जंग की मार, मां गंभीर रूप से बीमार; दुबई में फंसा इंडियन कपल लगा रहा है गुहार
मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के चलते हालात काफी खराब हैं। तेल और अर्थव्यवस्था पर तो इसका असर पड़ ही रहा है। इस बीच बीमारी से जूझ रहे कुछ लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला तिलककुमार जलाटू अनिरुद्धराज और उनकी पत्नी शामिनी रमेश के साथ।

मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के चलते हालात काफी खराब हैं। तेल और अर्थव्यवस्था पर तो इसका असर पड़ ही रहा है। इस बीच बीमारी से जूझ रहे कुछ लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला तिलककुमार जलाटू अनिरुद्धराज और उनकी पत्नी शामिनी रमेश के साथ। तिलककुमार और शामिनी आठ साल पहले बेहतर जीवन के लिए तमिलनाडु से दुबई पहुंचे थे। लेकिन आज यह दोनों तिलक की मां का जीवन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। तिलककुमार की मांग पिछले 40 दिन से आईसीयू में हैं। जानकारी के मुताबिक वह दुबई घूमने के उद्देश्य से गई थीं। लेकिन अचानक एक खतरनाक बैक्टीरियल इंफेक्शन की शिकार हो गईं।
वेंटिलेटर पर जूझ रही हैं मां
तिलककुमार ने कहाकि अब मेरी मां वेंटिलेटर पर जूझ रही हैं। एनडीटीवी के मुताबिक तिलक ने कहाकि डॉक्टरों ने कहा है कि अभी कम से कम दो महीने तक उन्हें वेंटिलेटर पर ही रहना होगा। तिलक की मां एक सिंगल पैरेंट हैं और अपने बेटे को पालने में उन्होंने काफी तकलीफों का सामना किया। अब जो हालात हैं, उनमें तिलक खुद को काफी असहाय महसूस कर रहा है। मां अस्पताल के बेड पर हैं और बिल तेजी से बढ़ता जा रहा है। तिलक के मुताबिक तीन लाख रुपए हर दिन को केवल हॉस्पिटल का चार्ज है। इसमें स्कैन और स्पेशल ट्रीटमेंट में लगने वाली रकम शामिल ही नहीं है। यह कुल रकम मिलाकर 4 लाख रुपए प्रतिदिन हो जाती है। अभी तक कुल बिल 1.25 करोड़ रुपए हो चुका है जो एक सैलरी वाले व्यक्ति के लिए काफी मुश्किल रकम है।
भारत आना ही एकमात्र चारा
इन हालात में तिलक और उनकी पत्नी ने भारत आने का फैसला किया था। यहां पर लंबा इलाज काफी अफोर्डेबल है। डॉक्टरों ने भी उनके लिए कॉमर्शियल मेडिकल एस्कॉर्ट फ्लाइट से जाने के लिए इजाजत दे दी थी। चार मार्च को आने वाली इस फ्लाइट का किराया 7 लाख रुपए था। लेकिन यु्द्ध बढ़ने के साथ फ्लाइट रद्द हो गई। अब उनके पास एकमात्र चारा प्राइवेट एयर एंबुलेंस है। लेकिन बढ़ते संघर्ष के चलते एयर एंबुलेंस की फ्लाइट का किराया 50 लाख रुपए तक पहुंच चुका है। तिलककुमार ने कहाकि हम कामकाजी लोग हैं। इतना पैसा जुटा पाना हमारे बूते की बात नहीं है। घर पहुंचने के लिए हमें तत्काल 50 लाख रुपए की जरूरत है।
हर तरह से मुश्किल
इसके अलावा डिस्चार्ज के समय उन्हें अस्पताल से कुछ डिस्काउंट मिलने की उम्मीद है। हालांकि इस डिस्काउंट के बावजूद उन्हें 10 से 15 लाख रुपए चुकाने होंगे। इसके लिए तिलक और उनकी पत्नी दुबई में कुछ चैरिटी की आशा में हैं। तिलक की पत्नी शामिनी ने कहाकि अगर पैसे मिल भी जाएं तो वर्तमान हालात में एयर एंबुलेंस के लिए स्लॉट बुक करना भी बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने कहाकि एयरलिफ्ट शिड्यूल करने के लिए हमें एडवांस में स्लॉट बुक करना होगा। तिलक और शामिनी ने कहाकि हम यहां पर आठ साल से हैं और कभी ऐसे हालात में नहीं घिरे। हम हाथ जोड़कर लोगों से मदद मांग रहे हैं। इमोशनली और फाइनेंशियली इसे हैंडल करना बेहद कठिन है।
लगातार बढ़ता जा रहा मिडिल ईस्ट में युद्ध
गौरतलब है कि मिडिल ईस्ट में युद्ध लगातार बढ़ता ही जा रहा है। ईरान इजरायल और पड़ोसी खाड़ी देशों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हुए हैं। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, जिससे दुनिया के तेल व्यापार का पांचवां हिस्सा गुजरता है। वहीं, अमेरिकी और इजरायली युद्धक विमान समूचे ईरान में सैन्य और अन्य लक्ष्यों पर बमबारी कर रहे हैं। इस बीच लेबनान में मानवीय संकट और गहरा हो गया है। लेबनान में हमले में लगभग 800 लोग मारे गए हैं और 850,000 लोग विस्थापित हुए हैं क्योंकि इजराइल ने ईरान समर्थित हिजबुल्ला चरमपंथियों के खिलाफ हमले शुरू किए हैं और चेतावनी दी है कि कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
लेखक के बारे में
Deepak Mishraमूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।
आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।
यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।
जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।
अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।
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