युद्ध निर्णायक मोड़ पर है, लेकिन लंबा खिंचने की संभावना भी बनी हुई है। सैनिकों से मिलने के बाद हेगसेथ ने सोशल मीडिया एक्स पर फोटो समेत एक पोस्ट डाला है, जिसमें उन्होंने कहा है कि मध्य पूर्व में लड़ रहे अमेरिकी सैनिक अपनी "विरासत" पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और एक लंबे युद्ध के लिए तैयार हैं। हेगसेथ ने शनिवार को गुप्त दौरे पर इन सैनिकों से गुपचुप मुलाकात की थी।

जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हेगसेथ ने कहा, "सप्ताहांत में, मुझे 'ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी' में लड़ रहे अपने सैनिकों से मिलने का अवसर मिला। शनिवार को हम लगभग आधे दिन तक CENTCOM में जमीन पर मौजूद थे।" उन्होंने कहा, “ये सैनिक अपने बच्चों और पोते-पोतियों के लिए इस लड़ाई को खत्म करना चाहते हैं। यह इतिहास की बात है, यह विरासत की बात है।”

सैनिकों में आक्रामक रुख

रक्षा मंत्री के अनुसार, कई सैनिक और अधिक आक्रामक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा बड़े और शक्तिशाली हथियारों के इस्तेमाल की मांग भी बढ़ रही है। हालांकि उन्होंने सुरक्षा कारणों से यह नहीं बताया कि उन्होंने किन ठिकानों का दौरा किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका ग्राउंड फोर्स (जमीनी सेना) उतार सकता है, तो उन्होंने सीधे जवाब से बचते हुए कहा, “युद्ध में अपनी रणनीति पहले से नहीं बताई जाती।” यानी, अमेरिका ने सभी विकल्प खुले रखे हुए हैं।

“ईरान के पास सैन्य विकल्प सीमित”

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने दावा किया कि ईरान के पास अब सैन्य विकल्प बहुत कम बचे हैं और आने वाले दिन निर्णायक साबित हो सकते हैं। बड़ी बात यह है कि सैन्य कार्रवाई जारी रहने के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन शांति वार्ता की प्रक्रिया पर भी आगे बढ़ रहा है। इस दौरान ट्रंप ने नई चेतावनी जारी की है और कहा है कि अगर जल्द युद्धविराम नहीं हुआ और होर्मुज स्ट्रेट नहीं खुला तो अमेरिका हमले और तेज कर सकता है, जिसमें खार्ग द्वीप (तेल निर्यात केंद्र) और डिसैलिनेशन (जल शुद्धिकरण) प्लांट्स पर हमले शामिल हो सकते हैं। बहरहाल, हेगसेथ के गुपचुप दौरे और सैनिकों से मुलाकात के बाद अटकलें तेज हैं कि अमेरिका मिडिल-ईस्ट में अब क्या नया करने जा रहा है?

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लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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